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पान मसाला विज्ञापन से युवा नशे की राह पर: FDA नोटिस का संजय निरुपम ने किया समर्थन

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पान मसाला विज्ञापन से युवा नशे की राह पर: FDA नोटिस का संजय निरुपम ने किया समर्थन

सारांश

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने FDA के नोटिस को सही ठहराते हुए कहा कि शाहरुख खान जैसे सुपरस्टार के सरोगेट विज्ञापन युवाओं को नशे की ओर धकेलते हैं। साथ ही उन्होंने महबूबा मुफ्ती के 'दिमागी नक्सल' बयान और कांग्रेस की अंदरूनी कलह पर भी तीखे सवाल दागे।

मुख्य बातें

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने FDA द्वारा शाहरुख खान , अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को पान मसाला विज्ञापन पर नोटिस दिए जाने का पूर्ण समर्थन किया।
निरुपम के अनुसार, महाराष्ट्र में पान मसाला व गुटखे की सार्वजनिक बिक्री पहले से प्रतिबंधित है; सरोगेट विज्ञापन इस प्रतिबंध की भावना का उल्लंघन करते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के 'दिमागी नक्सल' वाले बयान पर निरुपम ने कहा कि यह संविधान और गांधीवादी विचारधारा के प्रति अविश्वास को दर्शाता है।
निरुपम ने पुष्टि की कि 2012-13 के आसपास गोपीनाथ मुंडे ने कांग्रेस में जाने पर विचार किया था; विलासराव देशमुख मध्यस्थ थे, लेकिन भाजपा ने उन्हें मनाकर रोक लिया।
निरुपम ने दावा किया कि कांग्रेस नाराज नेताओं को संभालने की बजाय उन्हें बाहर का रास्ता दिखाती है, जबकि भाजपा आंतरिक मतभेद सुलझाती है।

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 17 अगस्त को मुंबई में कहा कि महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को पान मसाला के सरोगेट विज्ञापनों को लेकर नोटिस दिया जाना पूरी तरह उचित है। उनके अनुसार, इस तरह के विज्ञापन युवा पीढ़ी को नशीले पदार्थों की ओर धकेलते हैं और समाज के लिए घातक हैं।

FDA नोटिस पर निरुपम का रुख

निरुपम ने स्पष्ट किया कि पान मसाला, गुटखा और जर्दा जैसे पदार्थ प्रतिबंधित श्रेणी में आते हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में पान मसाला और गुटखे की सार्वजनिक बिक्री पर पहले से पाबंदी है। ऐसे में जब शाहरुख खान, अजय देवगन या टाइगर श्रॉफ जैसे सुपरस्टार सरोगेट विज्ञापनों के ज़रिए इन ब्रांडों का प्रचार करते हैं, तो उनके करोड़ों प्रशंसक — विशेषकर युवा — इन पदार्थों के सेवन के लिए प्रेरित होते हैं।

उन्होंने कहा कि इन नशीले पदार्थों के सेवन से गंभीर बीमारियाँ होती हैं और कैंसर के कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान जाती है। उनके शब्दों में, 'यह विज्ञापन समाज के लिए, पूरी युवा पीढ़ी के लिए और देश के लिए घातक हैं और गैरकानूनी भी हैं।' निरुपम ने आग्रह किया कि फिल्म स्टार्स को FDA के इस निर्णय का सम्मान करना चाहिए।

'दिमागी नक्सल' विवाद पर प्रतिक्रिया

पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती द्वारा खुद को 'दिमागी नक्सल' बताए जाने पर निरुपम ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से कुछ अराजक तत्वों को 'दिमागी नक्सलवादी' कहा था।

निरुपम ने सवाल उठाया कि जब पी. चिदंबरम और महबूबा मुफ्ती जैसे विपक्षी नेता गर्व से खुद को 'दिमागी नक्सली' बता रहे हैं, तो क्या वे स्वीकार करते हैं कि उनका भारत के संविधान और अहिंसक गांधीवादी विचारधारा में विश्वास नहीं है? उन्होंने कहा कि इसका जवाब चिदंबरम को सार्वजनिक रूप से देना होगा।

गौरतलब है कि आर्टिकल 370 को भारत की संसद ने विधिवत हटाया था। निरुपम के अनुसार, यदि महबूबा मुफ्ती इसे पुनः लागू कराने की माँग करने वाले तत्वों का समर्थन करती हैं, तो यह संसदीय निर्णय के प्रति अविश्वास को दर्शाता है।

गोपीनाथ मुंडे और कांग्रेस की अंदरूनी कलह

कांग्रेस नेता हुसैन दलवाई के इस दावे पर कि दिवंगत गोपीनाथ मुंडे और एकनाथ शिंदे कांग्रेस में शामिल होने को तैयार थे, निरुपम ने कहा कि गोपीनाथ मुंडे के संदर्भ में इसमें काफी सच्चाई है।

उन्होंने बताया कि 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद 2012-13 के आसपास पुणे में एक जिला अध्यक्ष की नियुक्ति के मुद्दे पर तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुंडे का तनाव बढ़ गया था। इसी दौरान उन्होंने कांग्रेस में जाने पर विचार किया था और तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से भी मुलाकात की थी। विलासराव देशमुख इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे। हालाँकि, जैसे ही भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को इसकी भनक लगी, उन्होंने मुंडे की सभी चिंताओं को दूर करते हुए उन्हें पार्टी में ही रोक लिया।

भाजपा और कांग्रेस की कार्यसंस्कृति में फर्क

निरुपम ने कहा कि यही भाजपा और कांग्रेस की कार्यसंस्कृति का मूल अंतर है। उनके अनुसार, कांग्रेस में जब कोई बड़ा नेता नाराज होता है, तो शीर्ष नेतृत्व उसे मनाने की बजाय 'एक धक्का और' देता है। उन्होंने दावा किया कि यदि पृथ्वीराज चव्हाण या हुसैन दलवाई आज पार्टी छोड़ने की सोचें, तो उन्हें थामने वाला कोई नहीं होगा — बल्कि दिल्ली से पार्टी उन्हें बाहर करने में जुट जाएगी। इसके विपरीत, भाजपा में नेतृत्व और कार्यकर्ता अपने लोगों को संभालने के लिए दिन-रात प्रयास करते हैं।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में राजनीतिक गठजोड़ों और दलबदल की चर्चाएँ एक बार फिर तेज हो गई हैं और विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली वितरण तंत्र पर कार्रवाई कब होगी? 'दिमागी नक्सल' विवाद पर निरुपम की आक्रामकता सत्तापक्ष की उस रणनीति का हिस्सा है जो विपक्ष को संवैधानिक मूल्यों से दूर दिखाना चाहती है — लेकिन इस बहस में असली नीतिगत मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। गोपीनाथ मुंडे प्रकरण पर उनका खुलासा कांग्रेस को घेरने का प्रयास है, पर यह भाजपा की अपनी आंतरिक दरारों को भी उजागर करता है जिन्हें 'मनाकर' दबाया गया।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

FDA ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस क्यों दिया?
महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने इन तीनों अभिनेताओं को पान मसाला कंपनियों के सरोगेट विज्ञापनों में दिखाई देने पर नोटिस दिया। महाराष्ट्र में पान मसाला और गुटखे की सार्वजनिक बिक्री पर पहले से प्रतिबंध है, और FDA का मानना है कि ये विज्ञापन उस प्रतिबंध की भावना का उल्लंघन करते हैं।
संजय निरुपम ने FDA के नोटिस पर क्या कहा?
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने FDA के नोटिस को 'स्वागतयोग्य कदम' बताया। उनके अनुसार, सुपरस्टार के सरोगेट विज्ञापन युवाओं को नशीले पदार्थों की ओर प्रेरित करते हैं और ये विज्ञापन 'समाज, युवा पीढ़ी और देश के लिए घातक तथा गैरकानूनी' हैं।
'दिमागी नक्सल' विवाद क्या है और निरुपम ने इस पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से कुछ अराजक तत्वों को 'दिमागी नक्सलवादी' कहा था, जिसके बाद महबूबा मुफ्ती और पी. चिदंबरम जैसे विपक्षी नेताओं ने खुद को 'दिमागी नक्सल' बताया। निरुपम ने इस पर सवाल उठाया कि क्या ये नेता स्वीकार कर रहे हैं कि उनका संविधान और अहिंसक विचारधारा में विश्वास नहीं है।
क्या गोपीनाथ मुंडे सच में कांग्रेस में जाने वाले थे?
संजय निरुपम ने माना कि 2012-13 के आसपास पुणे जिला अध्यक्ष की नियुक्ति विवाद के चलते गोपीनाथ मुंडे ने कांग्रेस में जाने पर विचार किया था और डॉ. मनमोहन सिंह से मुलाकात भी की थी। हालाँकि, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने उनकी सभी चिंताएँ दूर करके उन्हें पार्टी में रोक लिया।
निरुपम के अनुसार भाजपा और कांग्रेस की कार्यसंस्कृति में क्या फर्क है?
निरुपम का दावा है कि भाजपा में नाराज नेताओं को मनाने के लिए नेतृत्व दिन-रात प्रयास करता है, जबकि कांग्रेस में असंतुष्ट नेता को 'एक धक्का और' देकर बाहर का रास्ता दिखाया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि पृथ्वीराज चव्हाण या हुसैन दलवाई आज पार्टी छोड़ना चाहें, तो उन्हें थामने वाला कोई नहीं होगा।
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