महरंग बलोच को आजीवन कारावास: पाकिस्तानी अदालत के फैसले पर मानवाधिकार संगठनों का 'न्यायिक आतंकवाद' का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान की एक आतंकवाद-रोधी अदालत ने 23 जून 2026 को जानी-मानी बलूच कार्यकर्ता महरंग बलोच सहित चार बलोच कार्यकर्ताओं को फ्रंटियर कॉर्प्स के एक अधिकारी की हत्या से जुड़े मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। क्वेटा स्थित इस अदालत के फैसले को देश-विदेश के मानवाधिकार संगठनों ने 'न्यायिक आतंकवाद' और 'न्याय का हनन' करार देते हुए तीखी आलोचना की है।
मुख्य घटनाक्रम
सोमवार को सुनाए गए इस फैसले में महरंग बलोच के साथ तीन अन्य बलूच कार्यकर्ताओं को भी उम्र कैद की सजा दी गई। महरंग बलोच बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगियों और राज्य-प्रायोजित दमन के खिलाफ आवाज उठाने वाली एक प्रमुख कार्यकर्ता रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में नागरिक स्वतंत्रताओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव पहले से बढ़ा हुआ है।
संगठनों की प्रतिक्रिया
बलोच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने पाकिस्तान को 'आतंकवादी देश' बताते हुए आरोप लगाया कि इस्लामाबाद अपनी सत्ता और संस्थाओं का दुरुपयोग कर बलूचिस्तान में भय और दहशत फैला रहा है। बीएनएम ने एक्स पर लिखा, 'हम इस फैसले को अस्वीकार करते हैं। पाकिस्तान का यह न्यायिक आतंकवाद बलोच राष्ट्रीय आंदोलन को नहीं रोक सकता और न ही प्रतिरोध की राजनीति का मार्ग अवरुद्ध कर सकता है।'
ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (एचआरसीबी) ने इस फैसले को 'न्याय का हनन' बताया और कहा कि इसका उद्देश्य शांतिपूर्ण मानवाधिकार गतिविधियों को अपराध घोषित करना तथा सत्ता-प्रायोजित उल्लंघनों के खिलाफ बोलने वालों को चुप कराना है। एचआरसीबी के अनुसार, नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय वाचा (आईसीसीपीआर) के तहत पाकिस्तान पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संगठन बनाने की स्वतंत्रता और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार की रक्षा का दायित्व है, जिन्हें इस फैसले से गंभीर क्षति पहुंची है।
ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (एचआरसीपी) ने भी फैसले की आलोचना करते हुए आतंकवाद-रोधी अदालत के निर्णय की शीघ्र समीक्षा और बलूचिस्तान में राजनीतिक संवाद शुरू करने की मांग की। एचआरसीपी ने एक्स पर लिखा, 'दुर्भाग्यपूर्ण रूप से, राज्य ने मौलिक अधिकारों की वकालत को भी उसी नजरिए से देखना जारी रखा है, जिससे वह उग्रवाद का सामना करता है।'
महिला संगठन और सिंधी नेताओं की आवाज़
बलोच वूमेन फोरम (बीडब्ल्यूएफ) की केंद्रीय संयोजक शाली बलोच ने अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय कानूनी समुदाय तथा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से इस कथित 'न्यायिक और सरकारी दमन' के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'आज बलोच राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ आए अदालती फैसलों ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि देश की न्यायिक व्यवस्था पारदर्शिता और अहिंसा में विश्वास रखने वाले बलोच राजनीतिक कार्यकर्ताओं के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रही है।'
जेय सिंध मुत्ताहिदा महाज (जेएसएमएम) के अध्यक्ष शफी बुरफत ने इस फैसले को पाकिस्तान के कथित रूप से 'पीड़ित क्षेत्रों' के राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ 'मनोवैज्ञानिक हथकंडा' और 'सत्ता-प्रेरित नियंत्रण का उपकरण' बताया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से पाकिस्तान में जबरन गुमशुदगियों, राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित सजाओं और असहमति को अपराध घोषित करने वाली नीतियों का संज्ञान लेने की अपील की।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब बलूचिस्तान में कार्यकर्ताओं को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत सजा सुनाई गई हो। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के फैसले बलूचिस्तान में नागरिक समाज की जगह को और संकुचित करते हैं। मानवाधिकार संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दबाव बनाने की मांग की है, और इस मामले में उच्च न्यायालय में अपील की संभावना बताई जा रही है।