सीबीआई का बड़ा एक्शन: IDFC फर्स्ट बैंक व AU स्मॉल फाइनेंस बैंक घोटाले में चंडीगढ़-पंचकुला में 7 जगह छापे, 16 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े सरकारी धन गबन घोटाले की जांच के तहत 15 मई 2025 को चंडीगढ़ और पंचकुला में सात ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई का उद्देश्य घोटाले में गबन किए गए धन का पता लगाना और साक्ष्य जुटाना था। एजेंसी ने एक आधिकारिक बयान में पुष्टि की कि तलाशी के दौरान वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य सहित कई आपत्तिजनक दस्तावेज और सामग्री जब्त की गई हैं।
किन ठिकानों पर हुई छापेमारी
सीबीआई की टीमों ने चंडीगढ़ और पंचकुला में जिन सात परिसरों की तलाशी ली, उनमें आवासीय मकान, वाणिज्यिक प्रतिष्ठान, ज्वेलर्स शोरूम, सरकारी धन के संदिग्ध लाभार्थियों के परिसर और जांच से जुड़ी अन्य निजी संस्थाओं के दफ्तर शामिल थे। तलाशी के दौरान बरामद वित्तीय दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जांच में अहम कड़ी साबित हो सकते हैं।
घोटाले का पर्दाफाश कैसे हुआ
यह मामला फरवरी 2025 में उस समय सामने आया जब हरियाणा सरकार के विकास एवं पंचायत विभाग के एक अधिकारी ने अपना बैंक खाता बंद कर शेष राशि दूसरे बैंक में स्थानांतरित करने का प्रयास किया। इस सामान्य-सी दिखने वाली बैंकिंग प्रक्रिया के दौरान बैंक रिकॉर्ड और वास्तविक शेष राशि में भारी विसंगतियाँ उजागर हुईं, जिससे एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ।
आरोप है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुछ अधिकारियों ने हरियाणा के विभिन्न सरकारी विभागों के कर्मचारियों के साथ मिलकर धोखाधड़ी के ज़रिए सरकारी धन का गबन किया। गौरतलब है कि यह मामला बैंकिंग और सरकारी तंत्र के बीच कथित मिलीभगत की ओर इशारा करता है, जो इसे सामान्य वित्तीय धोखाधड़ी से अलग बनाता है।
जांच एजेंसियों की कार्रवाई
हरियाणा के सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो ने सबसे पहले इस मामले में एफआईआर दर्ज की। इसके बाद हरियाणा सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे सीबीआई को सौंप दिया। समानांतर रूप से, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी इस मामले में अपनी स्वतंत्र जांच शुरू कर दी है। अब तक इस मामले में 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
सीबीआई ने अपने बयान में कहा, 'जांच में तेजी लाई गई है और कई सुरागों पर काम किया जा रहा है। एजेंसी इस मामले में जल्द से जल्द व्यापक जांच करने के लिए प्रतिबद्ध है।'
बैंक का पक्ष और धन वापसी
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का कहना है कि उसने संबंधित राज्य सरकारी विभागों को ₹557 करोड़ वापस लौटा दिए हैं। हालाँकि, जांच अभी भी जारी है और यह स्पष्ट नहीं है कि कुल गबन की राशि कितनी है। यह ऐसे समय में आया है जब बैंकिंग क्षेत्र में सरकारी खातों की सुरक्षा को लेकर देशभर में सवाल उठ रहे हैं।
आगे क्या होगा
सीबीआई और ईडी की दोहरी जांच के बीच इस मामले में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। जब्त किए गए डिजिटल साक्ष्य और वित्तीय दस्तावेज जांचकर्ताओं को घोटाले के पूरे नेटवर्क तक पहुँचने में मदद कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में बैंकिंग नियामकों की भूमिका और आंतरिक ऑडिट प्रणाली पर भी सवाल उठने तय हैं।