तृणमूल नेता अजीत मैती के बहनोई समेत चार गिरफ्तार, ICDS नौकरी के नाम पर ₹5 लाख की धोखाधड़ी
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व विधायक एवं जिला अध्यक्ष अजीत मैती के बहनोई गोविंद कर को 1 अक्टूबर 2026 को खड़गपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उन पर आरोप है कि उन्होंने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) में नौकरी दिलाने के झूठे वादे पर ₹5 लाख की ठगी की। इस कथित वित्तीय धोखाधड़ी मामले में अजीत मैती स्वयं पहले से पुलिस हिरासत में हैं।
गिरफ्तारी और तलाशी का विवरण
गुरुवार को खड़गपुर स्थानीय पुलिस स्टेशन की टीम ने गोविंद कर को मदपुर स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया। जाँचकर्ताओं के अनुसार, तलाशी के दौरान आवास से नकदी और कई सोने के आभूषण बरामद किए गए। इसके साथ ही मैती के ड्राइवर अमल भुइयां और सहयोगी प्रणब मंडल उर्फ साहब को भी इसी मामले में गिरफ्तार किया गया।
बुधवार सुबह पुलिस ने अजीत मैती के पैतृक गाँव फुलगेरिया निवासी प्रणब मंडल के आवास पर छापा मारा, जहाँ कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और एक लैपटॉप जब्त किए गए।
शिकायत की पृष्ठभूमि
पुलिस के मुताबिक, अजीत मैती पर आरोप है कि उन्होंने एक व्यक्ति से उसकी पत्नी को ICDS में नौकरी दिलाने का वादा कर ₹5 लाख लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि 2025 में रकम चुकाने के बाद भी नौकरी नहीं मिली और जब उसने पैसे वापस माँगे तो उसे कथित तौर पर धमकी दी गई। इसके बाद 26 सितंबर 2026 को शिकायतकर्ता ने खड़गपुर स्थानीय पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
अदालत में पेशी और हिरासत
गिरफ्तार तीनों आरोपी — गोविंद कर, अमल भुइयां और प्रणब मंडल — को गुरुवार को मिदनापुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) न्यायालय में पेश किया गया। सरकारी वकील सैयद नाजिम हबीब ने बताया कि अदालत ने कथित नौकरी धोखाधड़ी और रकम न लौटाने से संबंधित धाराओं के तहत तीनों को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।
गौरतलब है कि अजीत मैती को पिंगला के एक पुराने मामले में जमानत मिल चुकी थी, लेकिन खड़गपुर में दर्ज नए मामले में वे मंगलवार से पुलिस हिरासत में हैं। बचाव पक्ष के वकील मृणाल चौधरी ने बताया कि मैती 3 अक्टूबर 2026 को फिर से अदालत में पेश होंगे।
व्यापक संदर्भ
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में सरकारी नौकरियों में भर्ती घोटालों को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। आलोचकों का कहना है कि सत्ताधारी दल के नेताओं से जुड़े ऐसे मामले आम लोगों के भरोसे को गहरी चोट पहुँचाते हैं। जाँच अभी जारी है और आगे और खुलासे संभव हैं।