24 सितंबर 2026
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मदुरंतकम-धारापुरम उपचुनाव पर रोक की मांग: मद्रास हाईकोर्ट 24 सितंबर को सुनाएगा फैसला

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मदुरंतकम-धारापुरम उपचुनाव पर रोक की मांग: मद्रास हाईकोर्ट 24 सितंबर को सुनाएगा फैसला

सारांश

मद्रास हाईकोर्ट 24 सितंबर को एक ऐसी PIL पर फैसला सुनाएगा जो तमिलनाडु की राजनीतिक दलबदल संस्कृति पर सीधा प्रहार है — पूर्व AIADMK विधायकों के TVK में शामिल होकर उपचुनाव लड़ने के फैसले को चुनौती देते हुए, सरकारी खजाने पर पड़े बोझ की भरपाई माँगी गई है।

मुख्य बातें

मद्रास हाईकोर्ट 24 सितंबर 2026 को मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनाव रोकने की PIL पर फैसला सुनाएगा।
याचिका चेन्नई के अधिवक्ता के.
सुथन ने दायर की है, जो राजनीतिक कारणों से इस्तीफा देकर उपचुनाव लड़ने वाले MLA से चुनाव खर्च वसूलने की व्यवस्था माँगती है।
पूर्व AIADMK विधायक के.
मरगथम कुमारवेल और पी.
सत्यभामा इस्तीफे के बाद TVK में शामिल होकर क्रमशः मदुरंतकम और धारापुरम से उपचुनाव लड़ रहे हैं।
याचिका में उपचुनाव नामांकन के समय पूर्व विधायकों से 'चुनाव खर्च सिक्योरिटी डिपॉजिट' लेने की माँग की गई है।
फिलहाल ऐसे इस्तीफों पर चुनाव खर्च वसूलने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है; अदालत का फैसला एक नई न्यायिक नजीर बन सकता है।

मद्रास हाईकोर्ट 24 सितंबर 2026 को उस जनहित याचिका (PIL) पर अपना फैसला सुनाएगा, जिसमें तमिलनाडु की मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर प्रस्तावित उपचुनाव रोकने की मांग की गई है। यह याचिका चेन्नई के सैदापेट निवासी अधिवक्ता के. सुथन द्वारा दायर की गई है, जो चुनाव जीतने के बाद राजनीतिक कारणों से इस्तीफा देने वाले विधायकों से चुनाव खर्च वसूलने की कानूनी व्यवस्था बनाने की माँग करती है।

मामले की पृष्ठभूमि

इस याचिका का केंद्र पूर्व अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) विधायक के. मरगथम कुमारवेल और पी. सत्यभामा से संबंधित घटनाक्रम है। दोनों विधायकों ने अपने-अपने पद से इस्तीफा देने के बाद सत्तारूढ़ तमिलनाडु वेट्री कषगम (TVK) में शामिल होने का फैसला किया। अब वे क्रमशः मदुरंतकम और धारापुरम सीटों से TVK के उम्मीदवार के रूप में उपचुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु की राजनीति में दलबदल की प्रवृत्ति और उससे जुड़ी चुनावी लागत पर सार्वजनिक बहस तेज हो रही है।

याचिका में क्या मांग की गई है

याचिकाकर्ता अधिवक्ता के. सुथन ने अदालत से चुनाव आयोग (ECI) को यह निर्देश देने की माँग की है कि वह एक ऐसी उचित प्रक्रिया विकसित करे, जिसके तहत राजनीतिक कारणों से इस्तीफा देकर उपचुनाव लड़ने वाले पूर्व विधायकों से चुनाव पर हुए सरकारी खर्च की भरपाई कराई जा सके। याचिका में यह भी सुझाव दिया गया कि जब ऐसे पूर्व विधायक उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करें, तब उनसे 'चुनाव खर्च सिक्योरिटी डिपॉजिट' लेने की व्यवस्था होनी चाहिए।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि ऐसे इस्तीफों के कारण दोबारा चुनाव कराने की आवश्यकता पड़ती है, जिससे सरकारी खजाने पर अनावश्यक अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इसके साथ ही, मामले का अंतिम निपटारा होने तक मदुरंतकम और धारापुरम में उपचुनाव रोकने की माँग भी की गई है।

कानूनी शून्यता और अदालत का रुख

याचिका में यह स्वीकार किया गया है कि फिलहाल विधायकों से इस तरह चुनाव खर्च वसूलने के लिए कोई स्पष्ट कानूनी प्रावधान मौजूद नहीं है। इसीलिए याचिकाकर्ता ने अदालत से उचित निर्देश जारी करने की अपील की है। यह भी तर्क दिया गया कि यदि इस संबंध में कोई ठोस कानूनी बदलाव नहीं हुआ, तो भविष्य में ऐसी परिस्थितियाँ बार-बार उत्पन्न हो सकती हैं।

पिछली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब 24 सितंबर 2026 को इस मामले में निर्णय आने की उम्मीद है।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

यह मामला एक व्यापक राजनीतिक प्रश्न की ओर ध्यान दिलाता है — क्या चुनाव जीतने के तुरंत बाद दलबदल कर पुनः चुनाव लड़ना लोकतांत्रिक प्रक्रिया और सार्वजनिक धन का दुरुपयोग है? आलोचकों का कहना है कि मौजूदा कानूनी ढाँचे में ऐसे 'राजनीतिक इस्तीफों' को रोकने या उनसे जवाबदेही माँगने का कोई प्रावधान नहीं है। मद्रास हाईकोर्ट का फैसला इस मसले पर एक महत्वपूर्ण न्यायिक दृष्टिकोण स्थापित कर सकता है।

आगे क्या होगा

24 सितंबर 2026 को मद्रास हाईकोर्ट के फैसले से यह स्पष्ट होगा कि मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनाव निर्धारित समय पर होंगे या नहीं। यदि अदालत याचिका स्वीकार करती है, तो चुनाव आयोग को नई व्यवस्था बनाने तक चुनाव टालने का निर्देश मिल सकता है, जिसका असर तमिलनाडु की राजनीति पर दूरगामी होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

स्वैच्छिक इस्तीफे पर नहीं — यही वह कानूनी छेद है जिसका राजनेता बार-बार फायदा उठाते हैं। मद्रास हाईकोर्ट का फैसला चाहे जो भी हो, असली सुधार संसद की मेज पर होना चाहिए, अदालत के आदेश पर नहीं — और यही वह काम है जो विधायिका दशकों से टालती आई है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मदुरंतकम-धारापुरम उपचुनाव पर दायर जनहित याचिका क्या है?
यह PIL चेन्नई के अधिवक्ता के. सुथन ने मद्रास हाईकोर्ट में दायर की है, जिसमें मदुरंतकम और धारापुरम सीटों पर उपचुनाव रोकने और राजनीतिक कारणों से इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने वाले विधायकों से सरकारी चुनाव खर्च वसूलने की व्यवस्था बनाने की माँग है।
मद्रास हाईकोर्ट इस मामले में कब फैसला सुनाएगा?
मद्रास हाईकोर्ट 24 सितंबर 2026 को इस मामले में अपना फैसला सुनाएगा। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने पिछली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था।
पूर्व AIADMK विधायक के. मरगथम कुमारवेल और पी. सत्यभामा ने इस्तीफा क्यों दिया?
दोनों विधायकों ने AIADMK से इस्तीफा देकर सत्तारूढ़ TVK में शामिल होने का फैसला किया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह इस्तीफा राजनीतिक कारणों से दिया गया, जिससे उपचुनाव की जरूरत पड़ी और सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।
चुनाव खर्च सिक्योरिटी डिपॉजिट की माँग क्या है?
याचिकाकर्ता ने माँग की है कि जब कोई पूर्व विधायक — जिसने राजनीतिक कारणों से इस्तीफा दिया हो — उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करे, तो उससे 'चुनाव खर्च सिक्योरिटी डिपॉजिट' लिया जाए ताकि दोबारा चुनाव की लागत की भरपाई हो सके।
क्या अभी ऐसे इस्तीफों पर चुनाव खर्च वसूलने का कोई कानून है?
नहीं, फिलहाल ऐसा कोई कानूनी प्रावधान मौजूद नहीं है। याचिकाकर्ता ने इसी कानूनी शून्यता का हवाला देते हुए अदालत से उचित निर्देश जारी करने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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