यूपी विधानसभा में महिला आरक्षण पर संग्राम: योगी का निंदा प्रस्ताव, सपा-भाजपा में तीखी नोकझोंक

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यूपी विधानसभा में महिला आरक्षण पर संग्राम: योगी का निंदा प्रस्ताव, सपा-भाजपा में तीखी नोकझोंक

सारांश

यूपी विधानसभा का विशेष सत्र महिला आरक्षण की राजनीति का अखाड़ा बन गया — योगी सरकार का निंदा प्रस्ताव, सपा का परिसीमन-जनगणना पर पलटवार, और रिकॉर्ड से हटाए गए बयान। असली सवाल यह है कि विधेयक पारित होने के बाद भी अमल क्यों नहीं हुआ।

Key Takeaways

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 30 अप्रैल 2026 को यूपी विधानसभा के विशेष सत्र में विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया। सपा विधायक अतुल प्रधान और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बीच तीखी बहस के बाद कई बयान रिकॉर्ड से हटाए गए। मंत्री आशीष पटेल ने कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा को BJP में शामिल होने का प्रस्ताव दिया, जिसे मिश्रा ने ठुकरा दिया। सपा विधायक पल्लवी पटेल ने आरोप लगाया कि BJP परिसीमन और जनगणना की शर्त जोड़कर महिला आरक्षण लागू करने से बच रही है। सरकार का कहना है विपक्ष आरक्षण में बाधक है, जबकि विपक्ष का कहना है विधेयक पारित होने के बावजूद अमल नहीं हुआ।

उत्तर प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में 30 अप्रैल 2026 को महिला आरक्षण के मुद्दे पर सियासी टकराव चरम पर पहुँच गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विपक्ष के खिलाफ लाए गए निंदा प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों के बीच तीखी बहस, नारेबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला, और कई बयान सदन के रिकॉर्ड से हटाए गए।

सदन में क्या हुआ

चर्चा के दौरान सपा विधायक अतुल प्रधान और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। माहौल कई बार इतना गर्म हो गया कि अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा और विवादास्पद टिप्पणियाँ कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटानी पड़ीं।

मंत्री आशीष पटेल ने सदन में कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा को BJP में शामिल होने का प्रस्ताव दिया। इस पर मिश्रा ने पलटवार करते हुए कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य

Point of View

और उसे चुनावी मुद्दे के रूप में जीवित रखने की रणनीति अधिक लगती है। संसद में विधेयक पारित हुए डेढ़ साल से अधिक हो चुके हैं, फिर भी परिसीमन और जनगणना की शर्तें इसे अनिश्चितकाल के लिए टाल देती हैं — और दोनों पक्ष इसी अनिश्चितता का राजनीतिक लाभ उठाने में व्यस्त हैं। जब तक कार्यान्वयन की ठोस समयसीमा नहीं आती, सदन में होने वाली हर बहस महिलाओं के वास्तविक प्रतिनिधित्व की जगह सुर्खियों की राजनीति बनकर रह जाएगी।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

यूपी विधानसभा में महिला आरक्षण पर निंदा प्रस्ताव क्यों लाया गया?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर महिला आरक्षण संशोधन विधेयक में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए 30 अप्रैल 2026 को विशेष सत्र में यह निंदा प्रस्ताव लाया। सरकार का तर्क है कि विपक्ष ने विधेयक की प्रक्रिया में रोड़े अटकाए हैं।
सपा का महिला आरक्षण पर क्या रुख है?
समाजवादी पार्टी का कहना है कि महिला आरक्षण विधेयक संसद में पहले ही पारित हो चुका है और BJP सरकार परिसीमन तथा जनगणना की शर्तें जोड़कर उसे जानबूझकर लागू नहीं कर रही। सपा विधायक पल्लवी पटेल ने जनगणना में देरी को भी इसी रणनीति का हिस्सा बताया।
सदन में किन बयानों को रिकॉर्ड से हटाया गया?
चर्चा के दौरान सपा विधायक अतुल प्रधान और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बीच तीखी नोकझोंक के बाद कई विवादास्पद टिप्पणियाँ सदन की कार्यवाही के आधिकारिक रिकॉर्ड से हटाई गईं। इसके अलावा मंत्री आशीष पटेल द्वारा कांग्रेस विधायक को BJP में शामिल होने का दिया गया प्रस्ताव भी विवाद का केंद्र बना।
महिला आरक्षण विधेयक अब तक लागू क्यों नहीं हुआ?
संसद में पारित महिला आरक्षण विधेयक में एक शर्त है कि यह परिसीमन के बाद लागू होगा, और परिसीमन जनगणना के बाद होगा। चूँकि जनगणना अभी तक पूरी नहीं हुई है, इसलिए विधेयक के अमल में देरी हो रही है — जिसे विपक्ष सरकार की जानबूझकर की गई रणनीति बताता है।
इस सत्र में और कौन-कौन से नेताओं ने भाग लिया?
सत्र में मंत्री असीम अरुण, संजय निषाद, विजय लक्ष्मी गौतम और ओम प्रकाश राजभर सहित सत्ता पक्ष के कई नेताओं ने विपक्ष पर निशाना साधा। विपक्ष की ओर से सपा विधायक रागिनी सोनकर, पल्लवी पटेल और कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा ने सरकार को घेरा।
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