30 जुलाई 2026
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हॉकी टीम की जर्सी नीले से केसरिया: दिलीप तिर्की बोले — तकनीकी वजह, कोई राजनीतिक दबाव नहीं

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हॉकी टीम की जर्सी नीले से केसरिया: दिलीप तिर्की बोले — तकनीकी वजह, कोई राजनीतिक दबाव नहीं

सारांश

भारतीय हॉकी टीम की जर्सी नीले से केसरिया हुई तो राजनीति गरमा गई। हॉकी इंडिया अध्यक्ष दिलीप तिर्की और कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने नीली पिच पर पहचान की मुश्किल को तकनीकी वजह बताया, जबकि विपक्ष ने इसे बहुसंख्यक राजनीति से जोड़ा। रंग बदला — बहस और गहरी हो गई।

मुख्य बातें

हॉकी इंडिया ने भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग नीले से केसरिया कर दिया है।
हॉकी इंडिया अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने कहा — रंग बदलाव तकनीकी वजहों से हुआ, कोई राजनीतिक दबाव नहीं।
कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने बताया कि नीली एस्ट्रोटर्फ पिच पर नीली जर्सी से पहचान में मुश्किल होती थी।
भारतीय हॉकी जर्सी 2013-14 में पीली, फिर हल्की नीली, फिर गहरी नीली रही — यह चौथा बड़ा बदलाव है।
BJP सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने बदलाव का समर्थन किया; चंद्रशेखर आजाद ने रंगों की राजनीति को 'खतरनाक' बताया।

हॉकी इंडिया ने भारतीय पुरुष हॉकी टीम की जर्सी का रंग नीले से केसरिया कर दिया है, जिसके बाद देशभर में राजनीतिक बहस छिड़ गई है। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने 30 जुलाई को स्पष्ट किया कि यह निर्णय पूरी तरह तकनीकी आधार पर लिया गया है और इसके पीछे किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव नहीं है।

रंग बदलाव की तकनीकी वजह

भारतीय हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने इस फैसले पर कहा कि जर्सी बदलना कोई नई बात नहीं है। उन्होंने बताया, 'यह पहली बार नहीं है। 2013-14 में हमारे पास पीली जर्सी थी, इसके बाद हल्के नीले और फिर गहरे नीले रंग में बदलाव हुआ। इस बार हमने भगवा रंग चुना है।' कप्तान ने एक अहम तकनीकी पहलू की ओर ध्यान दिलाया — एस्ट्रोटर्फ पिच नीले रंग की होती है, और नीली जर्सी में खिलाड़ियों की पहचान करना मैदान पर कठिन हो जाता है। हरमनप्रीत ने कहा, 'हमने नीला पहनकर भी पदक जीते हैं। हम नई जर्सी के रंग से खुश हैं।'

सत्तापक्ष की प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने विपक्ष की आलोचना को खारिज करते हुए कहा, 'हर विषय पर सरकार को दोष नहीं देना चाहिए। हॉकी का अपना फेडरेशन है। जर्सी बदल जाने से किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।' उन्होंने आगे कहा कि पहले भी जर्सी का रंग बदला था, तब कोई आपत्ति नहीं थी, इसलिए अब भी नहीं होनी चाहिए। सिग्रीवाल ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर चर्चा को प्राथमिकता देने की अपील की।

विपक्ष की चिंता

आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इस बदलाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार ने यह निर्णय लिया है, तो 'शायद वह बहुसंख्यक समुदाय से जुड़ी चीजों को अपने रंग में लाने की कोशिश कर रही है।' हालाँकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि केसरिया रंग का इतिहास गहरा है — 'केसरिया रंग भगवान बुद्ध के समय से है।' आजाद ने चेतावनी दी कि 'रंगों पर राजनीति खतरनाक है और इससे दिल नहीं बंटने चाहिए।'

जर्सी बदलाव का इतिहास

गौरतलब है कि भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग पहले भी कई बार बदला जा चुका है। 2013-14 में पीली जर्सी से शुरुआत हुई, फिर हल्का नीला और बाद में गहरा नीला रंग अपनाया गया। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब भारतीय हॉकी टीम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रही है।

आगे क्या

नई केसरिया जर्सी में भारतीय टीम के आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उतरने की उम्मीद है। हॉकी इंडिया ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय संस्था के स्तर पर लिया गया है और खेल की बेहतरी को ध्यान में रखते हुए किया गया है। राजनीतिक विवाद के बीच असली सवाल यह है कि नई जर्सी में टीम का प्रदर्शन कैसा रहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह खेल से ज़्यादा प्रतीकों की राजनीति को दर्शाती है। तकनीकी तर्क — नीली पिच पर नीली जर्सी की पहचान की मुश्किल — वास्तविक और सत्यापन-योग्य है, लेकिन विपक्ष का यह सवाल भी उचित है कि यह बदलाव अभी क्यों। असली चूक यह है कि हॉकी इंडिया ने निर्णय से पहले पारदर्शी संवाद नहीं किया — एक स्पष्ट तकनीकी ब्रीफिंग शुरुआत में ही इस विवाद को रोक सकती थी। जब खेल संस्थाएँ बिना संदर्भ के बड़े दृश्य बदलाव करती हैं, तो राजनीतिक व्याख्या की जगह वे खुद बना देती हैं।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हॉकी इंडिया ने जर्सी का रंग नीले से केसरिया क्यों बदला?
हॉकी इंडिया के अनुसार यह बदलाव तकनीकी वजहों से हुआ है। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने बताया कि नीली एस्ट्रोटर्फ पिच पर नीली जर्सी पहनने से मैदान पर खिलाड़ियों की पहचान में मुश्किल आती थी, जो इस बदलाव की मुख्य वजह है।
क्या जर्सी बदलाव पर राजनीतिक दबाव था?
हॉकी इंडिया अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने किसी भी राजनीतिक दबाव से साफ इनकार किया है। हालाँकि विपक्षी नेता चंद्रशेखर आजाद ने इसे बहुसंख्यक राजनीति से जोड़ा है और रंगों की राजनीति को 'खतरनाक' बताया है।
भारतीय हॉकी टीम की जर्सी पहले किन रंगों में रही है?
भारतीय हॉकी टीम की जर्सी 2013-14 में पीली थी, इसके बाद हल्के नीले और फिर गहरे नीले रंग में बदली। अब केसरिया रंग अपनाया गया है — यह चौथा बड़ा बदलाव है।
BJP ने जर्सी बदलाव पर क्या कहा?
BJP सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने बदलाव का समर्थन किया और कहा कि हर मुद्दे पर सरकार को दोष देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि हॉकी का अपना स्वतंत्र फेडरेशन है और खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर ध्यान देना चाहिए।
नई केसरिया जर्सी में भारतीय हॉकी टीम कब खेलेगी?
हॉकी इंडिया ने नई जर्सी की आधिकारिक घोषणा कर दी है और टीम के आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में इसी जर्सी में उतरने की उम्मीद है। सटीक तारीखों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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