15 सितंबर 2026
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कलबुर्गी के 200 साल पुराने गणेश मंदिर में मन्नत पूरी होने पर लगाते हैं रंग, स्वयंभू प्रतिमा की अनोखी मान्यता

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कलबुर्गी के 200 साल पुराने गणेश मंदिर में मन्नत पूरी होने पर लगाते हैं रंग, स्वयंभू प्रतिमा की अनोखी मान्यता

सारांश

कलबुर्गी का यह 200 साल पुराना गणेश मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं — यहाँ मन्नत पूरी होने पर भक्त प्रतिमा को रंग लगाते हैं, जो इसे कर्नाटक का एक अनूठा धार्मिक स्थल बनाता है। गणेश चतुर्थी पर 14 दिनों तक प्रसाद वितरण और अनेक राज्यों से श्रद्धालुओं का आगमन इस परंपरा की जीवंतता का प्रमाण है।

मुख्य बातें

कलबुर्गी, कर्नाटक में स्थित यह गणेश मंदिर लगभग 200 साल पुराना माना जाता है।
मंदिर की स्वयंभू गणेश प्रतिमा की ऊँचाई 12 से 15 फीट बताई जाती है; स्थानीय मान्यता के अनुसार यह बढ़ रही थी।
मन्नत पूरी होने पर भक्त प्रतिमा पर रंग लगाने की अनूठी परंपरा का पालन करते हैं।
गणेश चतुर्थी के दौरान 14 दिनों तक मंदिर में प्रसाद वितरण की विशेष व्यवस्था होती है।
स्थानीय निवासियों ने सरकार से मंदिर तक बेहतर सड़क और सुविधाएँ उपलब्ध कराने की माँग की है।

कर्नाटक के कलबुर्गी में स्थित एक लगभग 200 साल पुराने प्राचीन गणेश मंदिर में एक अनूठी परंपरा सदियों से जीवित है — यहाँ श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर भगवान गणेश की प्रतिमा पर रंग लगाकर अपनी आभार-भावना प्रकट करते हैं। गणेश चतुर्थी 2026 के अवसर पर यह मंदिर एक बार फिर आस्था और आस्था की इस अनोखी रस्म के लिए चर्चा में है।

स्वयंभू प्रतिमा और स्थानीय मान्यताएँ

स्थानीय निवासी इरन्ना के अनुसार, मंदिर में स्थापित गणेश प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है और इसकी ऊँचाई करीब 12 से 13 फीट बताई जाती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह प्रतिमा पहले धीरे-धीरे बढ़ रही थी, और पूर्वजों ने पूजा-अर्चना में कठिनाई न हो इसलिए इसे रोकने का विशेष उपाय किया था।

एक और प्रचलित मान्यता के अनुसार प्रतिमा के सिर के ऊपर कील लगाने से उसकी बढ़ती ऊँचाई को रोका गया। स्थानीय निवासी प्रवीण ने बताया कि प्रतिमा समय के साथ बढ़कर करीब 12 से 15 फीट तक पहुँच गई थी, जिससे भविष्य में पूजा में परेशानी की आशंका जताई जा रही थी।

मन्नत और रंग की अनूठी परंपरा

इरन्ना ने बताया कि भक्त सच्चे मन से अपनी मनोकामना लेकर यहाँ आते हैं, और जब मन्नत पूरी होती है तो वे गणेश जी की प्रतिमा पर रंग लगाते हैं। उन्होंने कहा, 'बहुत से लोग उनमें विश्वास करते हैं और अलग-अलग राज्यों से लोग उनकी पूजा करने आते हैं।' यह परंपरा केवल स्थानीय नहीं, बल्कि अनेक राज्यों के श्रद्धालुओं को यहाँ खींचती है।

गौरतलब है कि रंग लगाने की यह प्रथा अन्य मंदिरों में प्रचलित अभिषेक या पुष्पार्पण से भिन्न है, और इसे मंदिर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान बनाती है।

गणेश चतुर्थी पर विशेष आयोजन

गणेश चतुर्थी के अवसर पर मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस उत्सव के दौरान करीब 14 दिनों तक श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की व्यवस्था की जाती है। देशभर में गणेश चतुर्थी का उत्साह चरम पर है, और ऐसे में यह मंदिर अपनी अनूठी परंपरा के कारण विशेष ध्यान आकर्षित कर रहा है।

आम जनता और सरकार से अपील

स्थानीय लोगों का कहना है कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था इस मंदिर से जुड़ी है। प्रवीण ने बताया कि आसपास के क्षेत्र के लोग इस मंदिर को अत्यंत पवित्र मानते हैं। उन्होंने सरकार से मंदिर तक पहुँचने के लिए बेहतर सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराने की माँग भी की है, ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को कोई कठिनाई न हो।

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। स्थानीय निवासियों की माँग पर यदि ध्यान दिया जाए तो यह मंदिर कर्नाटक के सांस्कृतिक पर्यटन मानचित्र पर और अधिक उभर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या ऐसे छोटे किंतु सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध स्थलों को भी इसमें शामिल किया जाएगा?
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलबुर्गी के इस गणेश मंदिर की क्या विशेषता है?
यह मंदिर करीब 200 साल पुराना माना जाता है और यहाँ की स्वयंभू गणेश प्रतिमा पर मन्नत पूरी होने पर भक्त रंग लगाते हैं — यह परंपरा इसे कर्नाटक का एक अनूठा धार्मिक स्थल बनाती है। अनेक राज्यों से श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं।
गणेश प्रतिमा पर रंग क्यों लगाया जाता है?
स्थानीय मान्यता के अनुसार, जब कोई भक्त सच्चे मन से माँगी गई मन्नत पूरी होने पर आभार प्रकट करना चाहता है, तो वह गणेश जी की प्रतिमा पर रंग लगाता है। यह श्रद्धा की एक विशिष्ट अभिव्यक्ति है जो इस मंदिर की पहचान बन चुकी है।
इस मंदिर की स्वयंभू प्रतिमा को लेकर कौन-सी मान्यताएँ प्रचलित हैं?
स्थानीय निवासियों के अनुसार प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई मानी जाती है और पहले यह धीरे-धीरे बढ़ रही थी, जो 12 से 15 फीट तक पहुँच गई। पूर्वजों ने पूजा में असुविधा से बचने के लिए प्रतिमा के सिर पर कील लगाने की विधि अपनाई — यह एक प्रचलित स्थानीय मान्यता है।
गणेश चतुर्थी के समय इस मंदिर में क्या विशेष होता है?
गणेश चतुर्थी पर मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं और करीब 14 दिनों तक श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की व्यवस्था रहती है। इस दौरान मंदिर में भक्तों की संख्या उल्लेखनीय रूप से बढ़ जाती है।
स्थानीय लोगों ने सरकार से क्या माँग की है?
स्थानीय निवासियों ने सरकार से मंदिर तक आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराने की माँग की है, ताकि दूर-दराज से आने वाले भक्तों को कठिनाई न हो।
राष्ट्र प्रेस
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