ब्रिक्स में सर्वसम्मति से पहलगाम हमले की निंदा, शेखावत बोले — प्रस्ताव दुनिया के कल्याण में देगा योगदान
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने रविवार, 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित 'श्री राम कथा' के भूमि पूजन कार्यक्रम में शिरकत की और इस अवसर पर 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता में पारित यह प्रस्ताव वैश्विक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा।
ब्रिक्स प्रस्ताव और भारत की भूमिका
शेखावत ने कहा, 'भारत के लिए जी-20 के बाद ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालना और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करना बहुत महत्वपूर्ण है।' उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत ने हमेशा वैश्विक मंचों पर आतंकवाद, आतंकी घटनाओं, अवैध हथियारों और नशीली दवाओं की तस्करी के खिलाफ दृढ़ता से अपना पक्ष रखा है। उनके अनुसार, भारत की अध्यक्षता और नेतृत्व में सर्वसम्मति से पारित यह प्रस्ताव दुनिया के कल्याण में सीधा योगदान देगा।
दिल्ली घोषणा — पहलगाम हमले की कड़ी निंदा
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दिल्ली घोषणा को अपनाने का प्रस्ताव रखा। इस घोषणा में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की गई। घोषणा पत्र में आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का स्पष्ट आह्वान किया गया।
घोषणा में यह भी रेखांकित किया गया कि किसी भी उद्देश्य से, कहीं भी और किसी के भी द्वारा किए गए आतंकवादी कृत्य आपराधिक और अनुचित हैं तथा उनकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए। इसमें आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादियों को सुरक्षित पनाह देने वालों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई पर विशेष जोर दिया गया।
आतंकवाद को धर्म से न जोड़ने की अपील
ब्रिक्स देशों ने सामूहिक रूप से यह स्पष्ट किया कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। साथ ही यह भी कहा गया कि आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों और उन्हें समर्थन देने वालों को संबंधित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत जवाबदेह ठहराते हुए न्याय के कटघरे में लाया जाए।
संस्कृति और सनातन परंपरा पर शेखावत का संदेश
भूमि पूजन कार्यक्रम में शेखावत ने सनातन संस्कृति के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, 'सनातन संस्कारम के तहत इस साल भी श्री राम कथा का आयोजन किया जा रहा है, ताकि लोगों को सनातन संस्कृति की विशालता और गहराई से जोड़ा जा सके।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि संस्कृति और पर्यटन दो ऐसे महत्वपूर्ण माध्यम हैं जिनके ज़रिए देश आपसी तनाव और मतभेदों को दूर कर सकते हैं और सभ्यता देशों को एक साथ लाने का रास्ता बनाती है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक स्तर पर चरम पर है। शेखावत के अनुसार, ब्रिक्स जैसे मंच बातचीत का रास्ता बनाते हैं और चर्चा के लिए दरवाज़े खोलते हैं। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में पारित दिल्ली घोषणा अब सदस्य देशों के कूटनीतिक और कानूनी ढाँचों में किस हद तक अनुवादित होती है — यही वास्तविक परीक्षा होगी।