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एआईएडीएमके विलय पर तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष आज करेंगे फैसला, 14 बागी विधायकों ने ईपीएस से की मुलाकात

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एआईएडीएमके विलय पर तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष आज करेंगे फैसला, 14 बागी विधायकों ने ईपीएस से की मुलाकात

सारांश

एआईएडीएमके के दोनों गुटों ने अयोग्यता याचिकाएँ वापस लेकर संयुक्त ज्ञापन सौंपा — विलय लगभग तय दिख रहा है। लेकिन वरिष्ठ नेता सी.वी. शनमुगम की अनुपस्थिति इस पुनर्मिलन में एक अनसुलझा सवाल छोड़ती है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी.
प्रभाकर 29 मई 2025 को एआईएडीएमके के दोनों गुटों के विलय पर आधिकारिक फैसला सुना सकते हैं।
वेलुमणि गुट के 14 विधायक महासचिव एडप्पादी के.
पलानीस्वामी से मिले और माफीनामे सौंपे।
दोनों गुटों ने मुख्यमंत्री सी.
जोसेफ विजय की टीवीके सरकार से समर्थन वापसी का पत्र अध्यक्ष को सौंपा।
विधायकों ने एग्री कृष्णमूर्ति को पार्टी व्हिप और ईपीएस को विधायक दल नेता मान्यता देने की माँग की।
शनमुगम व्यक्तिगत रूप से अध्यक्ष के समक्ष उपस्थित नहीं हुए — उनकी याचिका की स्वीकृति अनिश्चित।

तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर गुरुवार, 29 मई 2025 को अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के औपचारिक विलय पर निर्णय सुना सकते हैं। दोनों गुटों के नेताओं ने एक-दूसरे के विरुद्ध दायर अयोग्यता याचिकाएँ वापस ले लेते हुए अध्यक्ष को संयुक्त ज्ञापन सौंपा है, जिसमें पार्टी की एकता का दावा किया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

वेलुमणि गुट के 14 विधायक वरिष्ठ नेता सी.वी. शनमुगम के आवास से सीधे चेन्नई में एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) से मिलने पहुँचे। सूत्रों के अनुसार, इन बागी विधायकों ने पलानीस्वामी को माफीनामे सौंपे और पार्टी विभाजन के बाद छिने गए पदों को बहाल करने की माँग रखी।

ईपीएस से मुलाकात के तुरंत बाद एस.पी. वेलुमणि और अन्य विधायक विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय पहुँचे और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु वेट्री कषगम (टीवीके) सरकार से समर्थन वापसी का पत्र सौंपा।

अध्यक्ष के समक्ष माँगें

दोनों गुटों के नेता संयुक्त रूप से विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय पहुँचे — जो पार्टी के पुनर्मिलन का स्पष्ट संकेत था। विधायकों ने नए ज्ञापन में एडप्पादी के. पलानीस्वामी को एआईएडीएमके विधायक दल का नेता मान्यता देने और एग्री कृष्णमूर्ति को विधानसभा में पार्टी व्हिप नियुक्त करने की माँग की। विधानसभा अध्यक्ष ने स्वयं याचिकाकर्ता विधायकों के नाम पढ़कर उनकी उपस्थिति की व्यक्तिगत रूप से पुष्टि की।

शनमुगम की स्थिति अस्पष्ट

हालाँकि दोनों गुटों के बीच सुलह की तस्वीर बनती दिख रही है, सूत्रों का कहना है कि वरिष्ठ नेता सी.वी. शनमुगम व्यक्तिगत रूप से अध्यक्ष के समक्ष उपस्थित नहीं हुए, जिससे उनकी याचिका की औपचारिक स्वीकृति को लेकर संशय बना है। रिपोर्टों के अनुसार, शनमुगम ने शुरुआत में ईपीएस से मिलने से इनकार कर दिया था, लेकिन वरिष्ठ नेता पी. थंगामणि के हस्तक्षेप के बाद वे बातचीत में शामिल हुए। फिलहाल वह चेन्नई स्थित अपने आवास पर समर्थकों से विचार-विमर्श कर रहे हैं।

गौरतलब है कि एआईएडीएमके के कुछ नेताओं के बीच पलानीस्वामी गुट में शनमुगम की संभावित वापसी को लेकर मतभेद बढ़ते दिख रहे हैं, जो विलय प्रक्रिया में एक अनसुलझी पेचीदगी बनी हुई है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब एआईएडीएमके पिछले कुछ वर्षों से आंतरिक कलह से जूझ रही है। ईपीएस और वेलुमणि गुटों के बीच विभाजन ने पार्टी की विधानसभा में प्रभावी भूमिका को कमजोर किया था। टीवीके सरकार से समर्थन वापसी का पत्र सत्ता समीकरणों में संभावित बदलाव का संकेत देता है।

आगे क्या होगा

विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर ने कहा कि दस्तावेजों की जाँच के बाद वे आधिकारिक घोषणा करेंगे। उनके फैसले से न केवल एआईएडीएमके के संगठनात्मक ढाँचे पर असर पड़ेगा, बल्कि तमिलनाडु विधानसभा में विपक्षी राजनीति की दिशा भी तय होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

ज़मीन पर उतना नहीं है। सी.वी. शनमुगम की अध्यक्ष के समक्ष अनुपस्थिति और उनकी वापसी पर पार्टी के भीतर मतभेद बताते हैं कि यह विलय अभी भी अधूरा है। असली सवाल यह है कि क्या ईपीएस उन नेताओं को बिना शर्त वापस लेंगे जिन्होंने उन्हें चुनौती दी थी — या पद-बहाली की माँगें नई सौदेबाज़ी की शुरुआत हैं। टीवीके सरकार से समर्थन वापसी का पत्र भी राजनीतिक दबाव की रणनीति है या वास्तविक विपक्षी एकजुटता, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एआईएडीएमके के दोनों गुटों में सुलह क्यों हुई?
लंबी वार्ता के बाद वेलुमणि गुट के 14 विधायकों ने महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी को माफीनामे सौंपे और पार्टी में वापसी की माँग की। दोनों गुटों ने संयुक्त रूप से अयोग्यता याचिकाएँ वापस लेकर एकता का संकेत दिया।
तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष आज क्या फैसला ले सकते हैं?
विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर दस्तावेजों की जाँच के बाद एआईएडीएमके के दोनों गुटों के औपचारिक विलय को मान्यता दे सकते हैं। इसके साथ ही वे एडप्पादी के. पलानीस्वामी को विधायक दल नेता और एग्री कृष्णमूर्ति को पार्टी व्हिप के रूप में मान्यता देने पर भी निर्णय ले सकते हैं।
सी.वी. शनमुगम की स्थिति क्या है?
सूत्रों के अनुसार सी.वी. शनमुगम विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए, जिससे उनकी याचिका की औपचारिक स्वीकृति अनिश्चित है। वह चेन्नई स्थित अपने आवास पर समर्थकों से विचार-विमर्श कर रहे हैं और पार्टी में उनकी वापसी को लेकर कुछ नेताओं में मतभेद बताए जा रहे हैं।
टीवीके सरकार से समर्थन वापसी का क्या मतलब है?
वेलुमणि गुट के विधायकों ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की टीवीके सरकार से समर्थन वापसी का पत्र विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा है। यह कदम तमिलनाडु विधानसभा में सत्ता समीकरणों को प्रभावित कर सकता है, हालाँकि इसके तात्कालिक राजनीतिक परिणाम अभी स्पष्ट नहीं हैं।
एआईएडीएमके में विभाजन कब और कैसे हुआ था?
एआईएडीएमके में ईपीएस और वेलुमणि गुटों के बीच विभाजन पार्टी के आंतरिक नेतृत्व विवाद से उपजा था, जिसने विधानसभा में पार्टी की एकजुट विपक्षी भूमिका को कमज़ोर किया। दोनों गुटों ने एक-दूसरे के विरुद्ध अयोग्यता याचिकाएँ दायर की थीं, जिन्हें अब वापस लिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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