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मुंबई मेयर रितु तावड़े ने नालों का निरीक्षण किया, 3,364 मीट्रिक टन लक्ष्य के मुकाबले 869 टन काम पर जताई नाराजगी

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मुंबई मेयर रितु तावड़े ने नालों का निरीक्षण किया, 3,364 मीट्रिक टन लक्ष्य के मुकाबले 869 टन काम पर जताई नाराजगी

सारांश

मुंबई मेयर रितु तावड़े ने माहूल नाले पर पहुँचकर पाया कि 3,364 मीट्रिक टन के लक्ष्य में से केवल 869 टन गाद हटाई गई है। ठेकेदार की सुस्ती पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने तत्काल तेजी के निर्देश दिए और बीएमसी ने पारदर्शिता के लिए डिजिटल डैशबोर्ड लगाने की घोषणा की।

मुख्य बातें

मेयर रितु तावड़े ने 2 मई 2025 को माहूल नाले (बीएमसी जोन 5) का निरीक्षण किया।
कुल 3,364 मीट्रिक टन गाद हटाने के लक्ष्य में से अब तक केवल 869 मीट्रिक टन हटाई गई है।
ठेकेदार द्वारा काम समय पर शुरू न करने पर मेयर ने कड़ी नाराजगी जताई।
बीएमसी ने सफाई स्थलों पर डिजिटल डैशबोर्ड लगाने की नई पहल शुरू की है।
मानसून से पहले सभी नालों की सफाई पूरी करने का लक्ष्य, ताकि जलभराव से बचा जा सके।

मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने 2 मई 2025 को शहर के विभिन्न नालों की सफाई का निरीक्षण किया और काम की सुस्त रफ्तार पर कड़ी नाराजगी जताई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने आगामी मानसून से पहले नालों की सफाई में तेजी लाने के निर्देश जारी किए हैं, ताकि शहर में जलभराव की पुरानी समस्या से बचा जा सके।

निरीक्षण का विवरण

मेयर रितु तावड़े ने माहूल नाले के पास, वसंतदादा कॉलेज के सामने निरीक्षण किया। यह क्षेत्र बीएमसी के जोन 5 के अंतर्गत आता है, जहाँ बड़े पैमाने पर नाले की गाद हटाने का कार्य निर्धारित है। राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए उन्होंने बताया कि इस स्थान पर कुल 3,364 मीट्रिक टन गाद निकालने का लक्ष्य तय किया गया है।

हालाँकि, अब तक केवल 869 मीट्रिक टन गाद ही हटाई जा सकी है — जो कुल लक्ष्य का मात्र एक चौथाई है। मेयर ने बताया कि ठेकेदार द्वारा काम समय पर शुरू नहीं किया गया, जिस कारण यह देरी हुई।

अधिकारियों को कड़े निर्देश

मेयर तावड़े ने धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार को काम में तत्काल तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मानसून आने से पहले सभी नालों की सफाई पूरी होना अनिवार्य है। गौरतलब है कि हर वर्ष बारिश के दौरान मुंबई के कई इलाकों में जलभराव से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होता है।

डिजिटल डैशबोर्ड की नई पहल

बीएमसी ने इस बार सफाई कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक नई डिजिटल पहल शुरू की है। इसके अंतर्गत नाले की गाद हटाने के स्थलों पर डिजिटल डैशबोर्ड लगाए जाएंगे, जिनसे रियल-टाइम में यह जानकारी उपलब्ध होगी कि कितनी गाद निकाली गई है और काम की प्रगति क्या है। इससे निगरानी सुगम होगी और किसी भी अनियमितता पर तत्काल अंकुश लगाया जा सकेगा।

आम जनता पर असर

मुंबई में मानसून के दौरान जलभराव की समस्या वर्षों पुरानी है। निचले इलाकों में पानी भरने से यातायात ठप हो जाता है और घरों में पानी घुसने की घटनाएँ भी सामने आती हैं। इस बार बीएमसी अधिकारियों का कहना है कि मानसून पूर्व तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और सभी विभागों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

आगे क्या होगा

मेयर रितु तावड़े ने भरोसा जताया कि तय समय सीमा के भीतर नालों की सफाई पूरी कर ली जाएगी और मुंबई को बारिश के दौरान जलभराव की समस्या से काफी हद तक राहत मिलेगी। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, मानसून शुरू होने से पहले ही सभी सफाई कार्य संपन्न कर लिए जाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पारदर्शिता तभी सार्थक होगी जब उसके आधार पर जवाबदेही तय हो। बीएमसी को यह सुनिश्चित करना होगा कि रियल-टाइम डेटा महज़ एक प्रदर्शन न बनकर वास्तविक जवाबदेही का औज़ार बने।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई मेयर रितु तावड़े ने किस नाले का निरीक्षण किया?
मेयर रितु तावड़े ने माहूल नाले का निरीक्षण किया, जो वसंतदादा कॉलेज के सामने और बीएमसी जोन 5 के अंतर्गत आता है। यहाँ 3,364 मीट्रिक टन गाद हटाने का लक्ष्य निर्धारित है।
माहूल नाले की सफाई में कितनी प्रगति हुई है?
कुल 3,364 मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले अब तक केवल 869 मीट्रिक टन गाद हटाई गई है। ठेकेदार द्वारा काम समय पर शुरू न करने के कारण यह देरी हुई है।
बीएमसी का डिजिटल डैशबोर्ड क्या है?
बीएमसी ने नाला सफाई स्थलों पर डिजिटल डैशबोर्ड लगाने की पहल शुरू की है, जिससे रियल-टाइम में यह जानकारी मिलेगी कि कितनी गाद निकाली गई और काम की क्या स्थिति है। इसका उद्देश्य सफाई कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
मुंबई में मानसून से पहले नाला सफाई क्यों जरूरी है?
हर साल मानसून के दौरान मुंबई के कई इलाकों में जलभराव होता है, जिससे यातायात और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होता है। नालों की समय पर सफाई से पानी की निकासी सुचारू रहती है और जलभराव की समस्या कम होती है।
नालों की सफाई कब तक पूरी होगी?
मेयर रितु तावड़े ने आश्वासन दिया है कि मानसून शुरू होने से पहले ही सभी नालों की सफाई पूरी कर ली जाएगी। बीएमसी अधिकारियों ने भी सभी विभागों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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