सीबीआई ने यूएई से भगोड़े कमलेश पारेख को किया प्रत्यर्पित, एसबीआई समूह से सैकड़ों करोड़ की बैंकिंग धोखाधड़ी का आरोप

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सीबीआई ने यूएई से भगोड़े कमलेश पारेख को किया प्रत्यर्पित, एसबीआई समूह से सैकड़ों करोड़ की बैंकिंग धोखाधड़ी का आरोप

सारांश

सीबीआई ने इंटरपोल रेड नोटिस और भारत-यूएई कूटनीतिक समन्वय के बल पर बैंकिंग धोखाधड़ी के भगोड़े आरोपी कमलेश पारेख को वापस लाया। एसबीआई नेतृत्व वाले बैंक समूह को सैकड़ों करोड़ का नुकसान पहुँचाने का आरोप है। यह कार्रवाई 'भारतपोल' प्लेटफॉर्म की बढ़ती ताकत और आर्थिक भगोड़ों के खिलाफ भारत की सख्त होती नीति का प्रमाण है।

Key Takeaways

कमलेश पारेख को 1 मई 2025 को यूएई से भारत लाया गया और नई दिल्ली में सीबीआई ने तत्काल हिरासत में लिया। प्रत्यर्पण इंटरपोल रेड नोटिस और विदेश मंत्रालय व गृह मंत्रालय के समन्वय से संभव हुआ। पारेख पर एसबीआई नेतृत्व वाले बैंक समूह से सैकड़ों करोड़ रुपये की बैंकिंग धोखाधड़ी का आरोप है। जांच के अनुसार पारेख ने अन्य प्रमोटरों व निदेशकों के साथ मिलकर बैंक फंड को विदेशी कंपनियों के ज़रिए डायवर्ट किया। सीबीआई के 'भारतपोल' प्लेटफॉर्म के ज़रिए अब तक 150 से अधिक भगोड़े अपराधी भारत वापस लाए जा चुके हैं।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 1 मई 2025 को बैंकिंग और वित्तीय धोखाधड़ी के भगोड़े आरोपी कमलेश पारेख को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से भारत वापस लाने में बड़ी सफलता हासिल की। नई दिल्ली पहुँचते ही सीबीआई ने उन्हें तत्काल हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के समन्वय से संभव हुई।

प्रत्यर्पण कैसे हुआ संभव

पारेख के खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस जारी था, जिसके आधार पर यूएई की एजेंसियों ने उन्हें वहाँ ढूंढ निकाला। भारत के औपचारिक अनुरोध पर यूएई अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में लिया। इसके बाद दोनों देशों के बीच कानूनी प्रक्रिया और कूटनीतिक समन्वय पूरा होने पर पारेख को भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया गया।

आरोपों की प्रकृति और बैंकों को नुकसान

कमलेश पारेख पर बड़े पैमाने पर बैंकिंग और वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप है। जांच के अनुसार, देश के कई बैंकों के एक समूह को — जिसकी अगुवाई स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) कर रहा था — इस मामले में सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। जांच में सामने आया कि पारेख ने अन्य प्रमोटरों और निदेशकों के साथ मिलकर बैंक के फंड को विदेशों में फैली कंपनियों के ज़रिए डायवर्ट किया।

अधिकारियों के अनुसार, पारेख ने यूएई सहित अन्य देशों में अपनी कारोबारी गतिविधियों और निर्यात से जुड़े कामकाज के ज़रिए कथित तौर पर फर्जी तरीके अपनाए। इसमें वित्तीय लेन-देन में हेरफेर और बैंकिंग चैनलों का दुरुपयोग शामिल बताया गया है।

भारतपोल और इंटरपोल की भूमिका

सीबीआई भारत में इंटरपोल के लिए नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के रूप में कार्य करती है और 'भारतपोल' प्लेटफॉर्म के ज़रिए देश की सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय करती है। इसी तंत्र के बल पर पिछले कुछ वर्षों में इंटरपोल चैनलों के माध्यम से 150 से अधिक वांछित अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है। गौरतलब है कि यह कार्रवाई उस बढ़ती अंतरराष्ट्रीय सहयोग की कड़ी है जिसे भारत ने आर्थिक भगोड़ों के खिलाफ पिछले कुछ वर्षों में मज़बूत किया है।

सरकार और एजेंसियों की प्रतिक्रिया

इस ताज़ा कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एजेंसियों के बीच मज़बूत सहयोग का एक और उदाहरण बताया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार आर्थिक अपराधियों के प्रत्यर्पण को लेकर विभिन्न देशों के साथ अपने कानूनी ढाँचे को और सुदृढ़ कर रही है। आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के साथ इस मामले में नए तथ्य सामने आने की संभावना है।

Point of View

लेकिन असली परीक्षा अदालत में होगी — जहाँ अभियोजन पक्ष को ठोस साक्ष्य-श्रृंखला साबित करनी होगी। यह ऐसे समय में आया है जब नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों में प्रत्यर्पण प्रक्रियाएँ वर्षों तक खिंचती रही हैं। '150 से अधिक भगोड़े वापस' का आँकड़ा प्रभावशाली है, लेकिन इनमें से कितनों को सज़ा मिली, यह सार्वजनिक डेटा अभी भी अपारदर्शी है। बैंकिंग धोखाधड़ी के खिलाफ असली निवारण तब होगा जब प्रत्यर्पण के साथ-साथ संपत्ति-वसूली और दोषसिद्धि दर में भी सुधार दिखे।
NationPress
02/05/2026

Frequently Asked Questions

कमलेश पारेख कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
कमलेश पारेख बैंकिंग और वित्तीय धोखाधड़ी के आरोपी हैं, जिन पर एसबीआई नेतृत्व वाले बैंक समूह को सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान पहुँचाने का आरोप है। जांच के अनुसार उन्होंने अन्य प्रमोटरों व निदेशकों के साथ मिलकर बैंक फंड विदेशी कंपनियों के ज़रिए डायवर्ट किए।
सीबीआई ने कमलेश पारेख को यूएई से कैसे वापस लाया?
पारेख के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस जारी था, जिसके आधार पर यूएई एजेंसियों ने उन्हें हिरासत में लिया। भारत के अनुरोध पर कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें 1 मई 2025 को भारतीय अधिकारियों को सौंपा गया।
भारतपोल प्लेटफॉर्म क्या है और इसकी भूमिका क्या है?
भारतपोल सीबीआई द्वारा संचालित एक समन्वय प्लेटफॉर्म है जो इंटरपोल के नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के रूप में देश की सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को जोड़ता है। इसी के ज़रिए पिछले कुछ वर्षों में 150 से अधिक भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है।
इस प्रत्यर्पण में किन मंत्रालयों की भूमिका रही?
सीबीआई ने यह कार्रवाई विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के साथ मिलकर की। दोनों मंत्रालयों ने यूएई के साथ कूटनीतिक और कानूनी समन्वय सुनिश्चित किया।
इस मामले में आगे क्या होगा?
हिरासत के बाद पारेख को न्यायिक प्रक्रिया से गुज़रना होगा, जिसमें अदालत में आरोप तय करना और सुनवाई शामिल है। जांच में नए तथ्य सामने आने की संभावना है और संपत्ति-वसूली की प्रक्रिया भी समानांतर चल सकती है।
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