शहजाद पूनावाला का हमला: डीएमके, कांग्रेस और टीवीके सनातन विरोध में एकजुट
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने शुक्रवार, 15 मई को द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और तमिलगा वेट्री कषगम (TVK) पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि ये तीनों दल सनातन धर्म और हिंदू मूल्यों के विरोध में एकजुट हैं। उनके अनुसार, इन दलों की राजनीति का केंद्र हिंदू आस्था पर हमला करना है।
सनातन धर्म पर विवाद: पूनावाला के आरोप
पूनावाला ने कहा, 'पहले उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को खत्म करने की बात कही, जिसका कांग्रेस ने समर्थन किया। बाद में उनके विधायकों ने भी इसी तरह के बयान दिए। इसके बाद TVK और उससे जुड़े नेताओं ने भी वही बातें दोहराईं।' उन्होंने कहा कि जनता इन दलों की राजनीति को भलीभाँति समझ चुकी है और अब उनके इस एजेंडे को स्वीकार नहीं करती।
पश्चिम बंगाल और चुनाव आयोग पर निशाना
पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए पूनावाला ने कहा कि वहाँ की जनता ने BJP को समर्थन दिया, लेकिन परिवारवाद की राजनीति राज्य के संसाधनों की लूट में लगी हुई है। उन्होंने विपक्ष पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि केरल और तमिलनाडु में जब कांग्रेस-समर्थित सरकारें बनती हैं, तब चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बताया जाता है, लेकिन जहाँ हार की आशंका होती है, वहाँ चुनाव आयोग (ECI) पर सवाल उठाए जाने लगते हैं। उनके अनुसार, चुनाव आयोग के विरुद्ध लगाए जा रहे आरोप महज हार को छिपाने का बहाना हैं।
SIR फेज़ 3 पर BJP का रुख
पूनावाला ने चुनाव आयोग द्वारा 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) के तीसरे चरण की घोषणा का समर्थन किया। उन्होंने इस प्रक्रिया को पूरी तरह संवैधानिक और कानूनी बताया, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची से फर्जी, डुप्लीकेट और अवैध नाम हटाकर उसे शुद्ध बनाना है।
शाहनवाज हुसैन का समर्थन
BJP प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने भी SIR प्रक्रिया का समर्थन करते हुए कहा कि जहाँ-जहाँ यह लागू हुई, वहाँ मतदान प्रतिशत 90 से 93 प्रतिशत तक पहुँचा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रक्रिया से फर्जी मतदाताओं के नाम हटते हैं और जिन लोगों के नाम कई जगह दर्ज हैं, उन्हें भी सूची से बाहर किया जाता है, जिससे चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनती है।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत में BJP अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है और DMK-कांग्रेस गठबंधन के विरुद्ध सनातन धर्म विवाद को केंद्रीय चुनावी मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। गौरतलब है कि उदयनिधि स्टालिन के सनातन-विरोधी बयान के बाद से यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में लगातार गर्म बना हुआ है।