भारत की डेटा सेंटर क्षमता FY2031 तक 6 गुना बढ़कर 10.5 GW होगी: मॉर्गन स्टेनली रिपोर्ट
मॉर्गन स्टेनली की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में डेटा सेंटर क्षमता वित्त वर्ष 2031 तक वर्तमान 1.8 गीगावाट से लगभग 6 गुना बढ़कर 10.5 गीगावाट तक पहुँचने का अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह असाधारण विस्तार मुख्यतः आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती माँग और डेटा लोकलाइजेशन नीतियों की वजह से होगा। नई दिल्ली से लेकर मुंबई तक, यह रिपोर्ट भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत का संकेत देती है।
AI की भूमिका और क्षमता विस्तार
इन्वेस्टमेंट बैंक मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि अकेले AI से जुड़े कार्यभार के लिए करीब 6.8 गीगावाट क्षमता की आवश्यकता पड़ सकती है। इसके साथ ही रियल-टाइम डेटा प्रोसेसिंग की बढ़ती ज़रूरत, सख्त डेटा लोकलाइजेशन नियम और तेज़ी से बढ़ती कंप्यूटिंग आवश्यकताएँ इस माँग को और अधिक गति दे रही हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर AI में निवेश का दौर अपने चरम पर है।
निवेश का आकार और स्वरूप
रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षमता विस्तार के लिए करीब 60 अरब डॉलर का निवेश अपेक्षित है, जिसमें भूमि अधिग्रहण, बिजली प्रणाली, कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और नेटवर्किंग उपकरण शामिल हैं। इन ऊर्जा-गहन डेटा सेंटर्स को संचालित करने के लिए बिजली क्षेत्र में अलग से 20 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की दरकार होगी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कंपनियाँ अब नवीकरणीय ऊर्जा और स्टोरेज सॉल्यूशंस की ओर तेज़ी से रुख कर रही हैं।
नीतिगत प्रोत्साहन और वैश्विक आकर्षण
मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में कहा गया है कि डेटा लोकलाइजेशन नियम, डेटा सेंटर को इंफ्रास्ट्रक्चर दर्जा और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं के संयुक्त प्रभाव से वैश्विक टेक कंपनियाँ तेज़ी से भारत की ओर आकर्षित हो रही हैं। रिपोर्ट में सीधे शब्दों में कहा गया है,