पहलगाम हमले की ब्रिक्स में निंदा से भारत की दशकों पुरानी आतंकवाद-विरोधी दलील को मिली वैश्विक मान्यता
सारांश
मुख्य बातें
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाए गए नई दिल्ली घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट रुख ने भारत की उस दीर्घकालिक कूटनीतिक दलील को नई ताकत दी है, जिसे नई दिल्ली दशकों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाती रही है। एथेंस स्थित विश्लेषण संस्था 'डायरेक्टस' की एक रिपोर्ट में यह आकलन किया गया है।
नई दिल्ली घोषणापत्र में क्या कहा गया
घोषणापत्र में यह स्पष्ट संदेश दर्ज किया गया कि आतंकवाद को राजनीतिक व्याख्या के जरिए वैध नहीं ठहराया जा सकता और रणनीतिक सुविधा के आधार पर आतंकवादियों के बीच कोई भेद नहीं किया जाना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, यह शब्दावली उन देशों के समूह ने स्वीकार की, जिनके बीच कई बार परस्पर विरोधी रणनीतिक हित रहे हैं — और इसीलिए इसका विशेष महत्व है।
रिपोर्ट में कहा गया, घोषणापत्र में पाकिस्तान का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया गया है। हालांकि, रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि इस तथ्य को न तो छिपाया जाना चाहिए और न ही बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाना चाहिए। इसके बावजूद, इस सामूहिक स्वीकृति को भारत के लिए एक खास कूटनीतिक उपलब्धि बताया गया है।
पहलगाम हमले को मिला बहुपक्षीय आयाम
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। 'डायरेक्टस' की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने इस हमले को केवल एक आतंकी घटना के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे सक्रिय रूप से अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मुद्दा बनाया।
रिपोर्ट में लिखा गया, 'ब्रिक्स घोषणापत्र में पहलगाम हमले की निंदा के साथ ही सीमा पार आतंकवाद, आतंक के वित्तपोषण और आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया गया है।' रिपोर्ट के अनुसार, यह संयोजन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत का लगातार यह रुख रहा है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को केवल राजनीतिक विवाद के नजरिए से नहीं देखा जा सकता।
पाकिस्तान के सामने खड़ा असहज सवाल
'डायरेक्टस' ने अपने विश्लेषण में कहा कि इस घटनाक्रम से पाकिस्तान के सामने एक असहज प्रश्न खड़ा होता है — सीमा पार आतंकवाद से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय चर्चा आखिर कब तक उन बुनियादी ढाँचों, संगठनों और वैचारिक नेटवर्क से अलग रखी जा सकती है, जिनके पाकिस्तान की जमीन से संचालित होने का आरोप भारत लगातार लगाता रहा है।
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया कि आतंकवाद से प्रभावी मुकाबले का अर्थ केवल उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं है जो गोली चलाता है, बल्कि उस पूरे तंत्र के खिलाफ कार्रवाई करना है जो उसे हथियार, प्रशिक्षण, वित्त, संचार व्यवस्था, भर्ती नेटवर्क और संचालन के लिए ठिकाने मुहैया कराता है।
मोदी की बहुआयामी विदेश नीति का प्रमाण
रिपोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रणनीतिक स्वायत्तता की नीति की भी सराहना की। इसके अनुसार, भारत एक साथ क्वाड का भागीदार होने के साथ-साथ ब्रिक्स का प्रमुख सदस्य भी है। वह रूस के साथ ऐतिहासिक संबंध बनाए रखते हुए अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण साझेदारी विकसित कर रहा है, खाड़ी देशों के साथ तेजी से सम्बन्ध विस्तार कर रहा है और इजरायल के साथ करीबी रिश्ते भी कायम रखे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, चीन के साथ भारत के बड़े मतभेदों के बावजूद दोनों देश उन मुद्दों पर संवाद जारी रखते हैं जहाँ राष्ट्रीय हित इसकी माँग करते हैं। 'डायरेक्टस' का मानना है कि इस घटनाक्रम ने भारत की एक स्वतंत्र वैश्विक शक्ति के रूप में स्थिति को मजबूत किया है और यह धारणा कमजोर की है कि वह किसी एक भू-राजनीतिक गुट का हिस्सा मात्र है।
आगे की दिशा
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहमति बनाने की कोशिश तेज कर रहा है। गौरतलब है कि ब्रिक्स जैसे विविध भू-राजनीतिक हितों वाले मंच पर इस भाषा को स्वीकृति मिलना भारत की कूटनीतिक पहुँच की परिपक्वता का संकेत माना जा रहा है। भविष्य में भारत इस बहुपक्षीय समर्थन का उपयोग अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों — जिनमें संयुक्त राष्ट्र और G20 शामिल हैं — पर अपनी स्थिति और मजबूत करने के लिए कर सकता है।