सेंसेक्स 161 अंक टूटा, 75,238 पर बंद; कच्चे तेल की उछाल और कमजोर रुपए से बाजार पर दबाव
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स शुक्रवार, 15 मई को 160.73 अंक यानी 0.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,237.99 पर बंद हुआ। कमजोर वैश्विक बाजार संकेतों, ब्रेंट क्रूड में 2.9 प्रतिशत की तेज उछाल और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँचने से मुनाफावसूली का दबाव बना, जिसने घरेलू बाजार की दो दिन की लगातार बढ़त का सिलसिला तोड़ दिया।
मुख्य बाजार आँकड़े
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 46.10 अंक यानी 0.19 प्रतिशत गिरकर 23,643.50 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में सेंसेक्स 75,497.10 पर खुला, 75,870.36 के उच्चतम और 75,139.41 के निम्नतम स्तर को छुआ। निफ्टी 50 ने 23,731.40 पर कारोबार शुरू किया और 23,839.30 के ऊपरी तथा 23,610.30 के निचले स्तर के बीच उतार-चढ़ाव देखा।
व्यापक बाजार में भी दबाव रहा — निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.45 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.61 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टर-वार प्रदर्शन
निफ्टी मेटल, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी ऑयल एंड गैस में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट रही। दूसरी ओर, निफ्टी मीडिया में 1.98 प्रतिशत और निफ्टी आईटी में 1.30 प्रतिशत की तेजी देखी गई। निफ्टी एफएमसीजी और निफ्टी फार्मा में भी उल्लेखनीय बढ़त रही, जबकि निफ्टी ऑटो में मामूली तेजी दर्ज की गई।
टॉप गेनर्स और लूजर्स
निफ्टी 50 में टीएमपीवी, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, इंफोसिस, कोल इंडिया, टेक महिंद्रा, कोटक बैंक, पावरग्रिड, मारुति सुजुकी इंडिया, भारती एयरटेल और विप्रो के शेयर सर्वाधिक लाभ में रहे। वहीं हिंडाल्को, इटरनल, नेस्ले इंडिया, टाटा स्टील, रिलायंस, अल्ट्राटेक सीमेंट और एमएंडएम के शेयरों में सर्वाधिक गिरावट देखी गई।
निवेशकों को नुकसान
BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले सत्र के ₹462.9 लाख करोड़ से घटकर ₹460.5 लाख करोड़ रह गया। इस प्रकार निवेशकों को एक ही सत्र में ₹2.4 लाख करोड़ की चपत लगी।
कच्चे तेल का दबाव
इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट क्रूड के मई वायदा अनुबंध में 2.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई और यह 108.8 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया। यह उछाल आयात-निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महँगाई और चालू खाते के घाटे की दृष्टि से चिंताजनक है। आगामी कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की दिशा पर बाजार की नजर बनी रहेगी।