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विमल इलायची विज्ञापन विवाद: शाहरुख, अजय, टाइगर को FDA नोटिस पर BJP सांसद खंडेलवाल बोले — कानून से ऊपर कोई नहीं

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विमल इलायची विज्ञापन विवाद: शाहरुख, अजय, टाइगर को FDA नोटिस पर BJP सांसद खंडेलवाल बोले — कानून से ऊपर कोई नहीं

सारांश

महाराष्ट्र FDA ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विमल इलायची विज्ञापन मामले में नोटिस दिया। BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा — सेलिब्रिटी हैसियत कानून से छूट नहीं देती, सबके लिए एक ही कसौटी होनी चाहिए।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र एफडीए ने अभिनेताओं शाहरुख खान , अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विमल इलायची विज्ञापन मामले में नोटिस जारी किए।
BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने 17 अगस्त 2026 को इस कार्रवाई को 'कानून-सम्मत और स्वागतयोग्य कदम' बताया।
खंडेलवाल ने कहा कि सेलिब्रिटी की लोकप्रियता उन्हें कानूनों के पालन से छूट नहीं दे सकती।
उन्होंने सेलिब्रिटीज़ की सामाजिक जिम्मेदारी पर ज़ोर दिया — करोड़ों लोग इन्हें आदर्श मानते हैं।
महाराष्ट्र FDA से निष्पक्ष व पारदर्शी जाँच की उम्मीद जताई गई ताकि भविष्य में ऐसे उल्लंघन न हों।

महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने अभिनेताओं शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विमल इलायची के विज्ञापन से जुड़े कानूनी उल्लंघनों के मामले में नोटिस जारी किए हैं। इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने 17 अगस्त 2026 को कहा कि यह कदम पूरी तरह कानून-सम्मत है और देश में उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है।

एफडीए की कार्रवाई और खंडेलवाल का रुख

BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी व्यक्ति की लोकप्रियता या सेलिब्रिटी हैसियत उसे कानूनों के पालन से छूट नहीं दे सकती। उन्होंने कहा, 'यह संदेश स्पष्ट रूप से जाना चाहिए कि देश में कानून, नियम और उपभोक्ता हित सर्वोपरि हैं।' उनके अनुसार महाराष्ट्र एफडीए का यह नोटिस एक स्वागतयोग्य और आवश्यक कदम है।

सेलिब्रिटी की सामाजिक जिम्मेदारी पर सवाल

खंडेलवाल ने चिंता जताई कि कुछ प्रसिद्ध हस्तियाँ केवल व्यावसायिक लाभ के लिए ऐसे उत्पादों का प्रचार करती हैं जिनकी विज्ञापन और ब्रांडिंग को लेकर गंभीर कानूनी व नैतिक प्रश्न उठते रहे हैं। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोग इन सेलिब्रिटीज़ को अपना आदर्श मानते हैं, इसलिए उनकी सामाजिक जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उनके अनुसार, यदि ये हस्तियाँ स्वयं नियमों की अनदेखी करती दिखें, तो समाज में गलत संदेश जाता है और कानून के प्रति सम्मान कमज़ोर पड़ता है।

नियमों की अवहेलना एक गंभीर प्रवृत्ति

BJP नेता ने यह भी कहा कि दुर्भाग्य से आजकल कानूनों और नियमों की अवहेलना करना एक प्रकार का चलन बनता जा रहा है — चाहे वे चर्चित सेलिब्रिटी हों या विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) आधारित कंपनियाँ। उन्होंने कहा कि अनेक मामलों में नियमों की सीमाओं को जानबूझकर लाँघने या उनका मनमाना अर्थ निकालने का प्रयास किया जाता है, जो अत्यंत गंभीर है।

समान कानून, सबके लिए एक कसौटी

खंडेलवाल ने ज़ोर देकर कहा कि व्यापार, उद्योग, मनोरंजन जगत या किसी भी क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों के लिए एक समान नियम होने चाहिए। उनके शब्दों में, 'यदि आम नागरिक और छोटे व्यापारी कानूनों का पालन करने के लिए बाध्य हैं, तो बड़े ब्रांड, बड़ी कंपनियाँ और बड़े चेहरे भी उसी कसौटी पर परखे जाने चाहिए।' उन्होंने कहा कि कानून का सम्मान ही स्वस्थ व्यापारिक व्यवस्था और उत्तरदायी समाज की नींव है।

आगे क्या होगा

खंडेलवाल ने उम्मीद जताई कि महाराष्ट्र एफडीए इस मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जाँच करेगा और उचित कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। उनका कहना है कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति या संस्था अपनी लोकप्रियता, प्रभाव या आर्थिक शक्ति के बल पर नियमों को दरकिनार करने का साहस न कर सके — यह सुनिश्चित करना आवश्यक है। गौरतलब है कि यह मामला सेलिब्रिटी विज्ञापन और उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली परीक्षा यह है कि महाराष्ट्र एफडीए की जाँच क्या नोटिस से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई तक पहुँचती है। गौरतलब है कि भारत में सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट से जुड़े कानूनी मामलों में अक्सर नोटिस जारी होते हैं लेकिन अंतिम जवाबदेही दुर्लभ रहती है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 में एंडोर्सर्स की जिम्मेदारी स्पष्ट की गई है, फिर भी क्रियान्वयन की धीमी रफ्तार पर सवाल बने रहते हैं।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र FDA ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस क्यों दिया?
महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने तीनों अभिनेताओं को विमल इलायची के विज्ञापन-प्रसार से जुड़े कानूनी व नियामक उल्लंघनों के संदर्भ में नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण और विज्ञापन नियमों के अनुपालन से संबंधित है।
BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने FDA की कार्रवाई पर क्या कहा?
BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने 17 अगस्त 2026 को इस कार्रवाई को 'कानून-सम्मत और स्वागतयोग्य कदम' बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी सेलिब्रिटी की लोकप्रियता या आर्थिक हैसियत उसे कानूनों के पालन से छूट नहीं दे सकती और सबके लिए एक समान नियम होने चाहिए।
इस मामले में सेलिब्रिटीज़ की कानूनी जिम्मेदारी क्या है?
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत किसी उत्पाद का विज्ञापन करने वाले एंडोर्सर भी उत्पाद से जुड़े भ्रामक दावों के लिए उत्तरदायी हो सकते हैं। खंडेलवाल ने इसी बिंदु पर ज़ोर देते हुए कहा कि व्यावसायिक लाभ के लिए कानूनी व नैतिक प्रश्नों वाले उत्पादों का प्रचार करना उचित नहीं है।
महाराष्ट्र FDA इस मामले में आगे क्या कदम उठाएगा?
खंडेलवाल ने उम्मीद जताई है कि महाराष्ट्र एफडीए इस मामले की निष्पक्ष व पारदर्शी जाँच करेगा और उचित कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। फिलहाल जाँच जारी है और एफडीए की ओर से अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा है।
क्या भारत में सेलिब्रिटी विज्ञापन के लिए कोई कानूनी ढाँचा है?
हाँ, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 और भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) के दिशानिर्देशों के तहत सेलिब्रिटी एंडोर्सर्स की जिम्मेदारी तय की गई है। भ्रामक विज्ञापन के मामले में एंडोर्सर पर जुर्माना और प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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