10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महरंग बलोच को आजीवन कारावास: पाकिस्तानी अदालत के फैसले पर मानवाधिकार संगठनों का 'न्यायिक आतंकवाद' का आरोप

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महरंग बलोच को आजीवन कारावास: पाकिस्तानी अदालत के फैसले पर मानवाधिकार संगठनों का 'न्यायिक आतंकवाद' का आरोप

सारांश

पाकिस्तान की आतंकवाद-रोधी अदालत ने बलूच कार्यकर्ता महरंग बलोच सहित चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। बीएनएम, एचआरसीबी और एचआरसीपी ने इसे 'न्यायिक आतंकवाद' बताते हुए अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग की है।

मुख्य बातें

पाकिस्तान की आतंकवाद-रोधी अदालत ने 23 जून 2026 को महरंग बलोच सहित चार बलूच कार्यकर्ताओं को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
सजा फ्रंटियर कॉर्प्स के एक अधिकारी की हत्या से जुड़े मामले में दी गई है।
बलोच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने पाकिस्तान को 'आतंकवादी देश' बताते हुए फैसले को अस्वीकार किया।
ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (एचआरसीपी) ने आतंकवाद-रोधी अदालत के फैसले की शीघ्र समीक्षा और बलूचिस्तान में राजनीतिक संवाद की मांग की।
जेएसएमएम अध्यक्ष शफी बुरफत ने संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से हस्तक्षेप की अपील की।

पाकिस्तान की एक आतंकवाद-रोधी अदालत ने 23 जून 2026 को जानी-मानी बलूच कार्यकर्ता महरंग बलोच सहित चार बलोच कार्यकर्ताओं को फ्रंटियर कॉर्प्स के एक अधिकारी की हत्या से जुड़े मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। क्वेटा स्थित इस अदालत के फैसले को देश-विदेश के मानवाधिकार संगठनों ने 'न्यायिक आतंकवाद' और 'न्याय का हनन' करार देते हुए तीखी आलोचना की है।

मुख्य घटनाक्रम

सोमवार को सुनाए गए इस फैसले में महरंग बलोच के साथ तीन अन्य बलूच कार्यकर्ताओं को भी उम्र कैद की सजा दी गई। महरंग बलोच बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगियों और राज्य-प्रायोजित दमन के खिलाफ आवाज उठाने वाली एक प्रमुख कार्यकर्ता रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में नागरिक स्वतंत्रताओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव पहले से बढ़ा हुआ है।

संगठनों की प्रतिक्रिया

बलोच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) ने पाकिस्तान को 'आतंकवादी देश' बताते हुए आरोप लगाया कि इस्लामाबाद अपनी सत्ता और संस्थाओं का दुरुपयोग कर बलूचिस्तान में भय और दहशत फैला रहा है। बीएनएम ने एक्स पर लिखा, 'हम इस फैसले को अस्वीकार करते हैं। पाकिस्तान का यह न्यायिक आतंकवाद बलोच राष्ट्रीय आंदोलन को नहीं रोक सकता और न ही प्रतिरोध की राजनीति का मार्ग अवरुद्ध कर सकता है।'

ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (एचआरसीबी) ने इस फैसले को 'न्याय का हनन' बताया और कहा कि इसका उद्देश्य शांतिपूर्ण मानवाधिकार गतिविधियों को अपराध घोषित करना तथा सत्ता-प्रायोजित उल्लंघनों के खिलाफ बोलने वालों को चुप कराना है। एचआरसीबी के अनुसार, नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय वाचा (आईसीसीपीआर) के तहत पाकिस्तान पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संगठन बनाने की स्वतंत्रता और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार की रक्षा का दायित्व है, जिन्हें इस फैसले से गंभीर क्षति पहुंची है।

ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (एचआरसीपी) ने भी फैसले की आलोचना करते हुए आतंकवाद-रोधी अदालत के निर्णय की शीघ्र समीक्षा और बलूचिस्तान में राजनीतिक संवाद शुरू करने की मांग की। एचआरसीपी ने एक्स पर लिखा, 'दुर्भाग्यपूर्ण रूप से, राज्य ने मौलिक अधिकारों की वकालत को भी उसी नजरिए से देखना जारी रखा है, जिससे वह उग्रवाद का सामना करता है।'

महिला संगठन और सिंधी नेताओं की आवाज़

बलोच वूमेन फोरम (बीडब्ल्यूएफ) की केंद्रीय संयोजक शाली बलोच ने अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय कानूनी समुदाय तथा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से इस कथित 'न्यायिक और सरकारी दमन' के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'आज बलोच राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ आए अदालती फैसलों ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि देश की न्यायिक व्यवस्था पारदर्शिता और अहिंसा में विश्वास रखने वाले बलोच राजनीतिक कार्यकर्ताओं के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रही है।'

जेय सिंध मुत्ताहिदा महाज (जेएसएमएम) के अध्यक्ष शफी बुरफत ने इस फैसले को पाकिस्तान के कथित रूप से 'पीड़ित क्षेत्रों' के राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ 'मनोवैज्ञानिक हथकंडा' और 'सत्ता-प्रेरित नियंत्रण का उपकरण' बताया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से पाकिस्तान में जबरन गुमशुदगियों, राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित सजाओं और असहमति को अपराध घोषित करने वाली नीतियों का संज्ञान लेने की अपील की।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब बलूचिस्तान में कार्यकर्ताओं को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत सजा सुनाई गई हो। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के फैसले बलूचिस्तान में नागरिक समाज की जगह को और संकुचित करते हैं। मानवाधिकार संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दबाव बनाने की मांग की है, और इस मामले में उच्च न्यायालय में अपील की संभावना बताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह यह है कि एचआरसीपी जैसे पाकिस्तान के अपने स्थापित मानवाधिकार निकाय भी फैसले की आलोचना में शामिल हैं — यह संकेत देता है कि आंतरिक असहमति की आवाज़ें भी दब नहीं रही हैं। आईसीसीपीआर के तहत पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं और ज़मीनी हकीकत के बीच की खाई अब नज़रअंदाज़ करना मुश्किल होता जा रहा है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महरंग बलोच को किस मामले में सजा सुनाई गई है?
पाकिस्तान की आतंकवाद-रोधी अदालत ने महरंग बलोच सहित चार बलूच कार्यकर्ताओं को फ्रंटियर कॉर्प्स के एक अधिकारी की हत्या से जुड़े मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला 23 जून 2026 को क्वेटा में सुनाया गया।
मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले को 'न्यायिक आतंकवाद' क्यों कहा?
बीएनएम, एचआरसीबी और एचआरसीपी सहित कई संगठनों का कहना है कि यह फैसला शांतिपूर्ण मानवाधिकार गतिविधियों को अपराध घोषित करने और असहमति की आवाज़ों को दबाने के लिए न्यायिक तंत्र के दुरुपयोग का उदाहरण है। आलोचकों के अनुसार, इससे आईसीसीपीआर के तहत पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन होता है।
ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (एचआरसीपी) ने क्या मांग की है?
एचआरसीपी ने आतंकवाद-रोधी अदालत के फैसले की शीघ्र समीक्षा और बलूचिस्तान में राजनीतिक संवाद शुरू करने की मांग की है। संगठन ने कहा कि राज्य मौलिक अधिकारों की वकालत को उग्रवाद की तरह देखता रहा है, जिसके परिणामस्वरूप असंतुलित और पूर्वाग्रहपूर्ण फैसले सामने आ रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्या अपील की गई है?
जेएसएमएम अध्यक्ष शफी बुरफत ने संयुक्त राष्ट्र, वैश्विक मानवाधिकार संगठनों और लोकतांत्रिक संस्थाओं से पाकिस्तान में जबरन गुमशुदगियों, राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित सजाओं और असहमति को अपराध घोषित करने वाली नीतियों का संज्ञान लेने की अपील की है।
महरंग बलोच कौन हैं और वे क्यों चर्चा में हैं?
महरंग बलोच बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगियों और राज्य-प्रायोजित दमन के खिलाफ आवाज उठाने वाली एक प्रमुख बलूच कार्यकर्ता हैं। उनकी गिरफ्तारी और अब आजीवन कारावास की सजा ने बलूचिस्तान में नागरिक स्वतंत्रताओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताओं को और गहरा कर दिया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले