गुलवीर सिंह का एशियन गेम्स 2026 लक्ष्य: 'स्टार्टिंग लाइन पर सिर्फ पदक दिखता है, प्रतिद्वंद्वी नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
भारत के शीर्ष लॉन्ग डिस्टेंस धावक गुलवीर सिंह ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में दो पदक जीतने के बाद अब अपनी नज़रें जापान के आइची नागोया एशियन गेम्स 2026 पर टिका दी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रतिस्पर्धा चाहे कितनी भी कड़ी हो, जैसे ही वह स्टार्टिंग लाइन पर कदम रखते हैं, उनके जेहन में केवल एक ही विचार होता है — भारत के लिए पदक।
कॉमनवेल्थ गेम्स की सफलता और आत्मविश्वास
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गुलवीर ने पुरुषों की 5000 मीटर स्पर्धा में 13:24.95 का समय निकालकर कांस्य पदक और 10,000 मीटर स्पर्धा में 27:49.78 की टाइमिंग के साथ रजत पदक जीता। यह देश के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ऐतिहासिक रूप से पहला मौका था।
गुलवीर ने कहा, "निश्चित रूप से दबाव होगा क्योंकि एशियन गेम्स में उच्च स्तर के एथलीट हिस्सा लेते हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक ने मुझे बहुत आत्मविश्वास दिया। सरकार से लगातार सपोर्ट भी मिला है, जो बेहद अहम है।"
एशियन गेम्स में तीन स्पर्धाओं में उतरेंगे
10,000 मीटर और 5,000 मीटर के राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक गुलवीर आइची नागोया एशियन गेम्स 2026 में 1500 मीटर, 5000 मीटर और 10,000 मीटर — तीनों स्पर्धाओं में हिस्सा लेंगे। यह उनके लिए एक साथ कई मोर्चों पर अपनी क्षमता साबित करने का बड़ा अवसर होगा।
इंडियन आर्मी के इस डिस्टेंस रनर ने कहा, "जब आप स्टार्टिंग लाइन पर खड़े होते हैं, तो आपके दिमाग में बस एक ही ख्याल होता है — देश के लिए मेडल जीतना। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके बगल में कौन खड़ा है। हर कोई बराबर मेहनत करता है, और रेस के दिन, सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि किसका शरीर बेहतर तरीके से टिकता है। सभी प्रतियोगी पूरी तैयारी के साथ आएंगे, लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि मैं भारत के लिए पदक लाऊंगा।"
कोच स्कॉट सिमंस और अमेरिका में ट्रेनिंग
गुलवीर 2023 से कोच स्कॉट सिमंस के साथ अमेरिका में ट्रेनिंग कर रहे हैं। विदेश में ट्रेनिंग के फायदे के बारे में उन्होंने एलीट स्पैरिंग ग्रुप की अहमियत रेखांकित की, जो भारत में उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने बताया, "इंडिया में हमारे पास कोई एलीट डिस्टेंस ट्रेनिंग ग्रुप नहीं है, जिससे आपको अकेले ट्रेनिंग करनी पड़ती है। यूएस में कई टॉप एथलीट हैं जो एक दूसरे को पुश और सपोर्ट करते हैं।" गुलवीर ने यह भी जोड़ा कि उनके कोच अंतरराष्ट्रीय धावकों के गेम प्लान का विश्लेषण करके खास ट्रेनिंग सेशन डिज़ाइन करते हैं, जो उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करता है।
एशियन गेम्स से पहले की तैयारी
कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद टीम ने मुख्यतः एंड्योरेंस ट्रेनिंग पर ध्यान दिया, और अब एशियन गेम्स के करीब आने के साथ फोकस स्पीड बनाने पर आ गया है।
गुलवीर ने बताया, "कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद हमने एंड्योरेंस पर फोकस किया। अब एशियन गेम्स के लिए बहुत कम समय बचा है, इसलिए कोचिंग स्टाफ छोटे स्पीड सेशन पर ध्यान दे रहा है। मैं अपने कोच के तय किए गए रूटीन का सख्ती से पालन कर रहा हूं।"
गौरतलब है कि गुलवीर इस साल की शुरुआत में 60 मिनट से कम समय में हाफ मैराथन पूरी करने वाले पहले भारतीय धावक भी बने थे, जो उनकी असाधारण फिटनेस और फॉर्म का प्रमाण है। अब आइची नागोया में उनका प्रदर्शन भारतीय लॉन्ग डिस्टेंस रनिंग के भविष्य की दिशा तय करेगा।