क्या लालबागचा राजा मंदिर हर मन्नत को पूरा करता है? 91 वर्षों से भक्तों की भीड़ उमड़ रही है

सारांश
Key Takeaways
- लालबागचा राजा का मंदिर हर साल लाखों भक्तों को आकर्षित करता है।
- यह मंदिर 91 वर्षों से मन्नतें पूरी करता आ रहा है।
- गणेश चतुर्थी पर 22 फीट ऊंची मूर्ति की स्थापना की गई है।
- भक्तों के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
- लालबागचा राजा को 'मन्नतों का राजा' कहा जाता है।
मुंबई, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। जब हर साल गणेश चतुर्थी का पर्व आता है, तब मुंबई की गलियों से लेकर मंदिरों तक एक अद्भुत रौनक नजर आती है। ढोल-ताशों की गूंज, बप्पा के स्वागत में लगने वाले जयघोष, फूलों से सजे मंडल और उन्हें देखने के लिए उमड़ती लाखों की भीड़, ये सब मिलकर इस त्योहार को खास बनाते हैं।
बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी इस आयोजन का ध patiently कर इंतजार करते हैं। जब बात मुंबई की गणेश चतुर्थी की होती है, तो सबसे पहले लालबागचा राजा मंदिर का नाम आता है।
मुंबई का सबसे प्रसिद्ध सार्वजनिक गणेश मंडल लालबागचा राजा लोगों की आस्था का प्रतीक है। लालबाग परेल क्षेत्र में स्थित यह पंडाल हर साल गणेश चतुर्थी पर भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां श्रद्धालु केवल दर्शन के लिए नहीं, बल्कि अपनी मुरादें पूरी करने की आशा लेकर भी आते हैं। कहा जाता है कि जो भी दिल से लालबागचा राजा से प्रार्थना करता है, उसकी मुराद जरूर पूरी होती है। इसलिए इन्हें 'मन्नतों का राजा' भी कहा जाता है।
इस साल भी बड़ी संख्या में भक्त यहां बप्पा के दर्शन के लिए आ रहे हैं, जिसमें कई मशहूर हस्तियां भी शामिल हैं। 22 फीट ऊंची गणेश की मूर्ति इस बार यहां स्थापित की गई है, जो तमिलनाडु के रामेश्वरम की पौराणिक कथा से प्रेरित है।
लालबागचा राजा मंडल के उपाध्यक्ष सिद्धेश कोरगावकर ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया, "यह लालबाग क्षेत्र का सबसे पुराना गणपति है। इस बार की मूर्ति की ऊंचाई 22 फीट है।"
उन्होंने बताया कि मूर्ति और सजावट में रामेश्वरम की थीम को दर्शाया गया है, जिसमें हनुमानजी भगवान शंकर का पिंड लेकर आते हैं।
लालबागचा राजा मंडल की स्थापना 1934 में हुई थी। लगभग नौ दशक पहले कुछ मछुआरों और दुकानदारों ने बप्पा से बाजार के लिए एक स्थायी स्थान की मन्नत मांगी थी। जब उनकी यह मन्नत पूरी हुई, तो उन्होंने आभार के तौर पर एक छोटी गणेश मूर्ति स्थापित की। तब से यह परंपरा आज भी 91 साल बाद पूरी आस्था के साथ निभाई जा रही है।
लालबागचा राजा के दर्शन के लिए दो मुख्य कतारें होती हैं। पहली 'नवसाची लाइन' है, जिसमें वे लोग लगते हैं जो अपनी विशेष मन्नत लेकर बप्पा के चरणों तक जाना चाहते हैं। इस कतार में दर्शन के लिए 25 से 40 घंटे का समय भी लग सकता है। दूसरी 'मुखदर्शन लाइन' है, जिसमें भक्त बप्पा को दूर से देख सकते हैं। यह कतार छोटी होती है, लेकिन कई बार यहां 4 से 5 घंटे भी लग जाते हैं।
इस वर्ष भी गणेश चतुर्थी पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मंडल द्वारा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। हजारों पुलिसकर्मी और स्वयंसेवक तैनात हैं ताकि भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। पंडाल के अंदर श्रद्धालुओं के लिए मेडिकल असिस्टेंस, पानी और शौचालय जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।