एआईएडीएमके में फूट: पलानीस्वामी को सीनियर नेताओं की वापसी से अपनी कुर्सी जाने का डर — डीएमके

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एआईएडीएमके में फूट: पलानीस्वामी को सीनियर नेताओं की वापसी से अपनी कुर्सी जाने का डर — डीएमके

सारांश

DMK प्रवक्ता एलंगोवन ने सोमवार को सीधा आरोप लगाया — AIADMK की फूट की जड़ पलानीस्वामी की वह असुरक्षा है जो उन्हें वरिष्ठ नेताओं की वापसी से रोकती है। तमिलनाडु के कई जिलों में पार्टी दफ्तरों पर ताले और पुलिस तैनाती ने संकट की गंभीरता उजागर कर दी है।

मुख्य बातें

DMK प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने दावा किया कि पलानीस्वामी को वरिष्ठ नेताओं की वापसी से अपनी कुर्सी जाने का डर है।
AIADMK में पलानीस्वामी समर्थकों और पूर्व मंत्रियों एसपी वेलुमणी व सीवी शनमुगम के गुट के बीच टकराव कथित तौर पर संगठन पर नियंत्रण की लड़ाई बन चुका है।
तमिलनाडु के कई जिलों में पार्टी कार्यालयों को बंद कर पुलिस सुरक्षा में रखा गया।
अभिनेता रजनीकांत ने एक्स पर विजय को बधाई दी और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से मुलाकात को चार दशक पुरानी निजी दोस्ती बताया।
अभिनेता विशाल सहित कई लोगों ने फिल्म उद्योग विभाग मंत्री राजमोहन की नियुक्ति पर सवाल उठाए, जिसका एलंगोवन ने बचाव किया।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने सोमवार, 18 मई को दावा किया कि अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) में जारी आंतरिक कलह की असली वजह महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी का वह डर है, जिसमें उन्हें लगता है कि पार्टी के पुराने वरिष्ठ नेताओं की वापसी से उनकी नेतृत्व-स्थिति कमज़ोर पड़ सकती है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु के कई जिलों में पार्टी दफ्तरों पर ताले लटक गए हैं और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा है।

मुख्य घटनाक्रम

AIADMK का आंतरिक संकट अब खुलकर सड़कों पर आ गया है। पलानीस्वामी के समर्थकों और पूर्व मंत्रियों एसपी वेलुमणी तथा सीवी शनमुगम के नेतृत्व वाले विरोधी गुट के बीच तनाव कथित तौर पर पार्टी संगठन पर नियंत्रण की लड़ाई में बदल चुका है। कई जिला इकाइयों में बढ़ते टकराव के बीच पार्टी कार्यालयों को बंद कर पुलिस सुरक्षा में रखा गया है।

इस बीच, पलानीस्वामी ने विरोधी गुट पर आरोप लगाया है कि उनके नेता पार्टी की एकता से ऊपर अपनी निजी महत्वाकांक्षाओं — विशेषकर मंत्री पदों — को रख रहे हैं।

एलंगोवन का आरोप

एलंगोवन ने कहा कि यह टकराव कोई नई बात नहीं है और यह लंबे समय से चल रहा है। उनके अनुसार, पलानीस्वामी जानबूझकर उन वरिष्ठ नेताओं की वापसी नहीं चाहते जो पहले AIADMK के स्तंभ रहे हैं। एलंगोवन ने कहा, 'उन्हें डर है कि अगर वे वापस आए, तो उनकी अपनी स्थिति कमज़ोर हो सकती है। यह सिर्फ पलानीस्वामी की नेतृत्व की कमज़ोरी को दर्शाता है, जिसकी वजह से यह सारी फूट पड़ी है।' आलोचकों का कहना है कि यह संकट किसी एक नेता की व्यक्तिगत असुरक्षा की उपज है, न कि वैचारिक मतभेद की।

रजनीकांत और विजय प्रकरण

एलंगोवन ने इस अवसर पर अभिनेता रजनीकांत द्वारा हाल के विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद अभिनेता-से-नेता बने विजय को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर दी गई बधाई पर भी टिप्पणी की। रजनीकांत ने उन अफवाहों को खारिज किया था, जिनमें कहा जा रहा था कि उन्हें विजय की राजनीतिक सफलता से ईर्ष्या है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से उनकी हालिया मुलाकात पूरी तरह निजी थी और उनकी दोस्ती लगभग चार दशकों पुरानी है, जो किसी भी राजनीतिक जुड़ाव से परे है। रजनीकांत ने इस अटकल को भी दृढ़ता से नकारा कि स्टालिन से मुलाकात का मकसद विजय को मुख्यमंत्री बनने से रोकना था।

एलंगोवन ने इस पर कहा, 'इसमें गलत क्या है? वह स्टालिन की तारीफ करते हैं और जानते हैं कि स्टालिन उनके करीबी दोस्त हैं। जब फिल्म इंडस्ट्री से कोई सत्ता में आता है, तो रजनीकांत यकीनन उन्हें बधाई देंगे।'

फिल्म मंत्री की नियुक्ति पर विवाद

एलंगोवन ने अभिनेता विशाल सहित कई लोगों की उस आलोचना पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें मुख्यमंत्री विजय द्वारा फिल्म उद्योग विभाग मंत्री राजमोहन को सौंपे जाने पर सवाल उठाए गए थे। उन्होंने कहा कि फिल्म उद्योग के मंत्री के रूप में ऐसे व्यक्ति की ज़रूरत है जो इस क्षेत्र को समझे और इसे बेहतर बनाने की दिशा में काम कर सके — शायद इसी सोच के आधार पर यह नियुक्ति की गई है।

आगे क्या

AIADMK में यह संकट तब और गहरा हो गया है जब तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों के परिणामों ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। आलोचकों का मानना है कि जब तक पार्टी में सुलह की कोई ठोस पहल नहीं होती, यह आंतरिक कलह AIADMK को विपक्ष की भूमिका में और कमज़ोर करती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

DMK उसकी हर दरार को सार्वजनिक विमर्श में उछालने से नहीं चूक रही। असली सवाल यह है कि क्या यह संकट महज व्यक्तित्व-टकराव है, या AIADMK की वैचारिक पहचान का संकट — जो जयललिता के बाद से ही अनुत्तरित है। पलानीस्वामी पर लगाए गए आरोप नए नहीं हैं, लेकिन जिला स्तर पर पुलिस तैनाती यह बताती है कि यह कलह अब सिर्फ बयानबाज़ी नहीं रही। तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी का यह हाल DMK के लिए राजनीतिक अवसर है, लेकिन लोकतंत्र के लिए चिंताजनक भी।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

AIADMK में इस समय क्या संकट चल रहा है?
AIADMK महासचिव पलानीस्वामी के समर्थकों और पूर्व मंत्रियों एसपी वेलुमणी व सीवी शनमुगम के नेतृत्व वाले विरोधी गुट के बीच कथित तौर पर पार्टी संगठन पर नियंत्रण को लेकर तनाव है। तमिलनाडु के कई जिलों में पार्टी दफ्तर बंद कर पुलिस सुरक्षा में रखे गए हैं।
DMK ने पलानीस्वामी पर क्या आरोप लगाया है?
DMK प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने दावा किया है कि पलानीस्वामी जानबूझकर AIADMK के वरिष्ठ पुराने नेताओं की पार्टी में वापसी नहीं चाहते, क्योंकि उन्हें डर है कि इससे उनकी खुद की नेतृत्व-स्थिति कमज़ोर पड़ जाएगी। एलंगोवन के अनुसार, यही डर पार्टी की मौजूदा फूट की असली वजह है।
रजनीकांत और विजय के बीच का विवाद क्या है?
विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद रजनीकांत ने एक्स पर विजय को बधाई दी थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से उनकी मुलाकात पूरी तरह निजी थी और उनकी दोस्ती लगभग चार दशक पुरानी है, जिसका किसी राजनीतिक मकसद से कोई संबंध नहीं।
फिल्म उद्योग मंत्री राजमोहन की नियुक्ति पर विवाद क्यों है?
अभिनेता विशाल सहित कई लोगों ने सवाल उठाया है कि मुख्यमंत्री विजय ने फिल्म उद्योग विभाग मंत्री राजमोहन को क्यों सौंपा। DMK प्रवक्ता एलंगोवन ने इसका बचाव करते हुए कहा कि फिल्म उद्योग के लिए ऐसे मंत्री की ज़रूरत है जो इस क्षेत्र को समझे और उसे बेहतर बना सके।
AIADMK की इस फूट का तमिलनाडु की राजनीति पर क्या असर होगा?
आलोचकों का कहना है कि जब तक AIADMK में सुलह की कोई ठोस पहल नहीं होती, यह आंतरिक कलह पार्टी को विपक्ष की भूमिका में और कमज़ोर बनाती रहेगी। यह स्थिति DMK के लिए राजनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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