भारत-यूएई संबंध नई ऊँचाई पर: मोदी की अबू धाबी यात्रा में $5 अरब निवेश समेत रक्षा व ऊर्जा समझौते

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भारत-यूएई संबंध नई ऊँचाई पर: मोदी की अबू धाबी यात्रा में $5 अरब निवेश समेत रक्षा व ऊर्जा समझौते

सारांश

मोदी की अबू धाबी यात्रा महज़ कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं थी — यह रणनीतिक पुनर्संरेखण था। $5 अरब निवेश, रक्षा करार और वाडिनार शिप क्लस्टर के साथ भारत-यूएई संबंध आर्थिक से सामरिक धरातल पर आ गए हैं, और पश्चिम एशिया के तनाव के बीच यह साझेदारी और भी अहम हो गई है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 मई को अबू धाबी में यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से द्विपक्षीय वार्ता की।
यूएई ने भारत के आरबीएल बैंक , सम्मान कैपिटल और इन्फ्रास्ट्रक्चर में 5 अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता जताई।
द्विपक्षीय रणनीतिक रक्षा साझेदारी , एलपीजी आपूर्ति और रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व पर समझौते हुए।
गुजरात के वाडिनार में शिप रिपेयरिंग क्लस्टर स्थापित करने का करार हुआ।
मोदी 15 से 20 मई तक यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की पाँच देशों की यात्रा पर हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अबू धाबी यात्रा के दौरान शुक्रवार, 15 मई को भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच कई ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, जिनमें 5 अरब डॉलर का निवेश पैकेज, द्विपक्षीय रणनीतिक रक्षा साझेदारी और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के करार शामिल हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है और भारत अपनी वैश्विक कूटनीतिक उपस्थिति को नई धार देने में जुटा है।

मुख्य समझौते और निवेश

दोनों देशों के बीच हुए करारों में द्विपक्षीय रणनीतिक रक्षा साझेदारी, एलपीजी आपूर्ति एवं रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व पर सहयोग प्रमुख हैं। इसके अलावा, यूएई की ओर से भारत के आरबीएल बैंक, सम्मान कैपिटल और बुनियादी ढाँचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) क्षेत्र में कुल 5 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई गई।

एक अन्य महत्वपूर्ण करार के तहत गुजरात के वाडिनार में एक शिप रिपेयरिंग क्लस्टर स्थापित किया जाएगा, जो भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था को मज़बूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

मोदी का संबोधन और भारत का रुख

अबू धाबी में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'भारत हर परिस्थिति में संयुक्त अरब अमीरात के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और आगे भी खड़ा रहेगा। शांति और स्थिरता की बहाली के लिए भारत हर संभव सहयोग देगा।'

उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट के 'स्वतंत्र और खुला' रहने की ज़रूरत पर बल दिया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान अनिवार्य है। मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया के चल रहे संघर्ष का असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है और संवाद व कूटनीति ही समाधान का सर्वोत्तम मार्ग है।

द्विपक्षीय संबंधों की पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान — जिन्हें लोकप्रिय रूप से एमबीजेड कहा जाता है — को भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊँचाई देने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने याद दिलाया कि जनवरी में एमबीजेड की भारत यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने संबंधों को 'गुणात्मक रूप से उन्नत' करने पर सहमति जताई थी।

मोदी ने कहा, 'इतने कम समय में भी, हमने सभी मामलों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। आज की स्थिति को देखते हुए, भारत-यूएई रणनीतिक सहयोग का महत्व बहुत बढ़ गया है। आने वाले समय में, हम हर क्षेत्र में साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे।'

गौरतलब है कि भारत और यूएई के बीच द्विपक्षीय व्यापार हाल के वर्षों में तेज़ी से बढ़ा है और यूएई भारत के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। रक्षा व ऊर्जा में यह नई साझेदारी संबंधों को आर्थिक से रणनीतिक धरातल पर ले जाने का संकेत देती है।

पाँच देशों की यात्रा का संदर्भ

प्रधानमंत्री मोदी 15 से 20 मई तक संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की पाँच देशों की यात्रा पर हैं। इस दौरे का केंद्रीय उद्देश्य ऊर्जा, रक्षा, प्रौद्योगिकी, ग्रीन ट्रांजिशन और व्यापार में भारत की रणनीतिक और आर्थिक साझेदारियों को सुदृढ़ करना है।

आने वाले दिनों में यूरोपीय देशों के साथ होने वाली वार्ताओं पर भी सबकी नज़र रहेगी, क्योंकि यह यात्रा वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की बहुआयामी विदेश नीति की परीक्षा भी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि वाडिनार शिप क्लस्टर और पेट्रोलियम रिजर्व समझौते ज़मीन पर कितनी तेज़ी से आकार लेते हैं — क्योंकि भारत-यूएई के बीच इससे पहले भी बड़े ऐलान हुए हैं जिनका क्रियान्वयन धीमा रहा। होर्मुज स्ट्रेट पर मोदी का बयान भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति को रेखांकित करता है, लेकिन पश्चिम एशिया के तनाव में भारत की भूमिका सीमित है। यह यात्रा यूरोप दौरे की पृष्ठभूमि में भी अहम है — पश्चिमी देशों के साथ संबंध मज़बूत करते हुए खाड़ी देशों से ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की बहुआयामी कूटनीति की परिपक्वता को दर्शाता है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोदी की यूएई यात्रा में कौन-कौन से समझौते हुए?
15 मई को अबू धाबी में भारत और यूएई के बीच द्विपक्षीय रणनीतिक रक्षा साझेदारी, एलपीजी आपूर्ति, रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व और गुजरात के वाडिनार में शिप रिपेयरिंग क्लस्टर स्थापित करने के करार हुए। इसके अलावा यूएई ने आरबीएल बैंक, सम्मान कैपिटल और इन्फ्रास्ट्रक्चर में $5 अरब निवेश की प्रतिबद्धता जताई।
यूएई भारत में $5 अरब का निवेश किन क्षेत्रों में करेगा?
यूएई का $5 अरब का निवेश भारत के आरबीएल बैंक, सम्मान कैपिटल और बुनियादी ढाँचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) क्षेत्र में होगा। यह निवेश दोनों देशों के बीच बढ़ती वित्तीय और आर्थिक साझेदारी का हिस्सा है।
वाडिनार शिप रिपेयरिंग क्लस्टर क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
गुजरात के वाडिनार में भारत-यूएई सहयोग से एक शिप रिपेयरिंग क्लस्टर स्थापित किया जाएगा, जो भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था और बंदरगाह क्षमता को मज़बूत करेगा। यह भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में एक प्रमुख समुद्री केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम है।
मोदी ने होर्मुज स्ट्रेट पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट का 'स्वतंत्र और खुला' रहना महत्वपूर्ण है और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने पश्चिम एशिया के संघर्ष के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति पर बल दिया।
मोदी की पाँच देशों की यात्रा में और कौन-से देश शामिल हैं?
प्रधानमंत्री मोदी 15 से 20 मई तक संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा पर हैं। इस दौरे का उद्देश्य ऊर्जा, रक्षा, प्रौद्योगिकी, ग्रीन ट्रांजिशन और व्यापार में भारत की रणनीतिक साझेदारियों को मज़बूत करना है।
राष्ट्र प्रेस
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