18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की कूटनीतिक जीत: पहलगाम हमले की निंदा, आतंकवाद पर 'जीरो टॉलरेंस'
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली — 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की व्यापक रणनीति (ग्रैंड स्ट्रैटेजी) ने बड़ी कूटनीतिक सफलता दिलाई है। रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने सदस्य देशों के परस्पर विरोधी हितों के बीच संतुलन साधते हुए बहुपक्षवाद को व्यावहारिक दिशा दी और वैश्विक मंच पर अपने रणनीतिक उभार का स्पष्ट संदेश दिया। इस सम्मेलन में भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि आतंकवाद के मुद्दे पर रही, जहाँ अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए पाकिस्तान-समर्थित आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा संयुक्त घोषणापत्र में शामिल कराई गई।
तीन प्रमुख रणनीतिक धुरियाँ
'इंडिया नैरेटिव' की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की रणनीति तीन केंद्रीय बदलावों पर टिकी रही। पहली धुरी थी — बहुपक्षवाद को व्यावहारिक बनाते हुए वैश्विक शासन संस्थाओं और ढाँचों में सुधार को आगे बढ़ाना। दूसरी धुरी थी — ब्रिक्स को सहयोग और लचीलापन बढ़ाने वाले रणनीतिक मंच के रूप में मज़बूत करना। तीसरी धुरी थी — आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक सुरक्षा को विविधीकरण तथा समावेशिता के ज़रिए सुदृढ़ करते हुए भारत को वैश्विक संकटों के समाधान में एक विश्वसनीय और टिकाऊ खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्दे के पीछे हुई गहन बातचीत ने भारत की 'स्ट्रैटेजिक डी-हाइफनेशन' और 'स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी' की नीति को प्रभावी ढंग से उजागर किया। डी-हाइफनेशन के ज़रिए ब्रिक्स को भू-राजनीतिक संघर्षों से परे व्यावहारिक एजेंडे पर केंद्रित रखा गया, जबकि रणनीतिक स्वायत्तता के माध्यम से आर्थिक सहयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।
घोषणापत्र पर सहमति: ग्लोबल साउथ की आवाज़
रिपोर्ट के अनुसार, शिखर सम्मेलन से पहले व्यापक आशंका थी कि राजनीतिक मतभेदों के चलते संयुक्त घोषणापत्र पर सहमति नहीं बन पाएगी। हालाँकि, भारत ने राष्ट्रीय और वैश्विक हितों के बीच संतुलन साधते हुए यह सहमति सुनिश्चित की और ग्लोबल साउथ की आवाज़ को घोषणापत्र में प्रमुखता से जगह दिलाई। गौरतलब है कि जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में भारत ने इसी रणनीति का सफल उपयोग किया था।
इसके अतिरिक्त, हाल में भारत द्वारा एससीओ (SCO) घोषणापत्र पर हस्ताक्षर के बाद ब्रिक्स घोषणापत्र में ईरान पर सैन्य हमलों की कड़ी निंदा और एकतरफा पश्चिमी आर्थिक प्रतिबंधों की आलोचना भी शामिल की गई।
पहलगाम हमले की निंदा: भारत की सबसे बड़ी जीत
रिपोर्ट के मुताबिक, इस शिखर सम्मेलन में भारत की सबसे उल्लेखनीय कूटनीतिक सफलता आतंकवाद के मुद्दे पर रही। ब्रिक्स घोषणापत्र में आतंकवाद के सभी स्वरूपों और अभिव्यक्तियों की कड़ी निंदा की गई और अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए पाकिस्तान-समर्थित आतंकवादी हमले का विशेष रूप से उल्लेख किया गया।
घोषणापत्र में पहलगाम हमले की 'सबसे कड़े शब्दों में' निंदा करते हुए सीमा पार आतंकवाद, आतंकियों की आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों पर गहरी चिंता जताई गई। साथ ही आतंकवाद के विरुद्ध दोहरे मापदंडों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए 'जीरो टॉलरेंस' की नीति दोहराई गई।
रणनीतिक महत्त्व और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब ब्रिक्स का विस्तार हो चुका है और समूह के भीतर रूस, चीन, और नए सदस्य देशों के अलग-अलग भू-राजनीतिक हित टकराते रहे हैं। भारत का सर्वसम्मति बनाने का यह कौशल उसे समूह के भीतर एक अनिवार्य संतुलनकर्ता की भूमिका में स्थापित करता है। विश्लेषकों के अनुसार, यह केवल एक सम्मेलन की सफलता नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक बहु-संरेखण (multi-alignment) नीति की पुष्टि है — जो पश्चिम और गैर-पश्चिम दोनों खेमों में विश्वसनीयता बनाए रखने की क्षमता पर आधारित है।