जेपी नड्डा ने किया 10वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन का उद्घाटन, नवाचार और समावेशिता पर मंथन

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जेपी नड्डा ने किया 10वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन का उद्घाटन, नवाचार और समावेशिता पर मंथन

सारांश

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 10वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए भारत की स्वास्थ्य उपलब्धियों और चुनौतियों का लेखा-जोखा पेश किया। हरियाणा ने ₹14,000 करोड़ का स्वास्थ्य बजट और 1,479 NQAS-प्रमाणित संस्थानों के साथ मॉडल राज्य के रूप में खुद को स्थापित किया।

Key Takeaways

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 30 अप्रैल 2025 को 10वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया। भारत ने पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 79% और शिशु मृत्यु दर में 73% की कमी हासिल की है। हरियाणा का स्वास्थ्य बजट 2014 के ₹2,640 करोड़ से बढ़कर ₹14,000 करोड़ हुआ — 32.89% की वृद्धि। हरियाणा में मेडिकल कॉलेज 6 से 17 और MBBS सीटें 700 से 2,710 हुईं। स्वस्थ भारत पोर्टल, जननी पोर्टल, आरबीएसके 2.0 सहित कई नई पहलों का शुभारंभ हुआ। NSO के 80वें दौर के अनुसार सार्वजनिक सुविधाओं में बाह्य रोगी देखभाल पर जेब से व्यय अब शून्य ।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 30 अप्रैल 2025 को नई दिल्ली में "नवाचार एवं समावेशिता: भारत के स्वास्थ्य भविष्य को आकार देने वाली सर्वोत्तम प्रथाएं" विषय पर 10वें राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राज्य की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव की उपस्थिति में आयोजित यह शिखर सम्मेलन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र की सर्वोत्तम प्रथाओं और नवाचारों को साझा करने का प्रमुख राष्ट्रीय मंच है।

शिखर सम्मेलन का उद्देश्य और महत्व

नड्डा ने अपने संबोधन में कहा कि यह शिखर सम्मेलन दर्शाता है कि कैसे जमीनी स्तर पर संचालित व्यावहारिक रणनीतियाँ सामूहिक रूप से एक प्रभावी और उत्तरदायी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को आकार दे सकती हैं। उन्होंने शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए हरियाणा सरकार का आभार व्यक्त किया और स्वास्थ्य नवाचार में राज्य के नेतृत्व की सराहना की।

मंत्री ने इस अवसर पर शुरू की गई पहलों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए कार्य वातावरण को सुगम बनाना, सेवा वितरण को बेहतर करना और स्वास्थ्य परिणामों में सुधार करना है। उन्होंने जोर दिया कि लक्ष्य ऐसी प्रणालियाँ बनाना है जो कुशल, एकीकृत और सेवा प्रदाताओं एवं लाभार्थियों दोनों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील हों।

स्वास्थ्य नीति में बदलाव और प्रमुख उपलब्धियाँ

पिछले एक दशक में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए बदलावों पर विचार करते हुए नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश ने विकसित भारत के दृष्टिकोण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने बताया कि जहाँ 2002 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति मुख्यतः उपचारात्मक देखभाल पर केंद्रित थी, वहीं 2017 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति ने निवारक, संवर्धक, उपचारात्मक और उपशामक पहलुओं को शामिल कर एक क्रांतिकारी बदलाव लाया।

मंत्री ने 185 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की भूमिका पर जोर दिया, जो अब लगभग 15 लाख लोगों के लिए प्राथमिक संपर्क बिंदु के रूप में कार्य करते हैं। इन केंद्रों ने 30 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कैंसर जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों की व्यापक जाँच को मजबूत किया है। गौरतलब है कि 50,000 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों (NQAS) के तहत प्रमाणित किया जा चुका है।

स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार का उल्लेख करते हुए नड्डा ने बताया कि संस्थागत प्रसवों में 79 प्रतिशत से 89 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। वैश्विक अनुमानों के अनुसार भारत ने पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 79 प्रतिशत और शिशु मृत्यु दर में 73 प्रतिशत की कमी हासिल की है। तपेदिक के उपचार कवरेज के संदर्भ में उन्होंने बताया कि यह 92 प्रतिशत तक पहुँच गया है और घटनाओं में वैश्विक औसत से अधिक तेजी से गिरावट आई है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य उपलब्धियाँ और उभरती चुनौतियाँ

नड्डा ने जन स्वास्थ्य की प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख किया, जिनमें 2014 में भारत को पोलियो मुक्त घोषित किया जाना, 2015 में नवजात शिशुओं में टिटनेस का उन्मूलन और ट्रेकोमा का जन स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय न रहना शामिल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत निकट भविष्य में काला-अजार के उन्मूलन की दिशा में भी सफलता प्राप्त करेगा।

उभरती चुनौतियों पर बात करते हुए मंत्री ने गैर-संक्रामक रोगों के बढ़ते बोझ पर चिंता जताई और कहा कि बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग के साथ-साथ अब समय पर फॉलो-अप, उपचार का पालन और रेफरल तंत्र सुनिश्चित करने पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के प्रावधानों के बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) सहित जमीनी अधिकारियों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

हरियाणा की स्वास्थ्य पहलें और उपलब्धियाँ

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा की स्वास्थ्य पहलों का विस्तृत विवरण दिया। उन्होंने केयर अभियान के बारे में बताया, जिसके तहत 188 केंद्रों में मरीजों के परिवारों को घर पर देखभाल में सहायता के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। ई-संजीवनी के माध्यम से आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में प्रतिदिन लगभग 2,000 टेलीकंसल्टेशन आयोजित किए जा रहे हैं।

सैनी ने बताया कि हरियाणा ने अपने स्वास्थ्य बजट में 32.89 प्रतिशत की वृद्धि की है, जो अब लगभग ₹14,000 करोड़ तक पहुँच गया है — जो 2014 के ₹2,640 करोड़ की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी है। मेडिकल कॉलेजों की संख्या 2014 के 6 से बढ़कर 17 हो गई है और MBBS की सीटें 700 से बढ़कर 2,710 हो गई हैं। राज्य के 1,479 स्वास्थ्य संस्थानों को NQAS प्रमाणन प्राप्त हो चुका है। इसके अलावा सभी जिला अस्पतालों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विभाग की स्थापना, 500 एम्बुलेंस का नेटवर्क और 22 जिला अस्पतालों में मुफ्त डायलिसिस सेवाएँ भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

नई पहलों का शुभारंभ और आगे की राह

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत HMIS, जननी और ई-संजीवनी जैसे प्लेटफार्मों पर आभा आईडी के एकीकरण की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला। NSO सर्वेक्षण के 80वें दौर के निष्कर्षों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में बाह्य रोगी देखभाल के लिए जेब से होने वाला औसत व्यय अब शून्य है।

इस अवसर पर कई प्रमुख पहलों का शुभारंभ किया गया, जिनमें NHM के तहत प्रतिरूपणीय नवाचारों पर सर्वोत्तम अभ्यास संकलन, 17वीं सामान्य समीक्षा मिशन (CRM) रिपोर्ट, स्वस्थ भारत पोर्टल, जननी पोर्टल, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल टीमों के लिए एकीकृत प्रशिक्षण मॉड्यूल, आरबीएसके 2.0 और बच्चों एवं किशोरों में मधुमेह पर मार्गदर्शन दस्तावेज शामिल हैं। आगे की राह में सुदृढ़ शासन, बेहतर संचार और अंतिम छोर तक कार्यान्वयन सुनिश्चित करना भारत की समावेशी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के लक्ष्य को प्राप्त करने में निर्णायक होगा।

Point of View

लेकिन असली सवाल यह है कि 185 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और 50,000 NQAS-प्रमाणित केंद्रों के बावजूद गैर-संक्रामक रोगों का बोझ क्यों बढ़ रहा है। नड्डा ने खुद स्वीकार किया कि स्क्रीनिंग के बाद फॉलो-अप और रेफरल तंत्र कमजोर है — यह वह अंतर है जो आँकड़ों में नहीं दिखता, लेकिन जमीनी स्तर पर महसूस होता है। हरियाणा का ₹14,000 करोड़ का बजट प्रभावशाली है, पर क्या यह खर्च सही जगह हो रहा है, इसकी जवाबदेही का तंत्र अभी भी स्पष्ट नहीं है। जब तक NHM के फंड का उपयोग CMO और CHO स्तर पर पारदर्शी रूप से नहीं होगा, तब तक शिखर सम्मेलन की घोषणाएँ केवल कागजी दस्तावेज बनकर रह जाएंगी।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

10वाँ राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
यह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा आयोजित वार्षिक शिखर सम्मेलन है, जो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्वास्थ्य क्षेत्र के नवाचारों और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने का मंच देता है। इसका उद्देश्य पूरे देश में समावेशी, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देना है।
हरियाणा का स्वास्थ्य बजट कितना बढ़ा है?
हरियाणा का स्वास्थ्य बजट 2014 के ₹2,640 करोड़ से बढ़कर लगभग ₹14,000 करोड़ हो गया है, जो 32.89 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इसके साथ राज्य में मेडिकल कॉलेज 6 से बढ़कर 17 और MBBS सीटें 700 से 2,710 हो गई हैं।
इस शिखर सम्मेलन में कौन-सी नई पहलें लॉन्च की गईं?
शिखर सम्मेलन में स्वस्थ भारत पोर्टल, जननी पोर्टल, आरबीएसके 2.0, 17वीं CRM रिपोर्ट, NHM के तहत सर्वोत्तम अभ्यास संकलन और बच्चों व किशोरों में मधुमेह पर मार्गदर्शन दस्तावेज लॉन्च किए गए। ये पहलें डिजिटल स्वास्थ्य एकीकरण और प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने पर केंद्रित हैं।
भारत ने शिशु और बाल मृत्यु दर में कितनी कमी हासिल की है?
वैश्विक अनुमानों के अनुसार भारत ने पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 79 प्रतिशत और शिशु मृत्यु दर में 73 प्रतिशत की कमी हासिल की है। इसके अलावा संस्थागत प्रसव 79 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत तक पहुँच गए हैं।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर क्या भूमिका निभा रहे हैं?
185 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर अब लगभग 15 लाख लोगों के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य संपर्क बिंदु के रूप में कार्य कर रहे हैं। ये केंद्र 30 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारियों की बड़े पैमाने पर जाँच करते हैं।
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