हॉकी जर्सी विवाद: भगवा रंग पर BJP ने किया बचाव, विपक्ष बोला — खेल में राजनीति बंद करो
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय हॉकी टीम की पारंपरिक नीली जर्सी की जगह भगवा (केसरिया) रंग की जर्सी अपनाए जाने की खबर ने 30 जुलाई को राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छेड़ दी। जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने इसे सरकार का स्वाभाविक अधिकार बताया, वहीं समाजवादी पार्टी (SP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सहित विपक्षी दलों ने इसे प्रतीकों की राजनीति करार दिया। भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान विरेन रस्किन्हा ने भी इस बदलाव पर सार्वजनिक रूप से चिंता व्यक्त की है।
भाजपा का रुख: बदलाव सामान्य, आपत्ति छोटी मानसिकता
भाजपा सांसद जगन्नाथ सरकार ने इस विवाद को खारिज करते हुए कहा कि सत्ता में आई सरकार को रंग बदलने का पूर्ण अधिकार है। उन्होंने कहा, 'क्या हुआ अगर रंग बदल दिया गया? सत्ता में आने के बाद वे जो चाहें, कर सकते हैं।' केसरिया रंग को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने इसे 'छोटी मानसिकता का परिचायक' बताया और पूछा कि भगवा जर्सी से किसी को क्या आपत्ति हो सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संसद में इस विषय पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने पूर्व-निर्धारित व्यवस्था के तहत जवाब दिया।
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने भी केसरिया रंग का समर्थन करते हुए कहा कि भारत क्रांतिकारियों की धरती है और यह रंग देश की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। उनके अनुसार, इस रंग पर किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
विपक्ष की आपत्ति: 'ब्लीड ब्लू' की विरासत दाँव पर
समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने कहा कि दशकों से नीला रंग भारतीय क्रिकेट और हॉकी दोनों की पहचान बन चुका है। उन्होंने 'ब्लीड ब्लू' के नारे का हवाला देते हुए कहा कि नीला रंग एक तटस्थ और प्रेरणादायक प्रतीक रहा है तथा इस तरह का बदलाव अनावश्यक विवाद को जन्म देता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि खेल के प्रतीकों को राजनीतिक नज़रिए से न देखा जाए।
SP नेता उदयवीर सिंह ने कहा कि जिस जर्सी को पहनकर भारतीय टीम वर्षों तक खेलती रही है, उससे खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों का भावनात्मक जुड़ाव स्वाभाविक है। हालाँकि उन्होंने यह भी माना कि बदलाव के पीछे की वास्तविक वजह हॉकी इंडिया ही स्पष्ट कर सकता है।
SP प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने आरोप लगाया कि भाजपा अपने शासन के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए प्रतीकों और पहचान से जुड़े विवाद खड़े करती है। उन्होंने कहा कि यह केवल खेल का मामला नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है।
पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद का संतुलित नज़रिया
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने इस विवाद में एक अलग दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि जर्सी का रंग चाहे नारंगी हो, हरा हो या कोई और — असली महत्व मैदान पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन का होता है। उन्होंने याद दिलाया कि क्रिकेट में खिलाड़ी लंबे समय तक सफेद कपड़ों में खेलते रहे हैं और सफलता कभी रंग से नहीं, बल्कि खेल की गुणवत्ता से तय होती है।
विवाद की पृष्ठभूमि और आगे की राह
गौरतलब है कि भारतीय हॉकी टीम की नीली जर्सी दशकों से उसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान का हिस्सा रही है। यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब भारतीय हॉकी टीम अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान मज़बूत कर रही है। हॉकी इंडिया की ओर से इस बदलाव पर अभी तक कोई आधिकारिक और विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं आया है, जिससे अटकलों का दौर जारी है। आने वाले दिनों में हॉकी इंडिया का रुख इस बहस की दिशा तय करेगा।