14 सितंबर 2026
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ब्रिक्स समिट 2026: पहलगाम हमले की निंदा पर भाजपा का गर्व, मोदी के नेतृत्व में भारत का बढ़ा कद

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ब्रिक्स समिट 2026: पहलगाम हमले की निंदा पर भाजपा का गर्व, मोदी के नेतृत्व में भारत का बढ़ा कद

सारांश

ब्रिक्स समिट 2026 में भारत ने एक ऐतिहासिक कूटनीतिक उपलब्धि हासिल की — पहली बार चीन, रूस और ईरान समेत सदस्य देश पहलगाम आतंकी हमले की निंदा के लिए एक मंच पर आए। भाजपा ने इसे मोदी की वैश्विक साख का प्रमाण बताया, जबकि घोषणा-पत्र को ऑल इंडिया मुस्लिम जमात ने भी सराहा।

मुख्य बातें

ब्रिक्स समिट 2026 का आयोजन 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुआ, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की।
पहली बार चीन, रूस, भारत और ईरान सहित ब्रिक्स देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की एकजुट होकर निंदा की और घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए।
भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारत के साथ पहले अनिच्छुक रहे छोटे देश भी अब खड़े हैं।
भाजपा नेता रविंदर रैना ने पहलगाम निंदा को भारतीय कूटनीति की ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने भी ब्रिक्स घोषणा-पत्र का स्वागत किया।
BSP में आकाश आनंद को पार्टी से हटाए जाने पर बरेलवी ने उन्हें चंद्रशेखर के साथ दलित नेतृत्व की सलाह दी।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स समिट 2026 को लेकर देशभर में व्यापक प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि इस समिट ने वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को और मज़बूत किया है। इस सम्मेलन की एक अहम उपलब्धि यह रही कि चीन, रूस, ईरान सहित ब्रिक्स के सदस्य देशों ने पहली बार एकजुट होकर पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की और आतंकवाद उन्मूलन का संकल्प लिया।

मुख्य घटनाक्रम

भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने समिट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का कद और लोकप्रियता बढ़ी है। यहाँ तक कि वे छोटे देश भी, जो भारत में निवेश नहीं करना चाहते थे और जिन्होंने हमारे बिजनेस समुदाय, किसानों या ह्यूमन रिसोर्स के लिए अपने देश के दरवाज़े नहीं खोले थे, आज भारत के साथ खड़े हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बदलते भारत को नए नज़रिए से देखना चाहिए।

सिरसा से पब्लिक एंटरप्राइजेज ब्यूरो के चेयरमैन मोहन लाल बडोली ने कहा, 'यह 140 करोड़ भारतीयों के लिए गर्व और सम्मान का क्षण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत मंडपम में भारत द्वारा आयोजित इस समिट की अध्यक्षता कर रहे हैं। वे 140 करोड़ लोगों की ओर से यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं।'

पहलगाम हमले की निंदा: ऐतिहासिक एकजुटता

भाजपा नेता रविंदर रैना ने पहलगाम आतंकी हमले की ब्रिक्स नेताओं द्वारा निंदा किए जाने को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा, 'पहली बार चीन, रूस, भारत और ईरान जैसे देश पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा करने के लिए एक मंच पर आए हैं और उन्होंने संकल्प लिया है कि पूरी दुनिया से आतंकवाद को खत्म किया जाना चाहिए।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सीमा पार आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।

गौरतलब है कि ब्रिक्स के सदस्य देशों में भू-राजनीतिक मतभेदों के बावजूद आतंकवाद के मुद्दे पर इस तरह की एकराय कम देखने को मिलती है। इस दृष्टि से यह घोषणा-पत्र भारतीय कूटनीति की एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है।

ब्रिक्स घोषणा-पत्र पर व्यापक स्वागत

बरेली से ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने भी ब्रिक्स घोषणा-पत्र का स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी किया गया घोषणा-पत्र पूरी दुनिया के लिए बहुत अहम है। ब्रिक्स सदस्य देशों के सभी प्रमुखों ने आतंकवाद की कड़ी निंदा की और पहलगाम हमले से जुड़े घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए।'

बरेलवी ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) के आंतरिक घटनाक्रम पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि BSP अध्यक्ष मायावती द्वारा अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से हटाया जाना पार्टी का आंतरिक मामला है। हालाँकि उन्होंने आकाश आनंद को सलाह दी कि वे आज़ाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर के साथ मिलकर दलित समुदाय का नेतृत्व करें और समाज की एकता को मज़बूत करने की दिशा में काम करें।

विपक्ष पर निशाना

खटाना ने राहुल गांधी के बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें अपना पुराना नज़रिया बदलना चाहिए और बदलते भारत को नई दृष्टि से देखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इसमें राहुल गांधी की कोई व्यक्तिगत गलती नहीं है, लेकिन उनकी पार्टी को उन्हें समय के अनुसार अपडेट करना चाहिए।

क्या होगा आगे

ब्रिक्स घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर के बाद अब यह देखना होगा कि आतंकवाद-विरोधी संकल्प को व्यावहारिक कूटनीतिक और आर्थिक कदमों में कैसे बदला जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहलगाम हमले पर बहुपक्षीय निंदा भारत के लिए एक मज़बूत राजनयिक पूंजी साबित हो सकती है, बशर्ते इसे द्विपक्षीय वार्ताओं में प्रभावी ढंग से भुनाया जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह देखना ज़रूरी है कि घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर और ज़मीनी कार्रवाई के बीच की खाई कितनी बड़ी है। चीन और रूस, जो परंपरागत रूप से पाकिस्तान के मुद्दे पर भारत की स्थिति से असहमत रहे हैं, उनकी इस निंदा का वास्तविक कूटनीतिक मूल्य तब सिद्ध होगा जब यह द्विपक्षीय रिश्तों में ठोस बदलाव लाए। घरेलू राजनीतिक प्रतिक्रियाओं में भाजपा की सराहना स्वाभाविक है, लेकिन विपक्ष का मूल्यांकन और स्वतंत्र कूटनीतिक विश्लेषण अभी सामने आना बाकी है। बहुपक्षीय घोषणाओं का असल परीक्षण उनके क्रियान्वयन से होता है, सिर्फ हस्ताक्षरों से नहीं।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स समिट 2026 कहाँ और कब हुआ?
ब्रिक्स समिट 2026 का आयोजन 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुआ। इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की।
पहलगाम आतंकी हमले पर ब्रिक्स देशों की क्या प्रतिक्रिया रही?
ब्रिक्स के सदस्य देशों — जिनमें चीन, रूस, भारत और ईरान शामिल हैं — ने पहली बार एक मंच पर आकर पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की और घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए। सभी देशों ने विश्व से आतंकवाद उन्मूलन का संकल्प लिया।
भाजपा ने ब्रिक्स समिट पर क्या कहा?
भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने कहा कि मोदी के नेतृत्व में छोटे देश भी जो पहले भारत के साथ नहीं आते थे, अब भारत के साथ खड़े हैं। भाजपा नेता रविंदर रैना ने पहलगाम निंदा को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
ब्रिक्स घोषणा-पत्र में क्या अहम बातें हैं?
ब्रिक्स घोषणा-पत्र में सदस्य देशों के प्रमुखों ने आतंकवाद की निंदा की और पहलगाम हमले से जुड़े बिंदुओं पर हस्ताक्षर किए। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी के अनुसार यह घोषणा-पत्र पूरी दुनिया के लिए अहम है।
आकाश आनंद और BSP के विवाद पर क्या कहा गया?
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने इसे BSP का आंतरिक मामला बताया। उन्होंने आकाश आनंद को सलाह दी कि वे आज़ाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर के साथ मिलकर दलित समुदाय की एकता के लिए काम करें।
राष्ट्र प्रेस
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