एआईएडीएमके में बागियों की वापसी नहीं: पलानीस्वामी ने खींची लक्ष्मण रेखा, पद बहाली से इनकार
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने स्पष्ट कर दिया है कि विधानसभा में विश्वास मत के दौरान सत्तारूढ़ तमिलनाडु विकास कषगम (टीवीके) सरकार का साथ देने वाले बागी विधायकों और नेताओं को संगठनात्मक पद वापस नहीं किए जाएंगे। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के अनुसार, 15 जून 2026 तक यह रुख अटल बना हुआ है और नेतृत्व इस मामले में किसी भी तरह की नरमी के मूड में नहीं है।
पलानीस्वामी का कड़ा रुख: क्यों नहीं मिलेगी पद वापसी
पार्टी सूत्रों के अनुसार, पलानीस्वामी का मानना है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत हटाए गए नेताओं को बहाल करना आंतरिक अनुशासन को कमज़ोर करेगा। उनके अनुसार, इससे पार्टी के भीतर प्रभाव के प्रतिस्पर्धी केंद्र उभर सकते हैं, जो संगठन की एकजुटता के लिए खतरनाक होगा। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब एआईएडीएमके चुनावी हार के बाद खुद को पुनर्गठित करने की कोशिश में जुटी है।
जमीनी संदेश की चिंता
पार्टी नेतृत्व को खुलेआम चुनौती देने वाले पदाधिकारियों को बहाल करने से जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जा सकता है — यह अनुशासनहीनता को पुरस्कृत करने जैसा दिखेगा। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पलानीस्वामी इस पहलू को लेकर विशेष रूप से सचेत हैं, क्योंकि महासचिव के रूप में उनका अधिकार इस निर्णय से सीधे जुड़ा है।
प्रमुख बागी नेता और उनकी स्थिति
पूर्व मंत्री एस.पी. वेलुमणि को मुख्यालय सचिव के पद से हटाया गया था। सी.वी. शनमुगम से संगठन सचिव और विलुप्पुरम जिला सचिव दोनों पद वापस लिए गए। सूत्रों के अनुसार, अधिकांश असंतुष्ट नेताओं को सुलह प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया है, परंतु शनमुगम अभी भी पार्टी नेतृत्व की पहलों से काफी हद तक अलग-थलग बने हुए हैं।
चुनावी हार की पृष्ठभूमि
एआईएडीएमके तमिलनाडु के हालिया विधानसभा चुनाव में केवल 47 सीटें जीत पाई, जिसके कारण मुख्य विपक्षी दल के रूप में उसकी दीर्घकालिक स्थिति भी छिन गई। पार्टी अब विधानसभा में तीसरे स्थान पर खिसक गई है। इस पराजय के बाद कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपने राजनीतिक भविष्य पर पुनर्विचार करना पड़ रहा है।
आगे की राह
फिलहाल पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, हटाए गए नेताओं को उनकी पुरानी संगठनात्मक भूमिकाएँ वापस मिलने के संकेत बेहद कम हैं। पलानीस्वामी ने हाल के हफ्तों में बागी खेमे से कुछ नेताओं के साथ सुलह के प्रयास ज़रूर किए हैं, लेकिन संगठनात्मक पद बहाली के मामले में वे अपनी लक्ष्मण रेखा पर अडिग हैं। एआईएडीएमके का अगला कदम यह तय करेगा कि क्या पार्टी बिखराव को रोककर एक प्रभावशाली विपक्षी ताकत के रूप में उभर पाती है।