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71वें कर्नाटक राज्योत्सव पर प्रियांक खड़गे बोले — कन्नड़ भावना, इतिहास और संस्कृति का अनूठा संगम

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71वें कर्नाटक राज्योत्सव पर प्रियांक खड़गे बोले — कन्नड़ भावना, इतिहास और संस्कृति का अनूठा संगम

सारांश

71वें कर्नाटक राज्योत्सव पर मंत्री प्रियांक खड़गे ने कलबुर्गी से कन्नड़ की 2,000 साल पुरानी विरासत को सलाम किया। साथ ही जिले की GDP हिस्सेदारी 1.9% से ऊपर उठाने के लिए नया मास्टर प्लान और कल्याण कर्नाटक इकोनॉमिक मिशन की रूपरेखा भी पेश की।

मुख्य बातें

प्रियांक खड़गे ने 1 नवंबर 2026 को 71वें कर्नाटक राज्योत्सव पर कलबुर्गी में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और कन्नड़ को भावना, इतिहास व संस्कृति का संगम बताया।
कन्नड़ भाषा का इतिहास लगभग 2,000 वर्ष पुराना; दशहरे में 40 से अधिक विदेशी राजदूतों ने राज्य की संस्कृति की प्रशंसा की।
बेंगलुरु राज्य GDP में 40% योगदान देता है, जबकि कलबुर्गी का योगदान मात्र 1.9% — सरकार इसे बढ़ाने के लिए नया मास्टर प्लान लाई है।
युवाओं के लिए प्रबुद्ध अकादमी और निजी-सरकारी साझेदारी के लिए कलबुर्गी नेक्स्ट फाउंडेशन की स्थापना।
शिवकुमार ने 17 सितंबर को कल्याण कर्नाटक इकोनॉमिक मिशन की घोषणा की थी।

कर्नाटक के गृह, आईटी-बीटी और ई-गवर्नेंस मंत्री प्रियांक खड़गे ने 1 नवंबर 2026 को 71वें कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर कहा कि कन्नड़ महज एक भाषा नहीं, बल्कि यह भावना, इतिहास, विचार और संस्कृति का एक अनूठा संगम है। कलबुर्गी के गंज क्षेत्र स्थित नागरीश्वर स्कूल परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद उन्होंने राज्य की समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने की अपील की।

कन्नड़ की समृद्ध साहित्यिक परंपरा

प्रियांक खड़गे ने कहा कि कन्नड़ भाषा की एक गौरवशाली साहित्यिक परंपरा रही है, जिसमें लोक साहित्य, जैन साहित्य, नवोदय, नव्या और बंदया आंदोलन जैसी विविध धाराएँ शामिल हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि इतनी समृद्ध और बहुआयामी साहित्यिक विरासत अन्य भाषाओं में दुर्लभ है। उनके अनुसार, कन्नड़ भाषा का इतिहास लगभग 2,000 वर्ष पुराना है — एक तथ्य जिसे जानकर विदेशी प्रतिनिधि भी अचंभित हुए।

विदेशी राजदूतों ने सराही कर्नाटक की संस्कृति

खड़गे ने बताया कि राज्य सरकार ने हाल ही में दशहरा उत्सव में 40 से अधिक विदेशी राजदूतों को आमंत्रित किया था। इस अवसर पर इन विदेशी प्रतिनिधियों ने कर्नाटक की कला, साहित्य, भोजन और संस्कृति की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने राज्य के इतिहास और सांस्कृतिक विविधता के बारे में जानकर प्रसन्नता व्यक्त की।

कर्नाटक की क्षेत्रीय विविधता

मंत्री ने कर्नाटक की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी-अपनी पहचान है। मलनाड अपनी हरियाली के लिए प्रसिद्ध है, कल्याण कर्नाटक तूर दाल और सूफी संतों की विरासत से जुड़ा है, जबकि मांड्या क्षेत्र रेशम और दुग्ध उत्पादन के लिए जाना जाता है। तटीय क्षेत्र की भी अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है।

कलबुर्गी विकास: नया मास्टर प्लान और आर्थिक लक्ष्य

कलबुर्गी के प्रभारी मंत्री के रूप में खड़गे ने बताया कि जिले के समग्र विकास के लिए एक नया मास्टर प्लान तैयार किया गया है, जिसमें विदेशी निवेश आकर्षित करने, रोजगार सृजन और बुनियादी ढाँचे में सुधार पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि विकास कार्यों के परिणाम अगले दो वर्षों में दिखाई देने लगेंगे। उल्लेखनीय है कि जहाँ बेंगलुरु राज्य की जीडीपी में करीब 40 प्रतिशत का योगदान देता है, वहीं कलबुर्गी जिले का योगदान अभी मात्र 1.9 प्रतिशत है। सरकार का लक्ष्य रोजगार सृजन और प्रति व्यक्ति आय बढ़ाकर इस हिस्सेदारी को ऊपर उठाना है।

प्रबुद्ध अकादमी और कलबुर्गी नेक्स्ट फाउंडेशन

युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग देने के लिए सरकार ने प्रबुद्ध अकादमी की स्थापना की है। इसके अलावा, सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से नई विकास परियोजनाओं की खोज के लिए कलबुर्गी नेक्स्ट फाउंडेशन भी गठित किया गया है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के हवाले से खड़गे ने कहा कि यह सरकारी-निजी भागीदारी का सशक्त उदाहरण है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने 17 सितंबर को क्षेत्रीय विकास को गति देने के लिए कल्याण कर्नाटक इकोनॉमिक मिशन की घोषणा की थी। आने वाले वर्षों में इन पहलों की सफलता ही तय करेगी कि कल्याण कर्नाटक राज्य की आर्थिक मुख्यधारा में कितनी तेजी से शामिल हो पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनकी विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर है कि क्या ये घोषणाएँ समयबद्ध और मापने योग्य परिणामों से जुड़ेंगी। 17 सितंबर को घोषित कल्याण कर्नाटक इकोनॉमिक मिशन अभी शैशवावस्था में है — असली परीक्षा अगले दो वर्षों में होगी, जब खड़गे ने खुद नतीजे दिखने का वादा किया है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियांक खड़गे ने कन्नड़ के बारे में 71वें राज्योत्सव पर क्या कहा?
मंत्री प्रियांक खड़गे ने 1 नवंबर 2026 को कलबुर्गी में कहा कि कन्नड़ केवल एक भाषा नहीं बल्कि भावना, इतिहास, विचार और संस्कृति का अनूठा संगम है। उन्होंने राज्य की समृद्ध साहित्यिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने की अपील भी की।
कन्नड़ भाषा की साहित्यिक परंपरा कितनी पुरानी है?
कन्नड़ भाषा का इतिहास लगभग 2,000 वर्ष पुराना है। इसकी साहित्यिक परंपरा में लोक साहित्य, जैन साहित्य, नवोदय, नव्या और बंदया आंदोलन जैसी विविध धाराएँ शामिल हैं।
कलबुर्गी जिले के विकास के लिए सरकार ने क्या योजनाएँ बनाई हैं?
कलबुर्गी के लिए एक नया मास्टर प्लान तैयार किया गया है जो विदेशी निवेश, रोजगार सृजन और बुनियादी ढाँचे में सुधार पर केंद्रित है। इसके अलावा प्रबुद्ध अकादमी और कलबुर्गी नेक्स्ट फाउंडेशन की भी स्थापना की गई है। खड़गे ने कहा कि इन प्रयासों के नतीजे अगले दो वर्षों में दिखेंगे।
कल्याण कर्नाटक इकोनॉमिक मिशन क्या है?
कल्याण कर्नाटक इकोनॉमिक मिशन की घोषणा मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 17 सितंबर को की थी। इसका उद्देश्य कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में आर्थिक विकास को गति देना और इस इलाके की जीडीपी हिस्सेदारी बढ़ाना है।
कलबुर्गी का कर्नाटक की जीडीपी में कितना योगदान है?
वर्तमान में कलबुर्गी जिले का राज्य की जीडीपी में योगदान मात्र 1.9 प्रतिशत है, जबकि बेंगलुरु अकेले लगभग 40 प्रतिशत का योगदान देता है। सरकार रोजगार सृजन और प्रति व्यक्ति आय बढ़ाकर इस असमानता को दूर करने की कोशिश कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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