भारतीय हॉकी जर्सी नीले से केसरिया: विपक्ष ने बताया 'भगवाकरण', समर्थकों ने सराहा
सारांश
मुख्य बातें
हॉकी इंडिया ने भारतीय हॉकी टीम की ऐतिहासिक नीली जर्सी को केसरिया रंग में बदलने का फैसला किया है, जिसके बाद नई दिल्ली में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। 30 जुलाई को सामने आए इस निर्णय पर जहाँ सत्तापक्ष ने स्वागत किया, वहीं विपक्षी दलों ने इसे खेलों के 'भगवाकरण' की संज्ञा देते हुए कड़ी आपत्ति जताई।
विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने इस बदलाव पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'आप अभी सत्ता में हैं, आप चाहें तो रंग बदल सकते हैं। आगे बढ़िए और इसे अगले दो या तीन साल तक करते रहिए। उसके बाद, हमारे देश का तिरंगा असली रंग ही रहेगा।' उनके इस बयान को विपक्षी खेमे में व्यापक समर्थन मिला।
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने कहा, 'सरकार की छोटी सोच साफ दिख रही है। अगर खेलों का भी भगवाकरण होने जा रहा है, तो यह सच में हैरानी की बात है।' उन्होंने इसे खेल भावना के विरुद्ध बताया।
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह ने पूर्व हॉकी कप्तान वीरेन रस्किन्हा की नीली जर्सी को केसरिया से बदले जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'ये लोग मानसिक रूप से दिवालिया हो चुके हैं। आगे, वे पेड़ों को भी हरे रंग की जगह नारंगी रंग से रंग देंगे।'
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के मुखिया और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा, 'अगर सरकार ने यह फैसला लिया है, तो शायद वह मेजोरिटी से जुड़ी चीजों को अपने रंग में लाने की कोशिश कर रही है। केसरिया रंग भगवान बुद्ध के समय से है। रंगों पर राजनीति से दिल नहीं बंटने चाहिए। इस तरह की रंगों की राजनीति खतरनाक है।'
पूर्व खिलाड़ियों की राय
पूर्व हॉकी खिलाड़ी जलालुद्दीन ने इस फैसले पर गहरी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'कोई भी खिलाड़ी यह नहीं कहेगा कि यह सही फैसला है। हर खिलाड़ी आपको बताएगा कि नीली जर्सी टीम, खिलाड़ियों और खुद भारतीय हॉकी की पहचान थी। इसने ओलंपिक, वर्ल्ड कप और दूसरे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया।'
जलालुद्दीन ने आगे कहा, 'अगर आप भारत का इतिहास देखें, तो किसी भी देश ने भारत जितने ओलंपिक मेडल नहीं जीते हैं। हमने वर्ल्ड कप भी जीता है, और आज भी भारतीय टीम अच्छा परफॉर्म करती है और दुनिया की टॉप टीमों में शामिल है। एक टीम की जर्सी उसकी पहचान बन जाती है। खिलाड़ी के तौर पर, हम हमेशा भारत की नीली जर्सी पहनने का इंतजार करते थे।'
समर्थन में आवाज़ें
स्वामी गोपालाचार्य ने इस बदलाव का स्वागत करते हुए कहा, 'भारतीय हॉकी टीम की भगवा जर्सी भारतीयता की पहचान का प्रतीक है।' गौरतलब है कि केसरिया रंग को लेकर देश में सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाएँ गहरी हैं, और यह विवाद उसी संवेदनशील बिंदु को छूता है।
क्या होगा आगे
यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब भारतीय हॉकी टीम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मज़बूत प्रदर्शन कर रही है। आलोचकों का कहना है कि जर्सी की पहचान खिलाड़ियों की मनोवैज्ञानिक एकता से जुड़ी होती है, और इस तरह के बदलाव खेल की राजनीति से परे नहीं जाते। हॉकी इंडिया की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।