हॉकी टीम की जर्सी नीले से केसरिया: दिलीप तिर्की बोले — तकनीकी वजह, कोई राजनीतिक दबाव नहीं
सारांश
मुख्य बातें
हॉकी इंडिया ने भारतीय पुरुष हॉकी टीम की जर्सी का रंग नीले से केसरिया कर दिया है, जिसके बाद देशभर में राजनीतिक बहस छिड़ गई है। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने 30 जुलाई को स्पष्ट किया कि यह निर्णय पूरी तरह तकनीकी आधार पर लिया गया है और इसके पीछे किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव नहीं है।
रंग बदलाव की तकनीकी वजह
भारतीय हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने इस फैसले पर कहा कि जर्सी बदलना कोई नई बात नहीं है। उन्होंने बताया, 'यह पहली बार नहीं है। 2013-14 में हमारे पास पीली जर्सी थी, इसके बाद हल्के नीले और फिर गहरे नीले रंग में बदलाव हुआ। इस बार हमने भगवा रंग चुना है।' कप्तान ने एक अहम तकनीकी पहलू की ओर ध्यान दिलाया — एस्ट्रोटर्फ पिच नीले रंग की होती है, और नीली जर्सी में खिलाड़ियों की पहचान करना मैदान पर कठिन हो जाता है। हरमनप्रीत ने कहा, 'हमने नीला पहनकर भी पदक जीते हैं। हम नई जर्सी के रंग से खुश हैं।'
सत्तापक्ष की प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने विपक्ष की आलोचना को खारिज करते हुए कहा, 'हर विषय पर सरकार को दोष नहीं देना चाहिए। हॉकी का अपना फेडरेशन है। जर्सी बदल जाने से किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।' उन्होंने आगे कहा कि पहले भी जर्सी का रंग बदला था, तब कोई आपत्ति नहीं थी, इसलिए अब भी नहीं होनी चाहिए। सिग्रीवाल ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर चर्चा को प्राथमिकता देने की अपील की।
विपक्ष की चिंता
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इस बदलाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार ने यह निर्णय लिया है, तो 'शायद वह बहुसंख्यक समुदाय से जुड़ी चीजों को अपने रंग में लाने की कोशिश कर रही है।' हालाँकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि केसरिया रंग का इतिहास गहरा है — 'केसरिया रंग भगवान बुद्ध के समय से है।' आजाद ने चेतावनी दी कि 'रंगों पर राजनीति खतरनाक है और इससे दिल नहीं बंटने चाहिए।'
जर्सी बदलाव का इतिहास
गौरतलब है कि भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग पहले भी कई बार बदला जा चुका है। 2013-14 में पीली जर्सी से शुरुआत हुई, फिर हल्का नीला और बाद में गहरा नीला रंग अपनाया गया। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब भारतीय हॉकी टीम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रही है।
आगे क्या
नई केसरिया जर्सी में भारतीय टीम के आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उतरने की उम्मीद है। हॉकी इंडिया ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय संस्था के स्तर पर लिया गया है और खेल की बेहतरी को ध्यान में रखते हुए किया गया है। राजनीतिक विवाद के बीच असली सवाल यह है कि नई जर्सी में टीम का प्रदर्शन कैसा रहता है।