अंकिता भार्गव के माता-पिता को ठगने की कोशिश, अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पर किया स्कैम का पर्दाफाश

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अंकिता भार्गव के माता-पिता को ठगने की कोशिश, अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पर किया स्कैम का पर्दाफाश

सारांश

अभिनेत्री अंकिता भार्गव के माता-पिता को नकली क्राइम ब्रांच अधिकारी बताकर हाथ से लिखे गुजराती कागज पर हस्ताक्षर करवाने की कोशिश की गई। अंकिता के समय पर पहुँचने से ठगी नाकाम हुई। उन्होंने इंस्टाग्राम पर इस घटना का खुलासा कर बुजुर्गों को सतर्क रहने की अपील की।

मुख्य बातें

अंकिता भार्गव के माता-पिता के घर दो अजनबियों ने गुजरात क्राइम ब्रांच के अधिकारी बनकर प्रवेश किया।
ठगों ने हाथ से लिखे गुजराती कागज पर हस्ताक्षर करवाने की कोशिश की, जबकि अंकिता के पिता गुजराती नहीं पढ़ पाते।
अंकिता के गुरुवार को समय पर पहुँचने से यह ठगी की कोशिश विफल हो गई।
अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर बुजुर्गों और उनके परिजनों को सतर्क रहने की अपील की।
अंकिता ने सलाह दी — अज्ञात भाषा के कागज पर हस्ताक्षर न करें, स्थानीय पुलिस से सत्यापन करें और परिवार को शामिल करें।

अभिनेत्री अंकिता भार्गव ने 15 मई 2026 को इंस्टाग्राम पर एक चेतावनी भरी पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे दो अजनबियों ने मुंबई में उनके माता-पिता के घर पहुँचकर खुद को गुजरात क्राइम ब्रांच के अधिकारी बताया और एक हाथ से लिखे गुजराती कागज पर उनके पिता के हस्ताक्षर करवाने की कोशिश की। अंकिता के समय पर पहुँचने से यह ठगी की कोशिश नाकाम हो गई।

घटनाक्रम: कैसे हुई ठगी की कोशिश

अंकिता ने अपनी पोस्ट में बताया कि जब वह गुरुवार को लंच के समय अपने माता-पिता के घर पहुँचीं, तो डाइनिंग टेबल पर दो अपरिचित व्यक्ति बैठे हुए थे। उन्होंने खुद को गुजरात क्राइम ब्रांच के अधिकारी बताया और कहा कि वे परिवार के किसी पुराने पड़ोसी की जाँच कर रहे हैं और केवल एक छोटा-सा बयान लेना चाहते हैं।

अभिनेत्री ने लिखा, 'शुरुआत में सब कुछ बहुत सामान्य लग रहा था। वे शांत, विनम्र और आत्मविश्वास से भरे हुए थे। जब मैंने उनके आईडी कार्ड माँगे तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के दिखा दिए और यहाँ तक कहा कि आप इनकी फोटो भी ले सकती हैं।'

हस्ताक्षर की कोशिश और अंकिता का हस्तक्षेप

दोनों व्यक्ति हाथ से लिखे गुजराती कागज पर अंकिता के पिता के हस्ताक्षर करवाने का प्रयास कर रहे थे। उनके पिता गुजराती भाषा नहीं पढ़ पाते। जब अंकिता ने इस पर सवाल उठाया, तो एक व्यक्ति ने सहज भाव से कहा कि वह खुद अनुवाद करके समझा देगा।

अंकिता ने दृढ़ता से मना करते हुए कहा, 'मैंने उनसे पूछा कि आधिकारिक बयान हाथ से क्यों लिखा हुआ है? इसे गुजराती में क्यों दिया गया है जबकि मेरे पिता इसे नहीं पढ़ सकते? मैंने साफ कहा कि इस घर में कोई भी व्यक्ति किसी भी कागज पर तब तक हस्ताक्षर नहीं करेगा जब तक वह उसे खुद न पढ़ और समझ ले।'

बुजुर्गों पर खतरे की चेतावनी

अंकिता ने बताया कि बाद में उनके पिता ने स्वीकार किया कि अगर वह समय पर नहीं आती होतीं, तो संभवतः वे उस कागज पर हस्ताक्षर कर देते, क्योंकि दोनों व्यक्ति बेहद भरोसेमंद लग रहे थे। अभिनेत्री ने चेताया, 'बुजुर्गों को आसानी से बहकाया जा सकता है। वर्दी, आईडी कार्ड और आधिकारिक भाषा का दबाव बनाकर उन्हें हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया जाता है।'

यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में नकली सरकारी अधिकारी बनकर ठगी के मामले बढ़ रहे हैं, खासकर बुजुर्गों को निशाना बनाकर।

अंकिता की सलाह: इन बातों का रखें ध्यान

अंकिता ने अपनी पोस्ट में लोगों को निम्नलिखित सावधानियाँ बरतने की अपील की:

हाथ से लिखे किसी भी कागज पर आँख मूँदकर हस्ताक्षर न करें।
— जिस भाषा को आप नहीं समझते, उस पर कभी हस्ताक्षर न करें।
— हमेशा टाइप किए हुए और स्पष्ट दस्तावेज़ की माँग करें।
सोसाइटी मैनेजमेंट या स्थानीय पुलिस से पहले जाँच करवाएँ।
— ऐसे किसी भी मामले में परिवार के अन्य सदस्यों को तुरंत शामिल करें।

अंकिता की सतर्क टिप्पणी

अभिनेत्री ने यह भी कहा कि हो सकता है वे असली अधिकारी रहे हों, लेकिन उनका तरीका लापरवाह और संदिग्ध था। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी स्थिति में सावधानी बरतना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि अपने बुजुर्ग परिजनों को ऐसे मामलों के प्रति जागरूक करना हर परिवार की जिम्मेदारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो परिणाम गंभीर हो सकते थे। मुख्यधारा की कवरेज इस घटना को सेलिब्रिटी एंगल से देखती है, लेकिन असली मुद्दा यह है कि बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस सामाजिक या कानूनी ढाँचा अभी भी नदारद है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंकिता भार्गव के माता-पिता के साथ क्या हुआ?
दो अजनबियों ने खुद को गुजरात क्राइम ब्रांच के अधिकारी बताकर अंकिता के माता-पिता के मुंबई स्थित घर में प्रवेश किया और उनके पिता से हाथ से लिखे गुजराती कागज पर हस्ताक्षर करवाने की कोशिश की। अंकिता के समय पर पहुँचने और सवाल उठाने से यह ठगी की कोशिश विफल हो गई।
अंकिता भार्गव ने इस स्कैम का पता कैसे लगाया?
अंकिता ने देखा कि बयान हाथ से लिखा हुआ था और गुजराती भाषा में था, जबकि उनके पिता गुजराती नहीं पढ़ पाते। उन्होंने तुरंत हस्ताक्षर से मना कर दिया और दस्तावेज़ की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए।
बुजुर्गों को ऐसे स्कैम से बचने के लिए क्या करना चाहिए?
अंकिता ने सलाह दी कि हाथ से लिखे या अज्ञात भाषा के किसी भी कागज पर हस्ताक्षर न करें। हमेशा टाइप किए हुए और स्पष्ट दस्तावेज़ माँगें, सोसाइटी मैनेजमेंट या स्थानीय पुलिस से सत्यापन करें और परिवार के किसी अन्य सदस्य को तुरंत शामिल करें।
क्या वे व्यक्ति सच में गुजरात क्राइम ब्रांच के अधिकारी थे?
अंकिता ने खुद कहा कि हो सकता है वे असली अधिकारी रहे हों, लेकिन उनका तरीका लापरवाह और संदिग्ध था। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में सावधानी बरतना जरूरी है।
यह घटना क्यों महत्वपूर्ण है?
यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि नकली अधिकारी बनकर बुजुर्गों को ठगने के मामले देशभर में बढ़ रहे हैं। अंकिता जैसी सार्वजनिक हस्ती का इस अनुभव को साझा करना जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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