कच्चे तेल की मार: शेयर बाजार लाल निशान में खुला, आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली
सारांश
Key Takeaways
- सेंसेक्स शुक्रवार को 180.20 अंक (0.23%25) गिरकर 77,483.80 पर खुला।
- निफ्टी 72.50 अंक (0.30%25) की गिरावट के साथ 24,100.55 पर खुला।
- निफ्टी आईटी इंडेक्स सबसे अधिक दबाव में रहा — इन्फोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा लाल निशान में।
- ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर और WTI क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा — होर्मुज स्ट्रेट तनाव मुख्य कारण।
- डाउ जोन्स 0.36%25 और नैस्डैक 0.89%25 की गिरावट के साथ गुरुवार को बंद हुए।
- निफ्टी मिडकैप 100 मामूली 0.14%25 बढ़त में रहा जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 27 अंक गिरा।
मुंबई, 24 अप्रैल: कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और कमजोर वैश्विक संकेतों के दबाव में भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को गिरावट के साथ खुला। सेंसेक्स 180.20 अंक (0.23%25) की कमजोरी के साथ 77,483.80 पर और निफ्टी 72.50 अंक (0.30%25) की गिरावट के साथ 24,100.55 पर खुला। बाजार विश्लेषकों के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जो घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों पर भारी पड़ रही हैं।
आईटी सेक्टर सबसे बड़ा नुकसान उठाने वाला
शुरुआती कारोबार में निफ्टी आईटी इंडेक्स सबसे अधिक दबाव में रहा और टॉप लूजर बना। एचसीएल टेक, इन्फोसिस, टीसीएस और टेक महिंद्रा जैसे दिग्गज आईटी शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। इसके अलावा निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी मेटल और निफ्टी एफएमसीजी भी गिरावट की जद में थे।
दूसरी ओर, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी कमोडिटी हरे निशान में बने रहे, जो यह संकेत देता है कि बाजार में पूरी तरह बिकवाली नहीं थी बल्कि सेक्टर-विशेष दबाव था।
सेंसेक्स पैक में मिला-जुला कारोबार
सेंसेक्स के 30 शेयरों में एसबीआई, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), बजाज फिनसर्व, एनटीपीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL), इंडिगो, एलएंडटी और बजाज फाइनेंस हरे निशान में थे। वहीं भारती एयरटेल, पावर ग्रिड, आईसीआईसीआई बैंक, टाइटन, आईटीसी, ट्रेंट, बीईएल, इटरनल और एचडीएफसी बैंक लाल निशान में फिसले।
निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 85.55 अंक (0.14%25) की मामूली बढ़त के साथ 60,038.35 पर था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 27 अंक की गिरावट के साथ 17,693 पर कारोबार कर रहा था। इससे साफ है कि लार्जकैप की तुलना में मिड और स्मॉलकैप में अपेक्षाकृत स्थिरता रही।
एशियाई और अमेरिकी बाजारों का हाल
एशिया के अधिकांश शेयर बाजार शुक्रवार को लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। शंघाई, हांगकांग, सियोल, जकार्ता और बैंकॉक में गिरावट देखी गई, जबकि केवल टोक्यो हरे निशान में था।
अमेरिकी बाजार गुरुवार को नकारात्मक रुख के साथ बंद हुए। डाउ जोन्स 0.36%25 की गिरावट के साथ 49,310.32 और नैस्डैक 0.89%25 की कमजोरी के साथ 24,438.50 पर बंद हुआ। तकनीकी शेयरों में अधिक बिकवाली ने भारतीय आईटी सेक्टर पर भी असर डाला।
कच्चे तेल की कीमतें और होर्मुज स्ट्रेट का संकट
वैश्विक बाजारों में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की ऊंची कीमतें मानी जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है।
होर्मुज स्ट्रेट — जो दुनिया की लगभग 20%25 कच्चे तेल की आपूर्ति का मार्ग है — पर भू-राजनीतिक तनाव के कारण आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने तेल की कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखा है। यह भारत जैसे देशों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है जो अपनी कुल तेल जरूरत का 85%25 से अधिक आयात पर निर्भर हैं।
गौरतलब है कि जब कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाती हैं तो भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ता है, जिससे चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ता है, रुपये पर दबाव आता है और अंततः महंगाई को बल मिलता है। आरबीआई की मौद्रिक नीति पर भी इसका सीधा असर पड़ता है।
आने वाले सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों, होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति पर रहेगी। यदि तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहीं तो बाजार में दबाव जारी रह सकता है।