तंबाकू सरोगेट विज्ञापनों पर BJP विधायक पचपुते का बड़ा कदम, FSSAI-CCPA को लिखा पत्र
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक विक्रम बबनराव पचपुते ने 18 अगस्त 2026 को पान मसाला, फ्लेवर्ड सुपारी और तंबाकू उत्पादों के सरोगेट विज्ञापनों में सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट के मुद्दे पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI), केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की माँग की है। महाराष्ट्र में फ्लेवर्ड तंबाकू, फ्लेवर्ड सुपारी और गुटखा पर प्रतिबंध लागू होने के बावजूद इन उत्पादों से जुड़े ब्रांडों के विज्ञापन खुलेआम प्रसारित हो रहे हैं, जिसे पचपुते ने गंभीर चिंता का विषय बताया।
मुख्य घटनाक्रम
पचपुते ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को सबसे पहले महाराष्ट्र विधानसभा में उठाया था। वहाँ उन्हें जवाब मिला कि ऐसे विज्ञापनों को 'सरोगेटेड एडवर्टाइज़मेंट' माना जाता है और मौजूदा प्रावधानों के तहत सीधी कार्रवाई संभव नहीं है। इसी कानूनी खामी को दूर करने के लिए उन्होंने केंद्रीय संस्थाओं को पत्र लिखने का निर्णय किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि तुकाराम मुंढे की ओर से कुछ अभिनेताओं को नोटिस जारी किए जाने से स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। उनके अनुसार, यदि इन विज्ञापनों को केवल सरोगेट विज्ञापन माना जाता रहा, तो संबंधित सेलिब्रिटी कानूनी रास्ते से राहत पा सकते हैं।
भ्रामक विज्ञापन की माँग — नई कानूनी परिभाषा की ज़रूरत
पचपुते का मुख्य तर्क यह है कि ऐसे विज्ञापनों को केवल 'सरोगेट ऐड' नहीं, बल्कि 'मिसलीडिंग ऐड' (भ्रामक विज्ञापन) की श्रेणी में रखा जाए। उनके अनुसार, अभिनेता, खिलाड़ी और बड़े इन्फ्लुएंसर युवाओं के लिए प्रेरणा-स्रोत होते हैं। ऐसे में यदि इन्हीं चेहरों के माध्यम से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों से जुड़े ब्रांड का प्रचार होता है, तो युवाओं के गुमराह होने का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने कहा कि सेलिब्रिटी और इन्फ्लुएंसर की भी सामाजिक जिम्मेदारी है और उन्हें ऐसे विज्ञापनों से दूर रहना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में तंबाकू उत्पादों के अप्रत्यक्ष प्रचार पर बहस तेज हो रही है।
विपक्ष से अपील और राजनीतिक संदेश
पचपुते ने इस मुद्दे को जनहित से जोड़ते हुए विपक्ष से भी आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष भी इस विषय पर सरकार के साथ मिलकर काम करे, तो कानून को और मजबूत किया जा सकता है। गौरतलब है कि उन्होंने केवल राज्य स्तर के FDA तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि केंद्र सरकार की संस्थाओं को भी सीधे पत्र लिखा।
फूड सेफ्टी और न्यायपालिका पर व्यापक दृष्टिकोण
पचपुते ने कहा कि भारत की प्राथमिकताएँ बदल चुकी हैं — पहले खाद्य पदार्थों की उपलब्धता बड़ी चुनौती थी, अब फूड सेफ्टी सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है और नियमों को उसी के अनुरूप मजबूत किया जाना चाहिए। पुणे की एक मिठाई की दुकान को मुआवजा देने के उच्च न्यायालय के निर्देश से जुड़े सवाल पर उन्होंने न्यायपालिका और प्रशासन के बीच संतुलन की ज़रूरत पर जोर दिया।
उनका कहना था कि यदि सरकारी अधिकारी हर फैसले पर लगातार आलोचना के दबाव में रहेंगे, तो प्रशासन प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाएगा। न्यायपालिका की भूमिका यह सुनिश्चित करने की है कि व्यवस्था कानून के मुताबिक संचालित हो।
क्या होगा आगे
FSSAI, CCPA और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि इन संस्थाओं ने पचपुते की माँग पर सहमति जताई, तो सरोगेट विज्ञापनों की कानूनी परिभाषा में बदलाव हो सकता है — जो मनोरंजन और खेल उद्योग से जुड़े सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट के पूरे परिदृश्य को प्रभावित करेगा।