13 सितंबर 2026
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महरंग बलोच का बड़ा आरोप: बलूचिस्तान न्यायपालिका राज्य की 'सहयोगी', फैसले पहले से तय

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महरंग बलोच का बड़ा आरोप: बलूचिस्तान न्यायपालिका राज्य की 'सहयोगी', फैसले पहले से तय

सारांश

क्वेटा की हुडा जेल से महरंग बलोच का बयान केवल एक विरोध नहीं — यह बलूचिस्तान की न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा प्रश्नचिह्न है। मुख्य न्यायाधीश पर राज्य निर्देशित फैसलों का आरोप और 20 सुनवाइयों का बहिष्कार दर्शाता है कि BYC कानूनी लड़ाई को अब व्यवस्था के विरुद्ध संघर्ष मान रही है।

मुख्य बातें

महरंग बलोच ने 13 सितंबर 2026 को क्वेटा की हुडा जेल से बलूचिस्तान न्यायपालिका पर कथित पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य न्यायाधीश कामरान मुलाखाई BYC मामलों में राज्य के निर्देशों पर फैसले सुनवा रहे हैं।
7 सितंबर को वकील की हड़ताल और अनुपस्थिति के बावजूद गुलजादी बलोच के मामले की कार्यवाही जारी रखी गई।
BYC ने 13 जून से 10 सितंबर के बीच कथित 'फेसलेस ट्रायल्स' के विरोध में 20 सुनवाइयों का बहिष्कार किया।
महरंग ने पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की।
पिछले छह महीनों से जमानत अर्जियों को कथित तौर पर सूची से हटाया जा रहा है।

मानवाधिकार कार्यकर्ता और बलूच यकजहती कमेटी (BYC) की मुख्य आयोजक महरंग बलोच ने 13 सितंबर 2026 को पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की न्यायपालिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह राज्य संस्थानों की सहयोगी बन चुकी है और न्याय के मूल सिद्धांतों को व्यवस्थित रूप से कमज़ोर किया जा रहा है। यह बयान क्वेटा की हुडा जेल से जारी किया गया, जिसे BYC ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर प्रसारित किया।

न्यायपालिका पर मुख्य आरोप

महरंग बलोच ने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान के मुख्य न्यायाधीश कामरान मुलाखाई व्यक्तिगत रूप से BYC से जुड़े समस्त मामलों की निगरानी कर रहे हैं। उनके अनुसार, न्यायमूर्ति मुहम्मद अली मुबीन और न्यायमूर्ति कादिर शाह बुखारी सहित अन्य न्यायाधीशों को कथित तौर पर राज्य के निर्देशों के अनुसार फैसले सुनाने का दायित्व सौंपा गया है।

उन्होंने कहा, "न्यायपालिका ने अपना प्रभाव और जनता का भरोसा पूरी तरह खो दिया है। उसकी निष्पक्षता और स्वतंत्रता अब समाप्त हो चुकी है।"

गुलजादी बलोच मामला: कथित न्यायिक कदाचार का उदाहरण

महरंग ने BYC नेता गुलजादी बलोच के मामले को कथित न्यायिक पक्षपात का ठोस उदाहरण बताया। उनके अनुसार संबंधित न्यायाधीश ने कई अवसरों पर स्वीकार किया कि वह दबाव में हैं और उन्हें सज़ा सुनाने के आदेश दिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि 7 सितंबर को अदालत में वकीलों की हड़ताल थी और बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनुपस्थित थे, इसके बावजूद कार्यवाही जारी रखी गई और एक गवाह से जिरह वकील की गैरमौजूदगी में करवाई गई। महरंग ने कहा कि यह बचाव के मौलिक अधिकार और निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांत का स्पष्ट उल्लंघन है।

जमानत अर्जियों में लगातार देरी का आरोप

महरंग बलोच ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले छह महीनों से उनकी जमानत अर्जियों पर सुनवाई करने के बजाय मुख्य न्यायाधीश मुलाखाई बार बार मामलों को सूची से हटाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि BYC ने 13 जून से 10 सितंबर के बीच कथित 'फेसलेस ट्रायल्स' के विरोध में 20 सुनवाइयों का बहिष्कार किया।

इसके अतिरिक्त, उनका आरोप है कि उनके मामलों में उनकी सहमति के बिना सरकारी वकील नियुक्त किए गए, जबकि BYC कार्यकर्ताओं को अपने बचाव के अधिकार से वंचित रखा गया। बलूचिस्तान उच्च न्यायालय में दायर याचिका को भी, उनके अनुसार, मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में लगातार टाला जाता रहा।

अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की माँग

महरंग बलोच ने पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से BYC मामलों में कथित न्यायिक पक्षपात, बचाव के अधिकार से वंचित किए जाने और न्याय में की जा रही देरी का तत्काल संज्ञान लेने की अपील की। उन्होंने पारदर्शी और निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने की भी माँग की।

यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में मानवाधिकार संगठन लंबे समय से लापता व्यक्तियों और न्यायेतर कार्रवाइयों को लेकर चिंता जता रहे हैं। गौरतलब है कि महरंग बलोच को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बलूच अधिकारों की आवाज़ के रूप में पहचाना जाता है और उनके बयान वैश्विक मानवाधिकार समुदाय में व्यापक ध्यान आकर्षित करते हैं। आने वाले दिनों में पाकिस्तानी सर्वोच्च न्यायालय और अंतरराष्ट्रीय निकायों की प्रतिक्रिया इस विवाद की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मुख्य न्यायाधीश का नाम लेकर राज्य निर्देशित फैसलों का आरोप लगाना इसे एक नए स्तर पर ले जाता है। जो बात मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर छूट जाती है, वह यह है कि बचाव पक्ष के वकील की अनुपस्थिति में सुनवाई जारी रखना और छह महीने तक जमानत अर्जियों को टालना — ये केवल प्रक्रियागत खामियाँ नहीं, बल्कि न्याय के मूलभूत अधिकारों का हनन है। पाकिस्तानी न्यायपालिका और सरकार दोनों की चुप्पी इन आरोपों को और अधिक गंभीर बनाती है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महरंग बलोच ने बलूचिस्तान न्यायपालिका पर क्या आरोप लगाए हैं?
महरंग बलोच ने आरोप लगाया है कि बलूचिस्तान की न्यायपालिका राज्य संस्थानों की सहयोगी बन चुकी है और मुख्य न्यायाधीश कामरान मुलाखाई BYC मामलों में राज्य के निर्देशों पर फैसले सुनवा रहे हैं। उनके अनुसार न्यायपालिका की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
गुलजादी बलोच मामले में क्या कथित अनियमितता हुई?
महरंग बलोच के अनुसार 7 सितंबर को अदालत में वकीलों की हड़ताल थी और बचाव पक्ष का अधिवक्ता अनुपस्थित था, फिर भी गुलजादी बलोच के मामले की कार्यवाही जारी रखी गई और एक गवाह से जिरह वकील की गैरमौजूदगी में करवाई गई। महरंग ने इसे निष्पक्ष सुनवाई के मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताया है।
BYC ने कितनी सुनवाइयों का बहिष्कार किया और क्यों?
बलूच यकजहती कमेटी (BYC) ने 13 जून से 10 सितंबर 2026 के बीच कथित 'फेसलेस ट्रायल्स' के विरोध में 20 सुनवाइयों का बहिष्कार किया। BYC का कहना है कि बचाव के मौलिक अधिकार की रक्षा किए बिना चल रही कार्यवाही न्यायसंगत नहीं है।
महरंग बलोच ने किससे हस्तक्षेप की माँग की है?
महरंग बलोच ने पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से BYC मामलों में कथित न्यायिक पक्षपात, बचाव के अधिकार से वंचित किए जाने और न्याय में देरी का तत्काल संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने पारदर्शी और निष्पक्ष जाँच की माँग भी की है।
महरंग बलोच कौन हैं और यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
महरंग बलोच बलूच यकजहती कमेटी (BYC) की मुख्य आयोजक और著名 मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बलूच अधिकारों की प्रमुख आवाज़ माना जाता है। वह वर्तमान में क्वेटा की हुडा जेल में बंद हैं और उनके आरोप बलूचिस्तान में न्यायिक स्वतंत्रता तथा मानवाधिकारों की स्थिति पर वैश्विक ध्यान खींचते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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