13 सितंबर 2026
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ब्रिक्स 'नई दिल्ली घोषणापत्र' पर BJP प्रवक्ता तुहिन सिन्हा बोले — भारत की कूटनीतिक जीत

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ब्रिक्स 'नई दिल्ली घोषणापत्र' पर BJP प्रवक्ता तुहिन सिन्हा बोले — भारत की कूटनीतिक जीत

सारांश

ब्रिक्स के 'नई दिल्ली घोषणापत्र' में पहलगाम हमले की निंदा और UNSC सुधार की माँग ने इसे भारत की कूटनीतिक जीत बना दिया — BJP प्रवक्ता तुहिन सिन्हा के अनुसार, 11 देशों का एकस्वर आतंकवाद विरोध मोदी की बहुपक्षीय नीति की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

मुख्य बातें

BJP राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने 13 सितंबर 2026 को ब्रिक्स 'नई दिल्ली घोषणापत्र' को ऐतिहासिक करार दिया।
घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा और UNSC सुधार की माँग शामिल — सिन्हा ने इसे पाकिस्तान के विरुद्ध सीधा कदम बताया।
11 ब्रिक्स सदस्य देशों ने आतंकवाद के विरुद्ध सर्वसम्मत रुख अपनाया।
ग्लोबल साउथ के हित और AI व तकनीक सहयोग भी घोषणापत्र का हिस्सा।
कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री गाला डिनर से अनुपस्थित रहे; सिन्हा ने इसे राष्ट्रीय गौरव के अवसर से चूकना बताया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने 13 सितंबर 2026 को कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाया गया 'नई दिल्ली घोषणापत्र' ऐतिहासिक है और आतंकवाद के विरुद्ध 11 देशों का सर्वसम्मत रुख भारत की बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है। उन्होंने यह भी कहा कि घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले की स्पष्ट निंदा के ज़रिए पाकिस्तान को सीधे घेरे में लिया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

तुहिन सिन्हा ने कहा, 'नई दिल्ली घोषणापत्र' तीव्र गति से तैयार किया गया और इसमें सभी देशों की संवेदनशीलताओं का ध्यान रखा गया। उन्होंने कहा, "जिस प्रकार से 'नई दिल्ली घोषणापत्र' तीव्र गति से सभी देशों के सेंसिटिविटीज को साथ में लेकर निकाला गया और जिस व्यापकता के साथ सभी अहम विषयों को उसमें अंकित किया गया है — यूएनएससी रिफॉर्म्स की भी बात कही गई है, पहलगाम टेरर अटैक की निंदा की गई है — तो मुझे लगता है कि यह भारत की एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत है।"

घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की माँग, ग्लोबल साउथ के हितों की पैरोकारी और प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के संकल्प भी शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों की आवाज़ को केंद्र में लाने की माँग तेज़ हो रही है।

बहुपक्षीयता पर BJP का रुख

सिन्हा ने कहा कि विपक्ष भारत की विदेश नीति की बुनियाद नहीं समझ पाता। उनके अनुसार, "नपी तुली, संतुलित, सकारात्मक, बहुपक्षीयता अपने आप में एक बहुत अहम विदेश नीति का स्तंभ है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले 10 12 वर्षों में अपनाया है।" उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस हमेशा यह सवाल उठाती है कि भारत किसके साथ है — अमेरिका, ईरान, रूस या यूक्रेन — जबकि रणनीतिक स्वायत्तता ही भारत की पहचान है।

गौरतलब है कि ब्रिक्स का विस्तार हाल के वर्षों में तेज़ी से हुआ है और अब इसमें 11 सदस्य देश शामिल हैं। इतने विविध हितों वाले राष्ट्रों के बीच सर्वसम्मति बनाना भारत की अध्यक्षता के लिए एक बड़ी परीक्षा थी।

कांग्रेस मुख्यमंत्रियों की अनुपस्थिति पर प्रतिक्रिया

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित गाला डिनर में कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के न आने पर सिन्हा ने कहा, "डिनर तो सबके लिए था। हर मुख्यमंत्री वहाँ आमंत्रित था। यह देश के लिए एक गौरव और उत्साह का अवसर था और यह एक ऐतिहासिक अवसर था।" उन्होंने कहा कि कांग्रेस मुख्यमंत्रियों के न आने का कारण वही बेहतर बता सकते हैं।

ग्लोबल साउथ और तकनीक सहयोग

सिन्हा ने कहा कि भारत ग्लोबल साउथ की आवाज़ के रूप में उभरा है और अब सभी ब्रिक्स सदस्य देश एक स्वर में ग्लोबल साउथ के हितों की बात कर रहे हैं। उन्होंने AI और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को भी इस शिखर सम्मेलन की उपलब्धि बताया।

क्या होगा आगे

घोषणापत्र में किए गए संकल्पों के क्रियान्वयन पर अब कूटनीतिक नज़र रहेगी, विशेष रूप से UNSC सुधार और आतंकवाद रोधी सहयोग के मोर्चे पर। भारत के लिए अगली चुनौती यह होगी कि इस सर्वसम्मति को द्विपक्षीय और बहुपक्षीय ढाँचों में ठोस परिणामों में बदला जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ब्रिक्स के कई सदस्य — विशेष रूप से रूस और चीन — पाकिस्तान के साथ गहरे रणनीतिक संबंध रखते हैं। ऐसे में यह देखना ज़रूरी होगा कि घोषणापत्र का यह वाक्य व्यावहारिक कूटनीतिक दबाव में बदलता है या केवल भाषाई समझौते तक सिमट जाता है। UNSC सुधार की माँग दशकों से दोहराई जाती रही है; इस शिखर सम्मेलन के बाद भी उसकी संभावना उतनी ही अनिश्चित है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स 'नई दिल्ली घोषणापत्र' क्या है?
'नई दिल्ली घोषणापत्र' सितंबर 2026 में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का साझा दस्तावेज़ है, जिसमें 11 सदस्य देशों ने आतंकवाद की निंदा, UNSC सुधार, ग्लोबल साउथ के हित और AI सहयोग जैसे मुद्दों पर सहमति जताई है। इसमें पहलगाम आतंकी हमले की भी स्पष्ट निंदा शामिल है।
BJP ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को भारत की कूटनीतिक जीत क्यों बताया?
BJP प्रवक्ता तुहिन सिन्हा के अनुसार, 11 विविध हितों वाले देशों के बीच आतंकवाद विरोधी सर्वसम्मति बनाना और पहलगाम हमले की निंदा को घोषणापत्र में शामिल करवाना भारत की बहुपक्षीय कूटनीति की बड़ी उपलब्धि है। उनका कहना है कि इससे पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर घेरने में मदद मिली है।
कांग्रेस मुख्यमंत्री ब्रिक्स गाला डिनर में क्यों नहीं गए?
कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के गाला डिनर से अनुपस्थित रहे। तुहिन सिन्हा ने कहा कि सभी मुख्यमंत्री आमंत्रित थे और कांग्रेस के मुख्यमंत्री न आने का कारण वही बेहतर बता सकते हैं; उन्होंने इसे राष्ट्रीय गौरव के अवसर से चूकना बताया।
भारत की बहुपक्षीय विदेश नीति का क्या अर्थ है?
बहुपक्षीय विदेश नीति का अर्थ है कि भारत किसी एक खेमे में शामिल हुए बिना अमेरिका, रूस, चीन और ईरान जैसी प्रतिस्पर्धी शक्तियों से संतुलित संबंध बनाए रखता है। BJP के अनुसार, यह रणनीतिक स्वायत्तता मोदी सरकार की पिछले 10 12 वर्षों की विदेश नीति का मूल स्तंभ है।
ब्रिक्स घोषणापत्र में UNSC सुधार का क्या महत्व है?
भारत दशकों से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की माँग करता रहा है। ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों का UNSC सुधार के पक्ष में एकजुट होना भारत के इस लक्ष्य को बहुपक्षीय समर्थन देता है, हालाँकि वास्तविक सुधार के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन की लंबी प्रक्रिया आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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