13 सितंबर 2026
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18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की कूटनीतिक जीत: पहलगाम हमले की निंदा, आतंकवाद पर 'जीरो टॉलरेंस'

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18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की कूटनीतिक जीत: पहलगाम हमले की निंदा, आतंकवाद पर 'जीरो टॉलरेंस'

सारांश

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत ने केवल भागीदारी नहीं की — उसने एजेंडा तय किया। पहलगाम हमले की बहुपक्षीय निंदा और 'जीरो टॉलरेंस' की नीति को घोषणापत्र में जगह दिलाकर भारत ने साबित किया कि वह रूस-चीन के बीच भी अपनी शर्तों पर खेलता है।

मुख्य बातें

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की ग्रैंड स्ट्रैटेजी ने बड़ी कूटनीतिक सफलता दिलाई।
अप्रैल 2025 में पहलगाम (जम्मू-कश्मीर) में हुए पाकिस्तान-समर्थित आतंकी हमले की 'सबसे कड़े शब्दों में' निंदा ब्रिक्स घोषणापत्र में शामिल।
घोषणापत्र में सीमा पार आतंकवाद, आतंकी वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों पर चिंता, दोहरे मापदंडों को खारिज।
ग्लोबल साउथ की आवाज़ को संयुक्त घोषणापत्र में प्रमुख स्थान मिला।
भारत की ' स्ट्रैटेजिक डी-हाइफनेशन ' और ' स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी ' नीति ने भू-राजनीतिक टकराव से ब्रिक्स को बचाए रखा।
ईरान पर सैन्य हमलों की निंदा और एकतरफा पश्चिमी प्रतिबंधों की आलोचना भी घोषणापत्र में।

नई दिल्ली18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की व्यापक रणनीति (ग्रैंड स्ट्रैटेजी) ने बड़ी कूटनीतिक सफलता दिलाई है। रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने सदस्य देशों के परस्पर विरोधी हितों के बीच संतुलन साधते हुए बहुपक्षवाद को व्यावहारिक दिशा दी और वैश्विक मंच पर अपने रणनीतिक उभार का स्पष्ट संदेश दिया। इस सम्मेलन में भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि आतंकवाद के मुद्दे पर रही, जहाँ अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए पाकिस्तान-समर्थित आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा संयुक्त घोषणापत्र में शामिल कराई गई।

तीन प्रमुख रणनीतिक धुरियाँ

'इंडिया नैरेटिव' की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की रणनीति तीन केंद्रीय बदलावों पर टिकी रही। पहली धुरी थी — बहुपक्षवाद को व्यावहारिक बनाते हुए वैश्विक शासन संस्थाओं और ढाँचों में सुधार को आगे बढ़ाना। दूसरी धुरी थी — ब्रिक्स को सहयोग और लचीलापन बढ़ाने वाले रणनीतिक मंच के रूप में मज़बूत करना। तीसरी धुरी थी — आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक सुरक्षा को विविधीकरण तथा समावेशिता के ज़रिए सुदृढ़ करते हुए भारत को वैश्विक संकटों के समाधान में एक विश्वसनीय और टिकाऊ खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्दे के पीछे हुई गहन बातचीत ने भारत की 'स्ट्रैटेजिक डी-हाइफनेशन' और 'स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी' की नीति को प्रभावी ढंग से उजागर किया। डी-हाइफनेशन के ज़रिए ब्रिक्स को भू-राजनीतिक संघर्षों से परे व्यावहारिक एजेंडे पर केंद्रित रखा गया, जबकि रणनीतिक स्वायत्तता के माध्यम से आर्थिक सहयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।

घोषणापत्र पर सहमति: ग्लोबल साउथ की आवाज़

रिपोर्ट के अनुसार, शिखर सम्मेलन से पहले व्यापक आशंका थी कि राजनीतिक मतभेदों के चलते संयुक्त घोषणापत्र पर सहमति नहीं बन पाएगी। हालाँकि, भारत ने राष्ट्रीय और वैश्विक हितों के बीच संतुलन साधते हुए यह सहमति सुनिश्चित की और ग्लोबल साउथ की आवाज़ को घोषणापत्र में प्रमुखता से जगह दिलाई। गौरतलब है कि जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में भारत ने इसी रणनीति का सफल उपयोग किया था।

इसके अतिरिक्त, हाल में भारत द्वारा एससीओ (SCO) घोषणापत्र पर हस्ताक्षर के बाद ब्रिक्स घोषणापत्र में ईरान पर सैन्य हमलों की कड़ी निंदा और एकतरफा पश्चिमी आर्थिक प्रतिबंधों की आलोचना भी शामिल की गई।

पहलगाम हमले की निंदा: भारत की सबसे बड़ी जीत

रिपोर्ट के मुताबिक, इस शिखर सम्मेलन में भारत की सबसे उल्लेखनीय कूटनीतिक सफलता आतंकवाद के मुद्दे पर रही। ब्रिक्स घोषणापत्र में आतंकवाद के सभी स्वरूपों और अभिव्यक्तियों की कड़ी निंदा की गई और अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए पाकिस्तान-समर्थित आतंकवादी हमले का विशेष रूप से उल्लेख किया गया।

घोषणापत्र में पहलगाम हमले की 'सबसे कड़े शब्दों में' निंदा करते हुए सीमा पार आतंकवाद, आतंकियों की आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों पर गहरी चिंता जताई गई। साथ ही आतंकवाद के विरुद्ध दोहरे मापदंडों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए 'जीरो टॉलरेंस' की नीति दोहराई गई।

रणनीतिक महत्त्व और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब ब्रिक्स का विस्तार हो चुका है और समूह के भीतर रूस, चीन, और नए सदस्य देशों के अलग-अलग भू-राजनीतिक हित टकराते रहे हैं। भारत का सर्वसम्मति बनाने का यह कौशल उसे समूह के भीतर एक अनिवार्य संतुलनकर्ता की भूमिका में स्थापित करता है। विश्लेषकों के अनुसार, यह केवल एक सम्मेलन की सफलता नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक बहु-संरेखण (multi-alignment) नीति की पुष्टि है — जो पश्चिम और गैर-पश्चिम दोनों खेमों में विश्वसनीयता बनाए रखने की क्षमता पर आधारित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि ऐसे घोषणापत्र अक्सर कागज़ी निंदा तक सीमित रह जाते हैं। भारत की 'स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी' की नीति उसे पश्चिमी और गैर-पश्चिमी दोनों मंचों पर प्रासंगिक बनाए रखती है, किंतु इसकी एक सीमा भी है — अत्यधिक संतुलन की कोशिश कभी-कभी मूल्यों पर आधारित स्पष्ट पक्षधरता को कमज़ोर कर सकती है। रूस और चीन के साथ एक मंच पर रहते हुए पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद की निंदा कराना कूटनीतिक कौशल का प्रमाण है, पर ग्लोबल साउथ में नेतृत्व की विश्वसनीयता तभी टिकेगी जब यह सफलताएँ ज़मीनी परिणामों में तब्दील हों।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता क्या रही?
भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि आतंकवाद के मुद्दे पर रही — ब्रिक्स घोषणापत्र में अप्रैल 2025 में पहलगाम (जम्मू-कश्मीर) में हुए पाकिस्तान-समर्थित आतंकी हमले की 'सबसे कड़े शब्दों में' निंदा और 'जीरो टॉलरेंस' की नीति को शामिल कराया गया। घोषणापत्र में सीमा पार आतंकवाद, आतंकी वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों पर भी स्पष्ट चिंता व्यक्त की गई।
भारत की 'स्ट्रैटेजिक डी-हाइफनेशन' नीति क्या है?
स्ट्रैटेजिक डी-हाइफनेशन का अर्थ है ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों को भू-राजनीतिक संघर्षों और शक्ति-प्रतिस्पर्धा से अलग रखते हुए व्यावहारिक एजेंडे — जैसे आर्थिक सहयोग और वैश्विक शासन सुधार — पर केंद्रित करना। इससे भारत रूस, चीन और पश्चिमी देशों के बीच एक विश्वसनीय संतुलनकर्ता की भूमिका निभा पाता है।
ब्रिक्स घोषणापत्र में ग्लोबल साउथ के लिए क्या हासिल हुआ?
भारत ने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सहमति सुनिश्चित की और ग्लोबल साउथ की आवाज़ को संयुक्त घोषणापत्र में प्रमुख स्थान दिलाया। इसके अलावा वैश्विक शासन संस्थाओं में सुधार और आर्थिक सुरक्षा में विविधीकरण को भी घोषणापत्र में जगह मिली।
क्या ब्रिक्स घोषणापत्र में ईरान का भी उल्लेख हुआ?
हाँ, रिपोर्टों के अनुसार ब्रिक्स घोषणापत्र में ईरान पर सैन्य हमलों की कड़ी निंदा और एकतरफा पश्चिमी आर्थिक प्रतिबंधों की आलोचना भी शामिल की गई। यह उल्लेख भारत द्वारा एससीओ (SCO) घोषणापत्र पर हस्ताक्षर के बाद आया।
जी-20 और ब्रिक्स में भारत की रणनीति में क्या समानता है?
दोनों मंचों पर भारत ने 'स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी' की नीति अपनाई — विभिन्न देशों के हितों में सामंजस्य स्थापित करते हुए आर्थिक सहयोग को केंद्र में रखा। जी-20 में रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में भी भारत ने इसी तरह सर्वसम्मति से घोषणापत्र पारित कराया था।
राष्ट्र प्रेस
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