13 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ब्रिक्स समिट में पहलगाम हमले की निंदा: भाजपा बोली — मोदी की कूटनीति की बड़ी जीत, पाकिस्तान को झटका

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ब्रिक्स समिट में पहलगाम हमले की निंदा: भाजपा बोली — मोदी की कूटनीति की बड़ी जीत, पाकिस्तान को झटका

सारांश

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पहलगाम हमले की निंदा और आतंकवाद-विरोधी सहमति को भाजपा नेताओं ने मोदी की कूटनीति की बड़ी जीत बताया। दिल्ली घोषणापत्र में यह प्रावधान पाकिस्तान के लिए स्पष्ट कूटनीतिक झटका माना जा रहा है — खासकर तब, जब ब्रिक्स के कुछ सदस्य देशों के इस्लामाबाद से पारंपरिक रूप से घनिष्ठ संबंध रहे हैं।

मुख्य बातें

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दिल्ली घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा और आतंकवाद के विरुद्ध जीरो-टॉलरेंस नीति पर आम सहमति बनी।
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने इसे 'ऐतिहासिक सफलता' और PM मोदी की कूटनीति की जीत बताया।
भाजपा सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने कहा — यह सहमति पाकिस्तान जैसे देशों के लिए बड़ा झटका है।
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लाल सिंह आर्या ने कहा कि मोदी पिछले 10 वर्षों से वैश्विक मंचों पर आतंकवाद-विरोधी संदेश देते रहे हैं।
शिवसेना एमएलसी मनीषा कायंडे ने भी ब्रिक्स देशों के रुख का स्वागत करते हुए इसे एकजुटता का प्रतीक बताया।
राष्ट्रपति पुतिन ने ब्रिक्स देशों की संयुक्त जीडीपी के यूरोप और अमेरिका से अधिक होने का उल्लेख किया।

नई दिल्ली, 13 सितंबर 2026ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा और आतंकवाद के विरुद्ध जीरो-टॉलरेंस नीति पर बनी बहुपक्षीय सहमति को भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक कूटनीति की निर्णायक जीत करार दिया है। दिल्ली घोषणापत्र में आतंकवाद-विरोधी प्रावधाम को लेकर बनी आम राय को नेताओं ने पाकिस्तान के लिए स्पष्ट कूटनीतिक झटका बताया।

भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया

पटना में भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने इसे ब्रिक्स के इतिहास में एक उल्लेखनीय मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा, 'यह ब्रिक्स समिट के लिए एक ऐतिहासिक सफलता है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देता हूं। भारत की अध्यक्षता में चीन, रूस, ईरान, यूएई, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील जैसे देश एक वैकल्पिक और प्रभावी अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक साथ आए हैं।' प्रसाद ने यह भी रेखांकित किया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ब्रिक्स देशों की संयुक्त जीडीपी के यूरोप और अमेरिका से अधिक होने की बात कही, जो इस गुट के बढ़ते वैश्विक वज़न को दर्शाता है।

भाजपा सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने कहा कि भारत में सफलतापूर्वक आयोजित ब्रिक्स समिट ने दुनिया को एक मज़बूत और स्पष्ट संदेश दिया है। उनके अनुसार, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट में आम सहमति बनाई, खासकर विकास और दुनिया में चल रहे युद्धों को खत्म करने पर।' दिल्ली घोषणापत्र में आतंकवाद पर दर्ज सहमति को उन्होंने 'पाकिस्तान जैसे देशों के लिए बड़ा झटका' बताते हुए कहा, 'यह आतंकवाद के लिए एक बड़ा झटका है और उन लोगों के लिए भी जो आतंकवादियों का समर्थन करते हैं, खासकर पाकिस्तान के लिए।'

भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का बयान

नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लाल सिंह आर्या ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पिछले 10 वर्षों से लगातार वैश्विक मंच पर यह संदेश देते रहे हैं कि आतंकवाद मानवता के विरुद्ध है। उन्होंने कहा, 'ब्रिक्स समिट में सभी भाग लेने वाले देशों द्वारा आतंकवाद का विरोध — जिसमें पहलगाम हमले जैसी घटनाएं भी शामिल हैं — भारत और नरेंद्र मोदी की पहल के माध्यम से वैश्विक स्तर पर एक बड़ी जीत है। यह भारत के लिए गर्व की बात है।'

शिवसेना का समर्थन

मुंबई में शिवसेना एमएलसी मनीषा कायंडे ने भी ब्रिक्स देशों के रुख का स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'ब्रिक्स समिट में शामिल हुए विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाई है और पहलगाम हमले की निंदा की है। इसका मतलब है कि इनमें से कोई भी देश किसी भी रूप में आतंकवाद का समर्थन नहीं करता है।' कायंडे ने यह भी जोड़ा कि संकट की स्थिति में ब्रिक्स देश एक-दूसरे के साथ खड़े रहेंगे।

व्यापक संदर्भ: भारत की कूटनीतिक रणनीति

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध पहलगाम हमले के बाद से अत्यंत तनावपूर्ण बने हुए हैं। गौरतलब है कि भारत लंबे समय से बहुपक्षीय मंचों — चाहे वह G20 हो, SCO हो या BRICS — पर आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक सहमति बनाने की कोशिश करता रहा है। दिल्ली घोषणापत्र में पहलगाम हमले की स्पष्ट निंदा को कूटनीतिक वृत्तों में उल्लेखनीय माना जा रहा है, क्योंकि ब्रिक्स के कुछ सदस्य देशों के पाकिस्तान के साथ पारंपरिक रूप से घनिष्ठ संबंध रहे हैं।

आगे क्या

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के परिणामों की राजनयिक व्याख्या आने वाले दिनों में जारी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सहमति को भारत पाकिस्तान पर बहुपक्षीय दबाव बनाने के लिए भविष्य में भी भुनाने की कोशिश करेगा। भाजपा नेताओं के ये बयान ऐसे राजनीतिक संदर्भ में आए हैं जब सरकार की विदेश नीति घरेलू स्तर पर भी जनमत-निर्माण का एक प्रमुख विषय बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि यह सहमति कागज़ से ज़मीन पर कितनी उतरती है — ब्रिक्स के कुछ सदस्य देशों के पाकिस्तान के साथ गहरे आर्थिक और सामरिक रिश्ते हैं जो इस निंदा को व्यावहारिक दबाव में बदलने में बाधा बन सकते हैं। भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया स्वाभाविक रूप से राजनीतिक रंग लिए हुए है — घरेलू दर्शकों के लिए कूटनीतिक सफलता को अधिकतम भुनाने की कोशिश स्पष्ट दिखती है। मुख्यधारा की कवरेज जो प्रश्न छोड़ती है वह यह है: क्या दिल्ली घोषणापत्र में पाकिस्तान का नाम सीधे लिया गया है, या निंदा सामान्य भाषा में है — और यह फ़र्क कूटनीतिक वज़न के लिहाज़ से बेहद महत्त्वपूर्ण है। बहुपक्षीय मंचों पर जीती गई ऐसी सहमतियों का इतिहास बताता है कि जब तक इन्हें ठोस कार्रवाई — जैसे वित्तीय प्रतिबंध या राजनयिक अलगाव — से नहीं जोड़ा जाता, ये प्रतीकात्मक ही रह जाती हैं।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स समिट में पहलगाम हमले की निंदा क्यों महत्त्वपूर्ण है?
ब्रिक्स एक बहुपक्षीय मंच है जिसमें चीन, रूस और ईरान जैसे देश शामिल हैं, जिनके पाकिस्तान के साथ पारंपरिक रूप से घनिष्ठ संबंध रहे हैं। इन देशों का पहलगाम हमले की निंदा पर सहमत होना भारत के लिए कूटनीतिक दृष्टि से उल्लेखनीय माना जा रहा है। दिल्ली घोषणापत्र में यह प्रावधान भारत की आतंकवाद-विरोधी नीति को वैश्विक समर्थन दिलाने की दिशा में एक कदम है।
दिल्ली घोषणापत्र में आतंकवाद पर क्या सहमति बनी?
दिल्ली घोषणापत्र में ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के विरुद्ध जीरो-टॉलरेंस नीति अपनाने और पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करने पर आम सहमति जताई। भाजपा नेताओं के अनुसार यह सहमति विशेष रूप से पाकिस्तान जैसे देशों के लिए कूटनीतिक झटके के समान है।
भाजपा नेताओं ने ब्रिक्स परिणामों पर क्या कहा?
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने इसे 'ऐतिहासिक सफलता' बताते हुए PM मोदी को बधाई दी। भाजपा सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने कहा कि आतंकवाद पर बनी सहमति पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका है। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लाल सिंह आर्या ने इसे मोदी की 10 वर्षों की वैश्विक पहल का परिणाम बताया।
ब्रिक्स समिट 2026 में भारत की क्या भूमिका रही?
भारत ने इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली और नई दिल्ली में शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। PM मोदी ने आतंकवाद-विरोध, वैश्विक विकास और युद्धों को समाप्त करने पर आम सहमति बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाई, ऐसा भाजपा नेताओं ने कहा।
शिवसेना ने ब्रिक्स के आतंकवाद-विरोधी रुख पर क्या कहा?
शिवसेना एमएलसी मनीषा कायंडे ने कहा कि ब्रिक्स में शामिल किसी भी देश ने आतंकवाद का समर्थन नहीं किया और पहलगाम हमले की सर्वसम्मति से निंदा की गई। उन्होंने इसे ब्रिक्स देशों की एकजुटता और आपसी समर्थन का प्रतीक बताया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 2 घंटे पहले
  3. 13 घंटे पहले
  4. 1 साल पहले
  5. 1 साल पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले