मदुरंतकम-धरपुरम उपचुनाव पर रोक की मांग, 16 सितंबर को मद्रास हाईकोर्ट में सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मदुरंतकम और धरपुरम विधानसभा क्षेत्रों में 6 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित उपचुनाव पर रोक लगाने की मांग को लेकर मद्रास उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिस पर 16 सितंबर 2026 को सुनवाई निर्धारित है। चेन्नई के सैदापेट निवासी अधिवक्ता सुधन द्वारा दायर इस याचिका में भारत निर्वाचन आयोग से उपचुनाव की प्रक्रिया और राजनीतिक कारणों से इस्तीफा देने वाले विधायकों की जवाबदेही तय करने की माँग की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
अप्रैल 2026 में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में मदुरंतकम, धरपुरम, अम्बासमुद्रम, पेरुंदुरई, करूर और विरालीमलाई विधानसभा क्षेत्रों से निर्वाचित छह विधायकों ने चुनाव परिणामों के तुरंत बाद अपने पदों से इस्तीफा दे दिया और सत्तारूढ़ दल में शामिल हो गए। इन इस्तीफों के बाद इन सभी क्षेत्रों में उपचुनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।
गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने पहले ही अम्बासमुद्रम, पेरुंदुरई, करूर, विरालीमलाई और तिरुचिरापल्ली पूर्व विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव की घोषणा पर रोक लगा दी है, क्योंकि वहाँ चुनाव याचिकाएँ लंबित हैं।
मदुरंतकम और धरपुरम में उपचुनाव क्यों हो रहे हैं
भारत निर्वाचन आयोग ने घोषणा की है कि मदुरंतकम और धरपुरम में 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव होंगे, क्योंकि इन दोनों क्षेत्रों में कोई चुनाव याचिका लंबित नहीं है। इन क्षेत्रों में तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) ने पूर्व विधायकों मरगथम कुमारवेल और सत्यबामा को अपने उम्मीदवार के रूप में घोषित किया है।
जनहित याचिका में क्या मांगें हैं
याचिकाकर्ता अधिवक्ता सुधन ने निर्वाचन आयोग को निर्देश देने की माँग की है कि वह एक ऐसी प्रक्रिया बनाए, जिसके तहत राजनीतिक कारणों से चुनाव परिणाम के तुरंत बाद इस्तीफा देने वाले विधायकों को उपचुनाव में नामांकन दाखिल करते समय निर्धारित चुनाव खर्च की राशि जमा करनी हो।
याचिका में यह भी माँग की गई है कि चुनाव आयोग TVK उम्मीदवारों मरगथम कुमारवेल और सत्यबामा का नामांकन पत्र तब तक स्वीकार न करे, जब तक इस मामले का निपटारा न हो जाए। साथ ही, चुनाव आयोग से तिरुचिरापल्ली पूर्व, करूर, विरालीमलाई, पेरुंदुरई, अम्बासमुद्रम, मदुरंतकम और धरपुरम सहित सभी प्रभावित क्षेत्रों में उपचुनाव पर होने वाले खर्च का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश माँगा गया है।
विधायी सुधार की माँग
याचिका में एक दूरगामी प्रस्ताव भी रखा गया है — सरकार से आग्रह किया गया है कि ऐसे कानून बनाने पर विचार किया जाए, जिससे चुनाव जीतने के तुरंत बाद राजनीतिक कारणों से इस्तीफा देने वाले विधायकों को एक निश्चित अवधि के लिए चुनाव लड़ने से वंचित किया जा सके। याचिकाकर्ता का तर्क है कि ऐसे इस्तीफे जनता के जनादेश की अवहेलना करते हैं और करदाताओं के पैसे पर अनावश्यक बोझ डालते हैं।
अदालत में अगली सुनवाई
यह मामला न्यायमूर्ति एस.एन. सुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति कृष्णस्वामी गोविंदराजन की खंडपीठ के समक्ष 16 सितंबर 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है और इसे 12वें मामले के रूप में सूचीपत्र में स्थान दिया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में उपचुनाव की राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है और TVK सहित अन्य दल अपनी स्थिति मज़बूत करने में लगे हैं। अदालत का निर्णय न केवल इन दो क्षेत्रों, बल्कि राज्य की उपचुनाव प्रक्रियाओं के व्यापक स्वरूप को प्रभावित कर सकता है।