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एआईएडीएमके में बागियों की वापसी नहीं: पलानीस्वामी ने खींची लक्ष्मण रेखा, पद बहाली से इनकार

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एआईएडीएमके में बागियों की वापसी नहीं: पलानीस्वामी ने खींची लक्ष्मण रेखा, पद बहाली से इनकार

सारांश

विधानसभा में सत्तारूढ़ दल का साथ देने वाले बागी नेताओं को एआईएडीएमके में पद वापसी नहीं मिलेगी — पलानीस्वामी ने लक्ष्मण रेखा खींच दी है। 47 सीटों की शर्मनाक हार के बाद पार्टी पुनर्गठन की राह पर है, लेकिन अनुशासन की कीमत पर समझौता नहीं।

मुख्य बातें

एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के.
पलानीस्वामी ने बागी नेताओं को संगठनात्मक पद वापस देने से स्पष्ट इनकार किया।
विश्वास मत के दौरान टीवीके सरकार का समर्थन करने के बाद इन नेताओं की जिम्मेदारियाँ छीनी गई थीं।
वेलुमणि को मुख्यालय सचिव पद से, सी.वी.
शनमुगम को संगठन सचिव और विलुप्पुरम जिला सचिव पद से हटाया गया था।
एआईएडीएमके तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में केवल 47 सीटें जीतकर तीसरे स्थान पर खिसक गई।
शनमुगम अभी भी पार्टी नेतृत्व की पहलों से अलग-थलग बने हुए हैं, जबकि अधिकांश असंतुष्ट नेता सुलह प्रक्रिया में शामिल हो चुके हैं।

अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने स्पष्ट कर दिया है कि विधानसभा में विश्वास मत के दौरान सत्तारूढ़ तमिलनाडु विकास कषगम (टीवीके) सरकार का साथ देने वाले बागी विधायकों और नेताओं को संगठनात्मक पद वापस नहीं किए जाएंगे। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के अनुसार, 15 जून 2026 तक यह रुख अटल बना हुआ है और नेतृत्व इस मामले में किसी भी तरह की नरमी के मूड में नहीं है।

पलानीस्वामी का कड़ा रुख: क्यों नहीं मिलेगी पद वापसी

पार्टी सूत्रों के अनुसार, पलानीस्वामी का मानना है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत हटाए गए नेताओं को बहाल करना आंतरिक अनुशासन को कमज़ोर करेगा। उनके अनुसार, इससे पार्टी के भीतर प्रभाव के प्रतिस्पर्धी केंद्र उभर सकते हैं, जो संगठन की एकजुटता के लिए खतरनाक होगा। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब एआईएडीएमके चुनावी हार के बाद खुद को पुनर्गठित करने की कोशिश में जुटी है।

जमीनी संदेश की चिंता

पार्टी नेतृत्व को खुलेआम चुनौती देने वाले पदाधिकारियों को बहाल करने से जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जा सकता है — यह अनुशासनहीनता को पुरस्कृत करने जैसा दिखेगा। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पलानीस्वामी इस पहलू को लेकर विशेष रूप से सचेत हैं, क्योंकि महासचिव के रूप में उनका अधिकार इस निर्णय से सीधे जुड़ा है।

प्रमुख बागी नेता और उनकी स्थिति

पूर्व मंत्री एस.पी. वेलुमणि को मुख्यालय सचिव के पद से हटाया गया था। सी.वी. शनमुगम से संगठन सचिव और विलुप्पुरम जिला सचिव दोनों पद वापस लिए गए। सूत्रों के अनुसार, अधिकांश असंतुष्ट नेताओं को सुलह प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया है, परंतु शनमुगम अभी भी पार्टी नेतृत्व की पहलों से काफी हद तक अलग-थलग बने हुए हैं।

चुनावी हार की पृष्ठभूमि

एआईएडीएमके तमिलनाडु के हालिया विधानसभा चुनाव में केवल 47 सीटें जीत पाई, जिसके कारण मुख्य विपक्षी दल के रूप में उसकी दीर्घकालिक स्थिति भी छिन गई। पार्टी अब विधानसभा में तीसरे स्थान पर खिसक गई है। इस पराजय के बाद कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपने राजनीतिक भविष्य पर पुनर्विचार करना पड़ रहा है।

आगे की राह

फिलहाल पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, हटाए गए नेताओं को उनकी पुरानी संगठनात्मक भूमिकाएँ वापस मिलने के संकेत बेहद कम हैं। पलानीस्वामी ने हाल के हफ्तों में बागी खेमे से कुछ नेताओं के साथ सुलह के प्रयास ज़रूर किए हैं, लेकिन संगठनात्मक पद बहाली के मामले में वे अपनी लक्ष्मण रेखा पर अडिग हैं। एआईएडीएमके का अगला कदम यह तय करेगा कि क्या पार्टी बिखराव को रोककर एक प्रभावशाली विपक्षी ताकत के रूप में उभर पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह रणनीतिक रूप से जोखिम भरा भी है — एक ऐसी पार्टी के लिए जो पहले से ही चुनावी हाशिये पर है, प्रतिभाशाली नेताओं को स्थायी रूप से बाहर रखना विपक्षी पुनरुद्धार को और कठिन बना सकता है। यह भी विचारणीय है कि 47 सीटों तक सिमटने के बाद एआईएडीएमके के पास खोने के लिए बहुत कम बचा है, फिर भी नेतृत्व समावेश के बजाय केंद्रीकरण को प्राथमिकता दे रहा है। शनमुगम का अलग-थलग बने रहना यह संकेत देता है कि सुलह की प्रक्रिया अधूरी है। द्रमुक के मजबूत होते दबदबे के सामने एआईएडीएमके की असली परीक्षा यह है कि क्या वह आंतरिक एकजुटता के बिना प्रभावशाली विपक्ष बन सकती है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एआईएडीएमके के बागी नेताओं को पद वापस क्यों नहीं दिए जा रहे?
पार्टी महासचिव पलानीस्वामी का मानना है कि विश्वास मत के दौरान टीवीके सरकार का समर्थन करने वाले नेताओं को बहाल करना आंतरिक अनुशासन को कमज़ोर करेगा और अनुशासनहीनता को पुरस्कृत करने का संदेश देगा। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह रुख जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच महासचिव की साख बनाए रखने के लिए भी जरूरी माना जा रहा है।
किन प्रमुख नेताओं के पद छीने गए थे?
पूर्व मंत्री एस.पी. वेलुमणि को मुख्यालय सचिव पद से हटाया गया था, जबकि सी.वी. शनमुगम से संगठन सचिव और विलुप्पुरम जिला सचिव दोनों पद वापस लिए गए। शनमुगम अभी भी पार्टी नेतृत्व की पहलों से अलग-थलग बने हुए हैं।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एआईएडीएमके का प्रदर्शन कैसा रहा?
एआईएडीएमके हालिया तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में केवल 47 सीटें जीत पाई, जिससे वह विधानसभा में तीसरे स्थान पर खिसक गई और मुख्य विपक्षी दल का दर्जा भी खो बैठी। इस निराशाजनक प्रदर्शन के बाद पार्टी में आंतरिक असंतोष और बगावत की घटनाएँ बढ़ीं।
क्या एआईएडीएमके बागी नेताओं से सुलह की कोशिश कर रही है?
हाँ, पलानीस्वामी ने बागी खेमे के कई नेताओं के साथ सुलह के प्रयास किए हैं और अधिकांश असंतुष्ट नेताओं को इस प्रक्रिया में शामिल किया जा चुका है। हालाँकि, संगठनात्मक पदों की बहाली के मामले में पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट रूप से इनकार किया है।
एआईएडीएमके अब आगे क्या करेगी?
पार्टी चुनावी हार के बाद संगठन को पुनर्गठित करने में जुटी है और पलानीस्वामी आंतरिक अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं। फिलहाल बागी नेताओं की पद बहाली के कोई संकेत नहीं हैं, और पार्टी का अगला कदम यह तय करेगा कि वह तमिलनाडु में विपक्षी ताकत के रूप में कितनी जल्दी उभर पाती है।
राष्ट्र प्रेस
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