भारत-मोरक्को आतंकवाद-रोधी बैठक नई दिल्ली में, पहलगाम और लाल किला हमले की संयुक्त निंदा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 22 जून 2026 को भारत-मोरक्को आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह (JWG) की दूसरी बैठक आयोजित हुई, जिसमें दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंक के हर स्वरूप की कड़ी निंदा की और द्विपक्षीय सहयोग को नई ऊँचाई देने की प्रतिबद्धता जताई। बैठक में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और 10 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में लाल किले के निकट हुई आतंकवादी घटना की विशेष रूप से भर्त्सना की गई।
बैठक का नेतृत्व और संरचना
इस उच्चस्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता भारतीय विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (काउंटर टेररिज्म) डॉ. विनोद बहाडे और मोरक्को साम्राज्य के राष्ट्रीय पुलिस महानिदेशालय के अंतर्गत राष्ट्रीय न्यायिक पुलिस ब्रिगेड के प्रमुख हिचाम बाली ने की। यह JWG का दूसरा सत्र था, जो दोनों देशों के बीच संस्थागत आतंकवाद-विरोधी तंत्र को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम और चर्चा के विषय
बैठक में दोनों पक्षों ने वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर सक्रिय आतंकवादी संगठनों से उत्पन्न खतरों का विस्तृत मूल्यांकन किया। चर्चा के प्रमुख बिंदुओं में हिंसक कट्टरपंथ और उग्रवाद की रोकथाम, आतंकवाद के वित्तपोषण पर अंकुश, आतंकी गतिविधियों में तकनीक के दुरुपयोग को रोकना, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध और आतंकवाद के परस्पर संबंध, तथा आतंकवादियों की वैश्विक आवाजाही पर निगरानी जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल रहे।
सहयोग के नए आयाम
दोनों देशों ने सूचना-साझाकरण, क्षमता-निर्माण और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान के ज़रिए आतंकवाद-रोधी साझेदारी को और प्रभावी बनाने पर सहमति व्यक्त की। इसके अतिरिक्त, संयुक्त राष्ट्र, FATF (वित्तीय कार्रवाई कार्यबल) और GCTF (वैश्विक आतंकवाद-रोधी मंच) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई। यह ऐसे समय में आया है जब भारत पहलगाम हमले के बाद कूटनीतिक मोर्चे पर आतंकवाद के विरुद्ध व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में सक्रिय है।
अगली बैठक की रूपरेखा
दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से तय की जाने वाली तिथि पर मोरक्को में JWG की अगली बैठक आयोजित करने पर सहमति जताई। गौरतलब है कि यह JWG भारत-मोरक्को के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों का हिस्सा है, और इस द्विपक्षीय तंत्र का विस्तार आने वाले समय में और अधिक क्षेत्रों में सहयोग का आधार बन सकता है।