एआईएडीएमके में अंतर्कलह: पद से हटाए जाने के बाद एसपी वेलुमणि ने पलानीस्वामी की नेतृत्व शैली पर उठाए गंभीर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में हार के बाद अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) में सियासी उठापटक थमने का नाम नहीं ले रही। पार्टी महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी द्वारा वरिष्ठ नेता एसपी वेलुमणि समेत तीन बागी नेताओं को उनके पदों से हटाए जाने के बाद, वेलुमणि ने शुक्रवार, 15 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट के ज़रिए पलटवार किया और पलानीस्वामी की एकल-निर्णय नेतृत्व शैली पर खुलकर सवाल उठाए।
वेलुमणि का सीधा हमला: 'असली हालात समझने में नाकाम'
एसपी वेलुमणि ने एक्स पर लिखा, 'यह बहुत दुख की बात है कि पार्टी के महासचिव अभी भी असली हालात को समझने में नाकाम रहे हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी ने भी पलानीस्वामी की चुनाव प्रचार में की गई मेहनत पर सवाल नहीं उठाया, लेकिन गठबंधन और चुनावी रणनीति से जुड़े फैसले बिना किसी से परामर्श लिए एकतरफा तरीके से लिए गए।
वेलुमणि ने लिखा, 'आपने बिना किसी से सलाह या इनपुट लिए बहुत अधिक मनमानी की। आपके छोटे भाइयों के तौर पर हमने आपके निर्देशों को माना और उसी के अनुसार काम किया। फिर भी चुनाव में हार के बाद लीडरशिप पोजीशन पर बैठे व्यक्ति को सबसे पहले सबसे संपर्क करना चाहिए था और बातचीत करनी चाहिए थी।'
'मैं ही सब कुछ हूं' की सोच पर आपत्ति
वेलुमणि ने पलानीस्वामी की कार्यशैली को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि वे हमेशा 'मैं ही सब कुछ हूं' वाले रवैये से काम करते हैं, जिसे कोई भी ईमानदार पार्टी कार्यकर्ता स्वीकार नहीं कर सकता। उन्होंने दावा किया कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि पार्टी के अधिकतर विधायकों, वरिष्ठ पदाधिकारियों, जिला पार्टी सचिवों और कार्यकर्ताओं की साझा भावना है।
यह टिप्पणी उल्लेखनीय है क्योंकि यह पहली बार है जब इतने वरिष्ठ स्तर पर संगठनात्मक असंतोष इतने खुले तौर पर सामने आया है।
पद से हटाने की कार्रवाई की पृष्ठभूमि
पलानीस्वामी ने एसपी वेलुमणि, सीवी षणमुगम और विजयभास्कर को उनके पार्टी पदों से हटाया। यह कार्रवाई तमिलनाडु विधानसभा में टीवीके सरकार के बहुमत परीक्षण के दौरान कथित तौर पर क्रॉस वोटिंग के आरोपों के मद्देनज़र की गई थी। गौरतलब है कि यह विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी में पहले से चली आ रही दरार को और गहरा करती है।
वेलुमणि की अपील: बातचीत का दरवाज़ा खुला
तीखी आलोचना के बावजूद वेलुमणि ने संवाद का रास्ता बंद नहीं किया। उन्होंने कहा, 'हम जनता के दिए गए फैसले का सम्मान करते हुए काम कर रहे हैं। हमारा किसी की बेइज्जती करने का बिल्कुल भी इरादा नहीं है, न ही हममें से किसी का पार्टी में फूट डालने का इरादा है। अभी भी अगर आप बुलाते हैं, तो हम बातचीत के लिए तैयार हैं।'
उन्होंने पलानीस्वामी से आग्रह किया कि वे हार के कारणों की सामूहिक समीक्षा करें और नेतृत्व का रुख 'चले जाओ' से बदलकर 'अंदर आओ' का करें। उनका कहना था कि इस एक बदलाव से पार्टी का माहौल और भविष्य दोनों बदल सकते हैं।
आगे क्या होगा
एआईएडीएमके के भीतर यह टकराव ऐसे समय में और गहरा हो गया है जब पार्टी विधानसभा चुनाव में हार की समीक्षा कर रही है और विपक्ष की भूमिका को पुनर्परिभाषित करने की कोशिश कर रही है। तीनों निष्कासित नेताओं की अगली रणनीति और पलानीस्वामी की प्रतिक्रिया पार्टी के भविष्य की दिशा तय करेगी।