31 जुलाई 2026
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प्रियंका गांधी के बयानों पर देशव्यापी विवाद: भगवा जर्सी और प्रो. कामाकोटी पर 215 से अधिक शिक्षाविद एकजुट

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प्रियंका गांधी के बयानों पर देशव्यापी विवाद: भगवा जर्सी और प्रो. कामाकोटी पर 215 से अधिक शिक्षाविद एकजुट

सारांश

प्रियंका गांधी के दो बयानों ने एक साथ दो मोर्चे खोल दिए — भगवा जर्सी पर राजनीतिक संग्राम और प्रो. कामाकोटी पर 215 से अधिक शिक्षाविदों का एकजुट प्रतिरोध। यह विवाद दर्शाता है कि खेल और शिक्षा जगत अब राजनीतिक बहस के नए अखाड़े बन रहे हैं।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के भगवा हॉकी जर्सी और प्रो.
कामाकोटी पर बयानों ने 31 जुलाई को देशव्यापी विवाद को जन्म दिया।
215 से अधिक शिक्षाविदों ने जम्मू के क्लस्टर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो.
चंद्रशेखर के खुले पत्र पर हस्ताक्षर कर प्रो.
कामाकोटी का समर्थन किया।
साध्वी प्रज्ञा भारती और VHP के विनोद बंसल ने भगवा रंग को भारतीय संस्कृति और तिरंगे का प्रतीक बताते हुए कांग्रेस की आलोचना की।
समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन ने जर्सी परिवर्तन को RSS की विचारधारा थोपने का हिस्सा बताया।
आईआईएम कलकत्ता के निदेशक आलोक राय ने प्रो.
कामाकोटी को कंप्यूटर विज्ञान की प्रतिष्ठित हस्ती बताते हुए उनका समर्थन किया।
कामाकोटी के नेतृत्व में आईआईटी मद्रास ने 'शक्ति' माइक्रोप्रोसेसर जैसी परियोजना से भारत को वैश्विक पहचान दिलाई है।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा भारतीय हॉकी टीम की भगवा जर्सी और आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटी पर की गई टिप्पणियों ने 31 जुलाई को देशभर में राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कर दी हैं। नेताओं, कुलपतियों और शिक्षाविदों के एक वर्ग ने उनके बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई है, जबकि समाजवादी पार्टी ने जर्सी के रंग परिवर्तन को सरकार द्वारा वैचारिक एजेंडा थोपने की कोशिश करार दिया है।

भगवा जर्सी विवाद: राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद साध्वी प्रज्ञा भारती ने प्रियंका गांधी के भगवा रंग पर उठाए गए सवालों का तीखा जवाब देते हुए कहा कि हॉकी, फुटबॉल, बास्केटबॉल या क्रिकेट — किसी भी टीम की जर्सी का रंग उनकी अपनी पसंद का विषय है। उन्होंने कहा, 'भगवा त्याग, तपस्या और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है।' साध्वी प्रज्ञा ने यह भी सवाल उठाया कि चुनाव के समय कांग्रेस नेता मंदिरों में जाते हैं और भगवा शॉल ओढ़ते हैं, ऐसे में भगवा रंग पर आपत्ति 'हिपोक्रेसी' है।

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि खेलों का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, 'भगवा भारत की संस्कृति, इतिहास, स्वाभिमान और राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक है — तिरंगे का सर्वोच्च रंग भी भगवा ही है।' उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस बार-बार भगवा रंग को विवादों में घसीटने का प्रयास करती है।

दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन ने भिन्न दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि देशभर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा, पहनावा और संस्कृति को थोपने की कोशिश हो रही है और हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदलना उसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

प्रो. कामाकोटी पर टिप्पणी: शिक्षाविद मैदान में

जम्मू स्थित क्लस्टर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर के. एस. चंद्रशेखर ने इस मुद्दे पर एक खुला पत्र जारी किया है, जिसे अब तक 215 से अधिक शिक्षाविदों का समर्थन मिल चुका है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आलोचना का अधिकार है, लेकिन किसी व्यक्ति की योग्यता और योगदान पर टिप्पणी करने से पहले उसके कार्यों और उपलब्धियों को समझना आवश्यक है। उनके अनुसार, 'प्रो. कामाकोटी का भारत के लिए योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है और बिना तथ्यों के उनकी प्रतिष्ठा पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए।'

मध्य प्रदेश के रीवा स्थित महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रोफेसर शुभा तिवारी ने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार किसी भी विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों सुने जाने चाहिए। उन्होंने प्रो. कामाकोटी के चार दशकों के योगदान और 'शक्ति' माइक्रोप्रोसेसर जैसे प्रोजेक्ट के माध्यम से भारत को मिली वैश्विक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे वैज्ञानिक का उपहास उचित नहीं है। उन्होंने खुले पत्र का समर्थन किया और संसद में गरिमापूर्ण भाषा के प्रयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

गुजरात के सूरत स्थित वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय (VNSGU) के कुलपति डॉ. किशोरसिंह एन. चावड़ा ने कहा कि जब भी किसी वैज्ञानिक या पद्म पुरस्कार से सम्मानित व्यक्ति पर राजनीतिक टिप्पणी की जाएगी, देशभर का कुलपति समुदाय उसका जवाब देगा। उन्होंने वैज्ञानिकों को देश की अमूल्य संपत्ति बताया और कहा कि शोध पर बहस तथ्यों और तर्कों के आधार पर होनी चाहिए।

अकादमिक और राजनीतिक संतुलन की माँग

आईआईएम कलकत्ता के निदेशक आलोक राय ने प्रो. कामाकोटी का समर्थन करते हुए उन्हें भारत में कंप्यूटर विज्ञान की प्रतिष्ठित हस्ती बताया। उन्होंने कहा कि आईआईटी मद्रास ने उनके नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारतीय परंपरा में गाय से जुड़े उत्पादों का दीर्घकालिक उपयोग रहा है और गोमूत्र के औषधीय गुणों पर त्वचा, प्रतिरोधक क्षमता, पाचन और वजन नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में विभिन्न स्तरों पर शोध उपलब्ध हैं।

लखनऊ में समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि शिक्षाविदों और अकादमिक जगत को राजनीतिक विवादों से दूर रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, विपक्ष को नीतिगत मुद्दों पर सरकार को घेरना चाहिए, न कि शिक्षाविदों और कुलपतियों को निशाना बनाना चाहिए।

उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने प्रियंका गांधी के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि यदि किसी वैज्ञानिक को 'गोमूत्र विशेषज्ञ' कहा जाएगा, तो राजनीतिक स्तर पर भी वैसी ही प्रतिक्रियाएं आएंगी, लेकिन नेताओं को परस्पर ऐसी भाषा के प्रयोग से बचना चाहिए।

आगे क्या

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब संसद का सत्र चल रहा है और विपक्ष-सरकार के बीच तनाव पहले से ऊँचा है। गौरतलब है कि प्रो. कामाकोटी के समर्थन में जारी खुले पत्र पर हस्ताक्षरकर्ताओं की संख्या बढ़ती जा रही है, जो दर्शाता है कि अकादमिक समुदाय इस मुद्दे पर एकजुट हो रहा है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस विवाद पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गहराई में यह उस बड़े टकराव की अभिव्यक्ति है जिसमें खेल, विज्ञान और शिक्षा जैसे क्षेत्र तेज़ी से राजनीतिक युद्धभूमि बनते जा रहे हैं। 215 शिक्षाविदों का एकजुट होना असामान्य है और यह संकेत देता है कि अकादमिक समुदाय अपनी स्वायत्तता को लेकर सतर्क हो रहा है। दूसरी ओर, भगवा रंग पर बहस बार-बार उठती है और हर बार दोनों पक्षों को ध्रुवीकरण का राजनीतिक लाभ मिलता है — यह चक्र टूटता नहीं दिखता। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है, वह यह है कि प्रो. कामाकोटी पर की गई टिप्पणी की वैज्ञानिक वैधता या अवैधता की बजाय बहस व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और भाषा की गरिमा पर केंद्रित हो गई है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियंका गांधी ने भगवा हॉकी जर्सी पर क्या कहा था?
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भारतीय हॉकी टीम की भगवा जर्सी पर सवाल उठाए थे, जिसे BJP और VHP ने भगवा रंग और भारतीय संस्कृति पर हमला करार दिया। समाजवादी पार्टी ने इसे सरकार द्वारा RSS की विचारधारा थोपने की कोशिश से जोड़ा।
प्रो. वी. कामाकोटी कौन हैं और उन पर विवाद क्यों है?
प्रोफेसर वी. कामाकोटी आईआईटी मद्रास के निदेशक और कंप्यूटर विज्ञान के著名 विशेषज्ञ हैं, जिनके नेतृत्व में 'शक्ति' माइक्रोप्रोसेसर जैसी परियोजना विकसित हुई। प्रियंका गांधी की उन पर की गई टिप्पणी के बाद 215 से अधिक शिक्षाविदों ने उनके समर्थन में खुला पत्र जारी किया।
215 शिक्षाविदों का खुला पत्र किसने जारी किया और उसमें क्या कहा गया?
जम्मू स्थित क्लस्टर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर के. एस. चंद्रशेखर ने यह खुला पत्र जारी किया, जिसे 215 से अधिक शिक्षाविदों का समर्थन मिला। पत्र में कहा गया कि प्रो. कामाकोटी की प्रतिष्ठा पर बिना तथ्यों के सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए और सार्वजनिक जीवन में भाषा की गरिमा बनाए रखना आवश्यक है।
समाजवादी पार्टी ने इस विवाद पर क्या रुख अपनाया?
समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन ने हॉकी जर्सी का रंग बदलने को RSS की विचारधारा थोपने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया। वहीं, SP विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि शिक्षाविदों को राजनीतिक विवादों से दूर रखा जाना चाहिए।
इस विवाद का अकादमिक और वैज्ञानिक समुदाय पर क्या असर पड़ सकता है?
VNSGU के कुलपति डॉ. किशोरसिंह चावड़ा के अनुसार, पद्म पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञानिकों पर राजनीतिक टिप्पणी से वैज्ञानिक समुदाय का मनोबल प्रभावित होता है। आईआईएम कलकत्ता के निदेशक आलोक राय ने भी चेताया कि शोध पर बहस तथ्यों और तर्कों के आधार पर होनी चाहिए, न कि व्यक्तिगत टिप्पणियों के ज़रिए।
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