पैसे के बदले नौकरी घोटाला: गिरफ्तार TMC नेता अजीत महता की पूछताछ में पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री का नाम उजागर
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में पैसे के बदले नौकरी के एक मामले में गिरफ्तार तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता अजीत महता से पुलिस पूछताछ के दौरान राज्य के एक पूर्व मंत्री का नाम सामने आया है। 29 अक्टूबर की रात गिरफ्तार महता पर आरोप है कि उन्होंने एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दिलाने का वादा करके उससे कई किश्तों में कुल ₹10 लाख वसूले। मामले की जांच अभी शुरुआती दौर में है और पुलिस ने पूर्व मंत्री का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।
मामले का मूल घटनाक्रम
सजल दास नाम के एक व्यक्ति की शिकायत पर कोलकाता पुलिस ने अजीत महता को 29 अक्टूबर 2026 की रात हिरासत में लिया। दास का आरोप है कि TMC नेता ने उन्हें सरकारी नौकरी दिलाने का वादा करके समय-समय पर कई किश्तों में ₹10 लाख ले लिए, लेकिन वादा पूरा नहीं किया। जब दास ने या तो नौकरी देने या पैसे लौटाने की माँग की, तो कथित तौर पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
जांच में सामने आया है कि जिन सरकारी पदों के नाम पर पैसे वसूले गए, वे पश्चिम बंगाल वन विभाग और पश्चिम बंगाल पश्चिम क्षेत्रीय विकास विभाग से संबंधित थे।
पूर्व मंत्री का नाम कैसे आया सामने
राज्य पुलिस के एक सूत्र के अनुसार, पूछताछ के दौरान महता ने स्वीकार किया कि जिस उम्मीदवार को नौकरी दिलाने का वादा किया गया था, उसकी सिफारिश पश्चिम बंगाल के एक पूर्व मंत्री ने की थी। यह पूर्व मंत्री झारग्राम जिले से ताल्लुक रखते हैं — वही जिला जहाँ के महता भी मूल निवासी हैं। सूत्र ने स्पष्ट किया कि पूर्व मंत्री का नाम महता के खिलाफ दर्ज एफआईआर में शामिल नहीं है, लेकिन पूछताछ में यह नाम सामने आने के बाद जांच अधिकारी ने उस दिशा में भी जांच शुरू कर दी है।
पुलिस की प्रतिक्रिया
राज्य पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, 'इस समय इससे ज़्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है।' पुलिस ने पूर्व मंत्री की पहचान उजागर करने से स्पष्ट इनकार किया है और इसे जांच की संवेदनशीलता से जोड़ा है। गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में भर्ती-घोटालों की पृष्ठभूमि में सत्तारूढ़ TMC पहले से दबाव में है।
व्यापक संदर्भ: बंगाल में भर्ती विवादों की श्रृंखला
यह प्रकरण बंगाल में पैसे के बदले सरकारी नौकरी से जुड़े विवादों की एक लंबी कड़ी में जुड़ता है। राज्य में शिक्षक भर्ती घोटाले से लेकर विभिन्न विभागों में नियुक्ति में अनियमितताओं के मामले पहले भी न्यायिक और जांच एजेंसियों के दायरे में आ चुके हैं। इस ताज़ा मामले में वन विभाग और पश्चिम क्षेत्रीय विकास विभाग का नाम आना जांच के दायरे को और विस्तृत कर सकता है।
आगे क्या होगा
जांच अधिकारी अब झारग्राम से जुड़े पूर्व मंत्री के संभावित रोल की पड़ताल कर रहे हैं। यदि जांच में उनकी भूमिका प्रमाणित होती है, तो एफआईआर में और नाम जुड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मामले की अगली सुनवाई और गिरफ्तार महता की न्यायिक हिरासत पर फैसला आने वाले दिनों में होने की उम्मीद है।