महिला सामर्थ्य योजना: अवध के 1,550 गांवों में एक लाख महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर, ₹1,380 करोड़ सीधे खातों में
सारांश
Key Takeaways
- 1,550 गांवों में एक लाख से अधिक महिलाएं महिला सामर्थ्य योजना से जुड़ी हैं।
- अब तक ₹1,380 करोड़ से अधिक सीधे DBT के जरिए महिलाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर।
- योजना मार्च 2023 में 340 गांवों और 8,000 महिलाओं से शुरू हुई थी।
- प्रतिदिन करीब 4 लाख लीटर दूध का संग्रह — डेयरी अब संगठित आर्थिक गतिविधि बनी।
- सुल्तानपुर की अनीता वर्मा ने दो गायों से शुरुआत कर एक वर्ष में ₹6.5 लाख कमाए।
- लखनऊ, उन्नाव और बाराबंकी में योजना का विस्तार जारी है।
योगी सरकार की महिला सामर्थ्य योजना: अवध में बड़ा बदलाव
लखनऊ, 24 अप्रैल: योगी सरकार की महत्वाकांक्षी महिला सामर्थ्य योजना ने अवध क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। अयोध्या, सुल्तानपुर, रायबरेली, अमेठी, प्रतापगढ़, फतेहपुर और कानपुर नगर के 1,550 से अधिक गांवों में एक लाख से अधिक महिलाएं इस योजना के जरिए आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। अब तक ₹1,380 करोड़ से अधिक की राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा चुकी है।
योजना का विस्तार और उपलब्धियां
मार्च 2023 में यह अभियान केवल 340 गांवों और 8,000 महिलाओं से शुरू हुआ था। दो वर्षों से भी कम समय में यह 1,550 गांवों और एक लाख से अधिक महिलाओं तक पहुंच गया है — यह विस्तार किसी भी ग्रामीण योजना के लिए असाधारण माना जा सकता है।
अब लखनऊ, उन्नाव और बाराबंकी में भी इस योजना का विस्तार किया जा रहा है, जिससे आने वाले महीनों में लाभार्थियों की संख्या और बढ़ेगी।
इन जिलों में प्रतिदिन करीब 4 लाख लीटर दूध का संग्रह हो रहा है, जो यह दर्शाता है कि डेयरी अब केवल पारंपरिक पारिवारिक काम नहीं, बल्कि एक संगठित आर्थिक गतिविधि का रूप ले चुकी है।
डीबीटी से पारदर्शिता और महिलाओं का आत्मविश्वास
इस योजना की सबसे बड़ी ताकत डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली है। भुगतान सीधे महिलाओं के बैंक खातों में जाता है, जिससे बिचौलियों और अनावश्यक कटौती की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो गई है। इस पारदर्शिता ने ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है और उन्हें वित्तीय स्वतंत्रता का एहसास कराया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि महिलाओं की आर्थिक मजबूती ही मजबूत परिवार और समृद्ध समाज की नींव है। यह योजना उसी दर्शन का व्यावहारिक विस्तार है, जहां महिलाओं को उत्पादन से लेकर बाजार और भुगतान तक हर कड़ी में सीधे जोड़ा गया है।
प्रेरणा की मिसाल: अनीता वर्मा की कहानी
सुल्तानपुर के दूबेपुर ब्लॉक के मुकुंदपुर गांव की अनीता वर्मा इस योजना की सफलता की जीती-जागती मिसाल हैं। उन्होंने केवल दो गायों से अपना छोटा-सा प्रयास शुरू किया था। गत वर्ष उन्हें करीब ₹6.5 लाख का भुगतान प्राप्त हुआ।
अनीता की कहानी यह साबित करती है कि सही अवसर और सरकारी योजनाओं का समय पर लाभ मिलने पर ग्रामीण महिलाएं न केवल अपनी आर्थिक स्थिति, बल्कि पूरे परिवार और समाज का भविष्य बदलने में सक्षम हैं।
व्यापक प्रभाव और आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना केवल डेयरी तक सीमित नहीं है — यह ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय साक्षरता, बैंकिंग प्रणाली और संगठित बाजार से जोड़ने का एक बड़ा माध्यम बन रही है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं, तो बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर भी सकारात्मक असर पड़ता है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में 2017 के बाद से महिला स्वयं सहायता समूहों और डेयरी सहकारिताओं को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन दिया गया है। महिला सामर्थ्य योजना उसी नीतिगत दिशा का सबसे प्रभावशाली परिणाम है। आने वाले महीनों में लखनऊ, उन्नाव और बाराबंकी में विस्तार के बाद लाभार्थी महिलाओं की संख्या डेढ़ लाख के पार जाने का अनुमान है।