महरंग बलोच का बड़ा आरोप: बलूचिस्तान न्यायपालिका राज्य की 'सहयोगी', फैसले पहले से तय
सारांश
मुख्य बातें
मानवाधिकार कार्यकर्ता और बलूच यकजहती कमेटी (BYC) की मुख्य आयोजक महरंग बलोच ने 13 सितंबर 2026 को पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की न्यायपालिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह राज्य संस्थानों की सहयोगी बन चुकी है और न्याय के मूल सिद्धांतों को व्यवस्थित रूप से कमज़ोर किया जा रहा है। यह बयान क्वेटा की हुडा जेल से जारी किया गया, जिसे BYC ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर प्रसारित किया।
न्यायपालिका पर मुख्य आरोप
महरंग बलोच ने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान के मुख्य न्यायाधीश कामरान मुलाखाई व्यक्तिगत रूप से BYC से जुड़े समस्त मामलों की निगरानी कर रहे हैं। उनके अनुसार, न्यायमूर्ति मुहम्मद अली मुबीन और न्यायमूर्ति कादिर शाह बुखारी सहित अन्य न्यायाधीशों को कथित तौर पर राज्य के निर्देशों के अनुसार फैसले सुनाने का दायित्व सौंपा गया है।
उन्होंने कहा, "न्यायपालिका ने अपना प्रभाव और जनता का भरोसा पूरी तरह खो दिया है। उसकी निष्पक्षता और स्वतंत्रता अब समाप्त हो चुकी है।"
गुलजादी बलोच मामला: कथित न्यायिक कदाचार का उदाहरण
महरंग ने BYC नेता गुलजादी बलोच के मामले को कथित न्यायिक पक्षपात का ठोस उदाहरण बताया। उनके अनुसार संबंधित न्यायाधीश ने कई अवसरों पर स्वीकार किया कि वह दबाव में हैं और उन्हें सज़ा सुनाने के आदेश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि 7 सितंबर को अदालत में वकीलों की हड़ताल थी और बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनुपस्थित थे, इसके बावजूद कार्यवाही जारी रखी गई और एक गवाह से जिरह वकील की गैरमौजूदगी में करवाई गई। महरंग ने कहा कि यह बचाव के मौलिक अधिकार और निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांत का स्पष्ट उल्लंघन है।
जमानत अर्जियों में लगातार देरी का आरोप
महरंग बलोच ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले छह महीनों से उनकी जमानत अर्जियों पर सुनवाई करने के बजाय मुख्य न्यायाधीश मुलाखाई बार बार मामलों को सूची से हटाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि BYC ने 13 जून से 10 सितंबर के बीच कथित 'फेसलेस ट्रायल्स' के विरोध में 20 सुनवाइयों का बहिष्कार किया।
इसके अतिरिक्त, उनका आरोप है कि उनके मामलों में उनकी सहमति के बिना सरकारी वकील नियुक्त किए गए, जबकि BYC कार्यकर्ताओं को अपने बचाव के अधिकार से वंचित रखा गया। बलूचिस्तान उच्च न्यायालय में दायर याचिका को भी, उनके अनुसार, मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में लगातार टाला जाता रहा।
अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की माँग
महरंग बलोच ने पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से BYC मामलों में कथित न्यायिक पक्षपात, बचाव के अधिकार से वंचित किए जाने और न्याय में की जा रही देरी का तत्काल संज्ञान लेने की अपील की। उन्होंने पारदर्शी और निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने की भी माँग की।
यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में मानवाधिकार संगठन लंबे समय से लापता व्यक्तियों और न्यायेतर कार्रवाइयों को लेकर चिंता जता रहे हैं। गौरतलब है कि महरंग बलोच को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बलूच अधिकारों की आवाज़ के रूप में पहचाना जाता है और उनके बयान वैश्विक मानवाधिकार समुदाय में व्यापक ध्यान आकर्षित करते हैं। आने वाले दिनों में पाकिस्तानी सर्वोच्च न्यायालय और अंतरराष्ट्रीय निकायों की प्रतिक्रिया इस विवाद की दिशा तय करेगी।