30 जुलाई 2026
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हॉकी जर्सी विवाद: भगवा रंग पर BJP ने किया बचाव, विपक्ष बोला — खेल में राजनीति बंद करो

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हॉकी जर्सी विवाद: भगवा रंग पर BJP ने किया बचाव, विपक्ष बोला — खेल में राजनीति बंद करो

सारांश

भारतीय हॉकी की नीली जर्सी की जगह भगवा रंग की खबर ने संसद से सड़क तक बहस छेड़ दी। BJP ने इसे सरकार का अधिकार बताया, तो SP और TMC ने इसे प्रतीकों की राजनीति करार दिया। पूर्व कप्तान विरेन रस्किन्हा की चिंता के बीच हॉकी इंडिया की चुप्पी सवाल और गहरे कर रही है।

मुख्य बातें

भारतीय हॉकी टीम की पारंपरिक नीली जर्सी की जगह भगवा (केसरिया) रंग अपनाने की खबर से राजनीतिक विवाद छिड़ा।
पूर्व कप्तान विरेन रस्किन्हा ने इस बदलाव पर सार्वजनिक चिंता जताई।
BJP सांसद जगन्नाथ सरकार और UP मंत्री संजय निषाद ने केसरिया रंग का समर्थन किया, इसे सांस्कृतिक पहचान से जोड़ा।
SP सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने 'ब्लीड ब्लू' की विरासत का हवाला देते हुए बदलाव को अनावश्यक बताया।
TMC सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने कहा कि सफलता रंग से नहीं, प्रदर्शन से तय होती है।
हॉकी इंडिया की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।

भारतीय हॉकी टीम की पारंपरिक नीली जर्सी की जगह भगवा (केसरिया) रंग की जर्सी अपनाए जाने की खबर ने 30 जुलाई को राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छेड़ दी। जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने इसे सरकार का स्वाभाविक अधिकार बताया, वहीं समाजवादी पार्टी (SP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सहित विपक्षी दलों ने इसे प्रतीकों की राजनीति करार दिया। भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान विरेन रस्किन्हा ने भी इस बदलाव पर सार्वजनिक रूप से चिंता व्यक्त की है।

भाजपा का रुख: बदलाव सामान्य, आपत्ति छोटी मानसिकता

भाजपा सांसद जगन्नाथ सरकार ने इस विवाद को खारिज करते हुए कहा कि सत्ता में आई सरकार को रंग बदलने का पूर्ण अधिकार है। उन्होंने कहा, 'क्या हुआ अगर रंग बदल दिया गया? सत्ता में आने के बाद वे जो चाहें, कर सकते हैं।' केसरिया रंग को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने इसे 'छोटी मानसिकता का परिचायक' बताया और पूछा कि भगवा जर्सी से किसी को क्या आपत्ति हो सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संसद में इस विषय पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने पूर्व-निर्धारित व्यवस्था के तहत जवाब दिया।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने भी केसरिया रंग का समर्थन करते हुए कहा कि भारत क्रांतिकारियों की धरती है और यह रंग देश की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। उनके अनुसार, इस रंग पर किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

विपक्ष की आपत्ति: 'ब्लीड ब्लू' की विरासत दाँव पर

समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने कहा कि दशकों से नीला रंग भारतीय क्रिकेट और हॉकी दोनों की पहचान बन चुका है। उन्होंने 'ब्लीड ब्लू' के नारे का हवाला देते हुए कहा कि नीला रंग एक तटस्थ और प्रेरणादायक प्रतीक रहा है तथा इस तरह का बदलाव अनावश्यक विवाद को जन्म देता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि खेल के प्रतीकों को राजनीतिक नज़रिए से न देखा जाए।

SP नेता उदयवीर सिंह ने कहा कि जिस जर्सी को पहनकर भारतीय टीम वर्षों तक खेलती रही है, उससे खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का भावनात्मक जुड़ाव स्वाभाविक है। हालाँकि उन्होंने यह भी माना कि बदलाव के पीछे की वास्तविक वजह हॉकी इंडिया ही स्पष्ट कर सकता है।

SP प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने आरोप लगाया कि भाजपा अपने शासन के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए प्रतीकों और पहचान से जुड़े विवाद खड़े करती है। उन्होंने कहा कि यह केवल खेल का मामला नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है।

पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद का संतुलित नज़रिया

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने इस विवाद में एक अलग दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि जर्सी का रंग चाहे नारंगी हो, हरा हो या कोई और — असली महत्व मैदान पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन का होता है। उन्होंने याद दिलाया कि क्रिकेट में खिलाड़ी लंबे समय तक सफेद कपड़ों में खेलते रहे हैं और सफलता कभी रंग से नहीं, बल्कि खेल की गुणवत्ता से तय होती है।

विवाद की पृष्ठभूमि और आगे की राह

गौरतलब है कि भारतीय हॉकी टीम की नीली जर्सी दशकों से उसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान का हिस्सा रही है। यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब भारतीय हॉकी टीम अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान मज़बूत कर रही है। हॉकी इंडिया की ओर से इस बदलाव पर अभी तक कोई आधिकारिक और विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं आया है, जिससे अटकलों का दौर जारी है। आने वाले दिनों में हॉकी इंडिया का रुख इस बहस की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर गंभीर सवाल उठाता है। हॉकी इंडिया की चुप्पी और सरकार की मुखरता के बीच का अंतर यह संकेत देता है कि फैसला कहाँ से आया। असली चिंता यह है कि जब खेल प्रतीक राजनीतिक पहचान के वाहक बन जाते हैं, तो खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों की भावनाएँ पृष्ठभूमि में चली जाती हैं।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग क्यों बदला जा रहा है?
रिपोर्टों के अनुसार भारतीय हॉकी टीम की पारंपरिक नीली जर्सी की जगह भगवा (केसरिया) रंग की जर्सी लाने की योजना है। हालाँकि हॉकी इंडिया ने अभी तक इस बदलाव के कारणों पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
BJP ने हॉकी जर्सी विवाद पर क्या कहा?
BJP सांसद जगन्नाथ सरकार ने कहा कि सरकार को रंग बदलने का पूर्ण अधिकार है और इस पर आपत्ति जताना 'छोटी मानसिकता' है। UP मंत्री संजय निषाद ने केसरिया रंग को देश की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बताया।
विपक्ष ने हॉकी जर्सी के रंग बदलाव का विरोध क्यों किया?
समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने कहा कि नीला रंग दशकों से भारतीय खेल टीमों की पहचान रहा है और 'ब्लीड ब्लू' जैसे नारे इससे जुड़े हैं। SP प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने आरोप लगाया कि BJP प्रतीकों के ज़रिए असली मुद्दों से ध्यान भटका रही है।
पूर्व हॉकी कप्तान विरेन रस्किन्हा ने इस बदलाव पर क्या कहा?
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान विरेन रस्किन्हा ने जर्सी के रंग बदलाव पर सार्वजनिक रूप से चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस कदम को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है, हालाँकि विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।
हॉकी जर्सी विवाद में TMC का क्या रुख रहा?
तृणमूल कांग्रेस के सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने कहा कि जर्सी का रंग चाहे जो हो, सफलता मैदान पर प्रदर्शन से तय होती है। उन्होंने क्रिकेट में सफेद कपड़ों की परंपरा का हवाला देते हुए रंग की राजनीति से परे जाने की बात कही।
राष्ट्र प्रेस
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