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तमिलनाडु स्पीकर ने पलानीस्वामी व 4 पूर्व एआईएडीएमके विधायकों को 30 जुलाई को तलब किया

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तमिलनाडु स्पीकर ने पलानीस्वामी व 4 पूर्व एआईएडीएमके विधायकों को 30 जुलाई को तलब किया

सारांश

तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष ने 30 जुलाई को पलानीस्वामी समेत चार पूर्व एआईएडीएमके विधायकों को दलबदल मामले में तलब किया है। विश्वास मत में व्हिप उल्लंघन के बाद शुरू हुई यह कार्यवाही अब निर्णायक मोड़ पर है, जिसके नतीजे विपक्ष और सत्तारूढ़ टीवीके दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।

मुख्य बातें

तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने 30 जुलाई को पलानीस्वामी व 4 पूर्व एआईएडीएमके विधायकों को तलब किया।
चारों पूर्व विधायक — मरगथम कुमारवेल, पी.
जयकुमार, एसाक्की सुबाया — संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता का सामना कर रहे हैं।
एआईएडीएमके के 25 विधायकों ने टीवीके सरकार के विश्वास मत में पार्टी व्हिप तोड़कर समर्थन में मतदान किया था।
पलानीस्वामी ने 21 विधायकों को माफ किया; शेष 4 ने इस्तीफा देकर टीवीके में शामिल होने के बाद अयोग्यता कार्यवाही का सामना किया।
प्रत्येक पूर्व विधायक को सुनवाई में 30 मिनट का समय दिया गया है; सुनवाई सुबह 11 बजे से दोपहर 12:30 बजे के बीच होगी।

तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने दलबदल विरोधी कार्यवाही में अहम कदम उठाते हुए एआईएडीएमके के महासचिव एवं विपक्ष के नेता एडप्पाडी के. पलानीस्वामी और संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता का सामना कर रहे चार पूर्व विधायकों को 30 जुलाई को अपने समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है। 26 जुलाई को जारी विधानसभा सचिवालय की विज्ञप्ति के अनुसार, यह सुनवाई दलबदल मामले में अतिरिक्त स्पष्टीकरण हासिल करने के उद्देश्य से बुलाई गई है।

किन्हें तलब किया गया और कब

अध्यक्ष ने पूर्व एआईएडीएमके विधायक मरगथम कुमारवेल (मदुरंथगम), पी. सत्यबामा (धरपुरम), एस. जयकुमार (पेरुंदुरई) और एसाक्की सुबाया (अंबासमुद्रम) को सुबह 11 बजे से दोपहर 12:30 बजे के बीच व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। प्रत्येक विधायक को सुनवाई के लिए 30 मिनट का समय आवंटित किया गया है।

पलानीस्वामी को भी इसी कार्यवाही के दौरान उपस्थित रहने को कहा गया है ताकि वे अपनी 13 मई को दायर अयोग्यता याचिका पर अतिरिक्त स्पष्टीकरण दे सकें।

मुख्य घटनाक्रम: कैसे शुरू हुआ यह विवाद

यह पूरा मामला सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार के गठन के बाद हुए विश्वास मत से जुड़ा है। उस मतदान के दौरान एआईएडीएमके के 25 विधायकों ने पार्टी नेतृत्व द्वारा जारी व्हिप का उल्लंघन करते हुए नई सरकार के समर्थन में वोट डाला।

इसके बाद पलानीस्वामी ने 25 में से 21 विधायकों को माफ कर दिया। परंतु शेष चार सदस्यों—मरगथम कुमारवेल, पी. सत्यबामा, एस. जयकुमार और एसाक्की सुबाया—ने विधानसभा से इस्तीफा देकर सत्तारूढ़ टीवीके में शामिल होने का निर्णय लिया। इस कदम के बाद पार्टी नेतृत्व ने दलबदल विरोधी कानून के तहत उनके विरुद्ध अयोग्यता की कार्यवाही जारी रखी।

सुनवाई का अब तक का सफर

जाँच के क्रम में ये चारों पूर्व विधायक पहले भी दो अलग-अलग अवसरों पर अध्यक्ष के समक्ष पेश हो चुके हैं। उन सुनवाइयों में उन्होंने व्हिप के विरुद्ध मतदान के अपने निर्णय के संबंध में मौखिक और लिखित दोनों रूपों में स्पष्टीकरण प्रस्तुत किए।

उन स्पष्टीकरणों से उभरे बिंदुओं के आधार पर अध्यक्ष ने पलानीस्वामी से भी अतिरिक्त जवाब माँगा, जिसके बाद एआईएडीएमके प्रतिनिधियों ने पार्टी नेता का लिखित जवाब विधानसभा सचिवालय में दाखिल किया।

राजनीतिक और कानूनी निहितार्थ

गौरतलब है कि इस जाँच के नतीजे केवल चार विधायकों तक सीमित नहीं रहेंगे — इसके एआईएडीएमके और सत्तारूढ़ टीवीके दोनों के लिए दूरगामी राजनीतिक और कानूनी परिणाम हो सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में विपक्ष पहले से ही संगठनात्मक दबाव में है।

सुनवाई के इस नवीनतम दौर में अध्यक्ष द्वारा दोनों पक्षों के स्पष्टीकरणों की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई तय किए जाने की संभावना है। 30 जुलाई की यह सुनवाई तय करेगी कि दलबदल विरोधी प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि व्हिप उल्लंघन पर कार्रवाई राजनीतिक सुविधा से संचालित है या संवैधानिक सिद्धांत से। अध्यक्ष का निर्णय एक मिसाल बनेगा — खासकर तब जब बागी विधायक पहले ही सत्तारूढ़ दल में शामिल हो चुके हों और विधानसभा से इस्तीफा दे चुके हों। मुख्यधारा की कवरेज प्रक्रियागत पहलुओं पर केंद्रित है, जबकि असली प्रश्न यह है कि क्या दसवीं अनुसूची उन सदस्यों पर लागू होती है जो पहले ही सदन छोड़ चुके हों।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु स्पीकर ने पलानीस्वामी को 30 जुलाई को क्यों तलब किया?
विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने पलानीस्वामी को दलबदल विरोधी कार्यवाही में उनकी याचिका पर अतिरिक्त स्पष्टीकरण देने के लिए 30 जुलाई को बुलाया है। यह सुनवाई चार पूर्व एआईएडीएमके विधायकों द्वारा दिए गए स्पष्टीकरणों से उभरे मुद्दों के आधार पर बुलाई गई है।
एआईएडीएमके के किन चार पूर्व विधायकों पर अयोग्यता की कार्यवाही चल रही है?
मरगथम कुमारवेल (मदुरंथगम), पी. सत्यबामा (धरपुरम), एस. जयकुमार (पेरुंदुरई) और एसाक्की सुबाया (अंबासमुद्रम) — ये चारों संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता का सामना कर रहे हैं। इन्होंने टीवीके सरकार के विश्वास मत में पार्टी व्हिप तोड़कर मतदान किया था और बाद में विधानसभा से इस्तीफा देकर टीवीके में शामिल हो गए।
दलबदल विरोधी कार्यवाही की शुरुआत कब और कैसे हुई?
पलानीस्वामी ने 13 मई को अयोग्यता याचिका दायर की थी, जो टीवीके सरकार के गठन के बाद हुए विश्वास मत के तुरंत बाद की गई। उस मतदान में एआईएडीएमके के 25 विधायकों ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन कर नई सरकार के पक्ष में वोट दिया था।
पलानीस्वामी ने 25 में से केवल 4 विधायकों के खिलाफ कार्यवाही क्यों जारी रखी?
पलानीस्वामी ने व्हिप उल्लंघन करने वाले 25 में से 21 विधायकों को माफ कर दिया। शेष चार ने विधानसभा से इस्तीफा देकर सत्तारूढ़ टीवीके में शामिल होने का निर्णय लिया, जिसके बाद पार्टी नेतृत्व ने उनके विरुद्ध दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्यवाही जारी रखी।
इस कार्यवाही के क्या राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं?
अध्यक्ष का निर्णय एआईएडीएमके और टीवीके दोनों के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक और कानूनी मिसाल बनेगा। यदि अयोग्यता घोषित होती है तो यह दलबदल विरोधी कानून की व्याख्या पर एक नई नजीर स्थापित करेगा, विशेषकर उन सदस्यों के मामले में जो पहले ही सदन से इस्तीफा दे चुके हों।
राष्ट्र प्रेस
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