गुलवीर सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीता सिल्वर, 10,000 मीटर में पोडियम पर पहुँचने वाले पहले भारतीय
सारांश
मुख्य बातें
भारत के स्टार लॉन्ग-डिस्टेंस रनर गुलवीर सिंह ने 29 जुलाई 2026 की देर रात ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पुरुषों की 10,000 मीटर स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। वे इस इवेंट में कॉमनवेल्थ मंच पर पोडियम तक पहुँचने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं।
मुख्य प्रदर्शन
गुलवीर सिंह ने 27:49.78 सेकंड के समय के साथ रेस पूरी की। उन्होंने अंतिम लैप में विस्फोटक 'किक' लगाते हुए प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ा और फिनिश लाइन पार की। यह प्रदर्शन उनकी रणनीतिक दौड़-शैली और उत्कृष्ट फिटनेस का प्रमाण है।
गुलवीर का प्रतिक्रिया
मेडल जीतने के बाद गुलवीर सिंह ने कहा, 'मेडल जीतने के बाद बहुत खुशी हो रही है। मेरे दिमाग में देश के लिए मेडल लाना था। कोच ने जो निर्देश दिए, मैंने उसका पालन किया।' उन्होंने अपने परिवार को भी याद किया — 'मेरे पिता एक किसान हैं। मेरे भाई नौकरीपेशा हैं। लोग जब पिता से मेरे बारे में पूछते हैं, तो उन्हें काफी खुशी होती है।'
सरकारी सहयोग पर उन्होंने कहा, 'भारत सरकार हमें काफी सपोर्ट कर रही है। साई से हमें भरपूर सहयोग मिल रहा है। हमें ट्रेनिंग के लिए विदेश भेजा जा रहा है। हमें सरकार और एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया से हर संभव मदद मिल रही है। सरकार ने एथलीट्स पर काफी खर्चा किया है।'
पृष्ठभूमि और करियर
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के सिरसा गाँव में जन्मे गुलवीर सिंह भारतीय सेना की ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में नायब सूबेदार के पद पर तैनात हैं। उन्होंने सेना में भर्ती की तैयारी के दौरान गाँव की सड़कों और खेतों के रास्तों पर दौड़ना शुरू किया था — एक साधारण शुरुआत जो आज अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँची।
गुलवीर के नाम 10,000 मीटर के अलावा 3,000 मीटर और 5,000 मीटर में भी राष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज हैं। उन्होंने 2023 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5,000 मीटर में ब्रॉन्ज मेडल से अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई, फिर 2022 एशियन गेम्स में 10,000 मीटर में ब्रॉन्ज जीता। 2025 में दक्षिण कोरिया के गुमी में आयोजित एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 5,000 मीटर और 10,000 मीटर — दोनों स्पर्धाओं में गोल्ड मेडल जीतकर खुद को एशिया के शीर्ष लॉन्ग-डिस्टेंस रनर के रूप में स्थापित किया।
आगे का लक्ष्य
गुलवीर ने स्पष्ट किया कि यह कॉमनवेल्थ सिल्वर उनकी यात्रा का अगला पड़ाव भर है। उन्होंने कहा, 'यह मेरा कॉमनवेल्थ में पहला मेडल है। अगला लक्ष्य एशियन गेम्स है।' यह बयान बताता है कि वे लंबी दौड़ के लिए तैयार हैं — ट्रैक पर भी और करियर में भी।