ब्रिक्स समिट में पहलगाम हमले की निंदा: भाजपा बोली — मोदी की कूटनीति की बड़ी जीत, पाकिस्तान को झटका
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 13 सितंबर 2026 — ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा और आतंकवाद के विरुद्ध जीरो-टॉलरेंस नीति पर बनी बहुपक्षीय सहमति को भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक कूटनीति की निर्णायक जीत करार दिया है। दिल्ली घोषणापत्र में आतंकवाद-विरोधी प्रावधाम को लेकर बनी आम राय को नेताओं ने पाकिस्तान के लिए स्पष्ट कूटनीतिक झटका बताया।
भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया
पटना में भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने इसे ब्रिक्स के इतिहास में एक उल्लेखनीय मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा, 'यह ब्रिक्स समिट के लिए एक ऐतिहासिक सफलता है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देता हूं। भारत की अध्यक्षता में चीन, रूस, ईरान, यूएई, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील जैसे देश एक वैकल्पिक और प्रभावी अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक साथ आए हैं।' प्रसाद ने यह भी रेखांकित किया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ब्रिक्स देशों की संयुक्त जीडीपी के यूरोप और अमेरिका से अधिक होने की बात कही, जो इस गुट के बढ़ते वैश्विक वज़न को दर्शाता है।
भाजपा सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने कहा कि भारत में सफलतापूर्वक आयोजित ब्रिक्स समिट ने दुनिया को एक मज़बूत और स्पष्ट संदेश दिया है। उनके अनुसार, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट में आम सहमति बनाई, खासकर विकास और दुनिया में चल रहे युद्धों को खत्म करने पर।' दिल्ली घोषणापत्र में आतंकवाद पर दर्ज सहमति को उन्होंने 'पाकिस्तान जैसे देशों के लिए बड़ा झटका' बताते हुए कहा, 'यह आतंकवाद के लिए एक बड़ा झटका है और उन लोगों के लिए भी जो आतंकवादियों का समर्थन करते हैं, खासकर पाकिस्तान के लिए।'
भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का बयान
नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लाल सिंह आर्या ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पिछले 10 वर्षों से लगातार वैश्विक मंच पर यह संदेश देते रहे हैं कि आतंकवाद मानवता के विरुद्ध है। उन्होंने कहा, 'ब्रिक्स समिट में सभी भाग लेने वाले देशों द्वारा आतंकवाद का विरोध — जिसमें पहलगाम हमले जैसी घटनाएं भी शामिल हैं — भारत और नरेंद्र मोदी की पहल के माध्यम से वैश्विक स्तर पर एक बड़ी जीत है। यह भारत के लिए गर्व की बात है।'
शिवसेना का समर्थन
मुंबई में शिवसेना एमएलसी मनीषा कायंडे ने भी ब्रिक्स देशों के रुख का स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'ब्रिक्स समिट में शामिल हुए विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाई है और पहलगाम हमले की निंदा की है। इसका मतलब है कि इनमें से कोई भी देश किसी भी रूप में आतंकवाद का समर्थन नहीं करता है।' कायंडे ने यह भी जोड़ा कि संकट की स्थिति में ब्रिक्स देश एक-दूसरे के साथ खड़े रहेंगे।
व्यापक संदर्भ: भारत की कूटनीतिक रणनीति
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध पहलगाम हमले के बाद से अत्यंत तनावपूर्ण बने हुए हैं। गौरतलब है कि भारत लंबे समय से बहुपक्षीय मंचों — चाहे वह G20 हो, SCO हो या BRICS — पर आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक सहमति बनाने की कोशिश करता रहा है। दिल्ली घोषणापत्र में पहलगाम हमले की स्पष्ट निंदा को कूटनीतिक वृत्तों में उल्लेखनीय माना जा रहा है, क्योंकि ब्रिक्स के कुछ सदस्य देशों के पाकिस्तान के साथ पारंपरिक रूप से घनिष्ठ संबंध रहे हैं।
आगे क्या
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के परिणामों की राजनयिक व्याख्या आने वाले दिनों में जारी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सहमति को भारत पाकिस्तान पर बहुपक्षीय दबाव बनाने के लिए भविष्य में भी भुनाने की कोशिश करेगा। भाजपा नेताओं के ये बयान ऐसे राजनीतिक संदर्भ में आए हैं जब सरकार की विदेश नीति घरेलू स्तर पर भी जनमत-निर्माण का एक प्रमुख विषय बनी हुई है।