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बांग्लादेश पर कर्ज का बड़ा संकट: 5 साल में चुकाने होंगे 26 अरब डॉलर, 2063 तक नहीं मिलेगी मुक्ति

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बांग्लादेश पर कर्ज का बड़ा संकट: 5 साल में चुकाने होंगे 26 अरब डॉलर, 2063 तक नहीं मिलेगी मुक्ति

सारांश

बांग्लादेश पर गहराता ऋण संकट: 2026-2030 के बीच 26 अरब डॉलर चुकाने की चुनौती, कुल बाहरी कर्ज 77 अरब डॉलर। रूपपुर जैसी महंगी परियोजनाएं, कमजोर टैक्स बेस और वैश्विक झटकों ने हालात बिगाड़े। 2063 तक कर्जमुक्ति की संभावना।

मुख्य बातें

बांग्लादेश को 2026-2030 के बीच 26 अरब डॉलर का बाहरी ऋण चुकाना होगा।
देश का कुल विदेशी कर्ज जून 2024 तक 77 अरब डॉलर यानी राष्ट्रीय आय का 19% हो चुका है।
2030 तक वार्षिक कर्ज भुगतान 5.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
रूपपुर परमाणु परियोजना (11 अरब डॉलर) , पद्मा रेल लिंक और कर्णफुली टनल जैसी परियोजनाओं में देरी ने कर्ज का बोझ बढ़ाया।
मौजूदा रुझान जारी रहा तो बांग्लादेश 2063 तक कर्जमुक्त नहीं हो पाएगा।
IMF के 18% जोखिम स्तर के मुकाबले बांग्लादेश का ऋण-सेवा अनुपात 16.5% है — चिंताजनक स्तर के करीब।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश इस समय एक गंभीर ऋण संकट की चपेट में है — वर्ष 2026 से 2030 के बीच केवल पांच वित्तीय वर्षों में देश को बाहरी कर्ज के रूप में करीब 26 अरब डॉलर चुकाने होंगे। कमजोर टैक्स बेस, वैश्विक आर्थिक झटकों और महंगे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण यह बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। ढाका ट्रिब्यून की एक विस्तृत रिपोर्ट में इस संकट की गहराई उजागर हुई है।

कर्ज का आंकड़ा कितना बड़ा है?

जून 2024 तक बांग्लादेश का कुल बाहरी कर्ज लगभग 77 अरब डॉलर हो चुका था, जो देश की राष्ट्रीय आय का करीब 19 प्रतिशत है। यह अनुपात लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहा है।

गौरतलब है कि बांग्लादेश ने पिछले 54 वर्षों में बाहरी ऋण चुकाने पर कुल लगभग 40 अरब डॉलर खर्च किए हैं। लेकिन इस पूरी राशि के दो-तिहाई के बराबर भुगतान अकेले अगले पांच वर्षों में करना होगा — यह आंकड़ा ही स्थिति की गंभीरता बयान करता है।

2030 तक बांग्लादेश का वार्षिक कर्ज भुगतान बढ़कर लगभग 5.5 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। वहीं 2026 से 2035 के बीच के दस वित्तीय वर्षों में कुल 51 अरब डॉलर का बाहरी ऋण चुकाना होगा।

आईएमएफ की चेतावनी और ऋण-सेवा अनुपात

वर्तमान में बांग्लादेश का ऋण-सेवा और सरकारी राजस्व अनुपात 16.5 प्रतिशत है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने इस अनुपात के लिए 18 प्रतिशत को जोखिम स्तर माना है। हालांकि बांग्लादेश अभी इस सीमा से थोड़ा नीचे है, लेकिन विशेषज्ञ इस स्थिति को भी चिंताजनक मान रहे हैं।

यदि मौजूदा रुझान जारी रहा, तो देश को अपने संपूर्ण बाहरी कर्ज से मुक्त होने में 37 वर्ष, यानी वर्ष 2063 तक का समय लग सकता है।

रेमिटेंस से कितनी राहत?

2021 से 2025 के बीच बांग्लादेश को प्रति माह औसतन लगभग 2 अरब डॉलर का विदेशी प्रेषण (रेमिटेंस) प्राप्त हुआ। इस आधार पर किसी एक वर्ष का सर्वाधिक कर्ज भुगतान करीब तीन महीनों की रेमिटेंस आय से ही पूरा हो सकता है।

लेकिन रेमिटेंस पर यह निर्भरता खुद एक जोखिम है — वैश्विक मंदी, खाड़ी देशों में रोजगार नीतियों में बदलाव या किसी भी बाहरी झटके से यह आय अचानक घट सकती है।

कर्ज बढ़ने के पीछे क्या कारण हैं?

कर्ज संकट के लिए वैश्विक और घरेलू दोनों कारक जिम्मेदार हैं। वैश्विक स्तर पर यूक्रेन-रूस युद्ध, कोविड-19 महामारी और मध्य पूर्व संघर्ष ने निर्यात, विदेशी निवेश और रेमिटेंस पर सीधा असर डाला।

घरेलू स्तर पर विदेशी ऋण से वित्तपोषित बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स इस संकट की मुख्य वजह हैं। इनमें रूपपुर परमाणु ऊर्जा परियोजना (11 अरब डॉलर), कर्णफुली टनल, पद्मा रेल लिंक और शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का तीसरा टर्मिनल शामिल हैं। इन परियोजनाओं में हुई देरी ने लागत और ब्याज दोनों बढ़ा दिए।

इसके साथ ही टैक्स बेस का पर्याप्त विस्तार न होना और अंतरराष्ट्रीय ऋणदाताओं द्वारा ब्याज दरों, चुकौती अवधि और ग्रेस पीरियड में किए गए बदलाव भी देश की कर्ज चुकाने की क्षमता को कमजोर कर रहे हैं।

व्यापक संदर्भ: श्रीलंका से सबक और दक्षिण एशिया का परिदृश्य

यह स्थिति उस समय और भी चिंताजनक हो जाती है जब हम याद करते हैं कि 2022 में श्रीलंका ठीक इसी तरह के ऋण संकट के कारण दिवालिया घोषित हुआ था। श्रीलंका का मामला बताता है कि जब विदेशी मुद्रा भंडार घटता है और कर्ज चुकाने की क्षमता कम होती है, तो परिणाम कितने विनाशकारी हो सकते हैं।

पाकिस्तान भी इसी दौर में आईएमएफ के बेलआउट पर निर्भर रहा है। दक्षिण एशिया में ऋण संकट एक क्षेत्रीय चुनौती बनती जा रही है।

विडंबना यह है कि बांग्लादेश ने इन महंगी परियोजनाओं को विकास का प्रतीक बताया था, लेकिन उनकी देरी और बढ़ती लागत ने उन्हें आर्थिक बोझ में बदल दिया। रूपपुर परमाणु परियोजना में रूस के साथ करार हुआ था और अब यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते इस परियोजना की वित्तीय जटिलताएं और बढ़ गई हैं।

आने वाले महीनों में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर यह दबाव होगा कि वह आईएमएफ और विश्व बैंक के साथ ऋण पुनर्गठन की शर्तों पर बातचीत करे और घरेलू राजस्व बढ़ाने के लिए कर सुधार लागू करे। यदि ये कदम नहीं उठाए गए तो अगले पांच वर्षों में वित्तीय दबाव असहनीय हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस विकास मॉडल की विफलता है जो विदेशी कर्ज पर टिका था और घरेलू राजस्व की उपेक्षा करता रहा। विडंबना यह है कि जिन परियोजनाओं को 'विकास की पहचान' बताया गया, उन्हीं की देरी और बढ़ती लागत आज देश के गले की फांस बन गई है। दक्षिण एशिया में श्रीलंका और पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश का यह संकट एक स्पष्ट संकेत है कि बड़े कर्ज पर आधारित बुनियादी ढांचा विकास तब तक टिकाऊ नहीं, जब तक घरेलू अर्थव्यवस्था और टैक्स आधार मजबूत न हो। भारत के पड़ोस में यह अस्थिरता क्षेत्रीय आर्थिक सुरक्षा के लिए भी एक चेतावनी है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश पर कुल कितना विदेशी कर्ज है?
जून 2024 तक बांग्लादेश का कुल बाहरी कर्ज लगभग 77 अरब डॉलर था, जो देश की राष्ट्रीय आय का करीब 19 प्रतिशत है। यह अनुपात लगातार बढ़ रहा है।
बांग्लादेश को अगले 5 साल में कितना कर्ज चुकाना होगा?
2026 से 2030 के बीच बांग्लादेश को लगभग 26 अरब डॉलर का बाहरी ऋण चुकाना होगा। यह पिछले 54 वर्षों में चुकाई गई कुल राशि के दो-तिहाई के बराबर है।
बांग्लादेश का कर्ज इतना क्यों बढ़ा?
कर्ज बढ़ने के पीछे रूपपुर परमाणु परियोजना , पद्मा रेल लिंक जैसे महंगे विदेशी ऋण-वित्तपोषित प्रोजेक्ट्स में देरी, कमजोर टैक्स बेस और यूक्रेन युद्ध, कोविड-19 जैसे वैश्विक झटके जिम्मेदार हैं। अंतरराष्ट्रीय ऋणदाताओं द्वारा ब्याज दरों में बदलाव ने भी बोझ बढ़ाया।
क्या बांग्लादेश श्रीलंका जैसे संकट की ओर जा रहा है?
विशेषज्ञ इस तुलना को पूरी तरह नकारते नहीं हैं। बांग्लादेश का ऋण-सेवा अनुपात 16.5% है, जो IMF के 18% जोखिम स्तर के करीब है। हालांकि स्थिति अभी श्रीलंका जितनी विकट नहीं, लेकिन सुधारात्मक कदम न उठाने पर खतरा बढ़ सकता है।
बांग्लादेश कब तक कर्जमुक्त हो सकता है?
मौजूदा रेमिटेंस और भुगतान रुझान के आधार पर बांग्लादेश को अपने संपूर्ण बाहरी कर्ज से मुक्त होने में 37 वर्ष लग सकते हैं, यानी 2063 तक। यह अनुमान तभी सच होगा जब रेमिटेंस प्रवाह स्थिर रहे।
राष्ट्र प्रेस
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