क्वेटा में ईंधन संकट: पुलिस गश्त ठप, बलूचिस्तान में बढ़ा अपराध का खतरा
सारांश
Key Takeaways
- क्वेटा के पुलिस थानों को पूरे महीने के लिए सिर्फ 70 लीटर ईंधन मिल रहा है, जो एक गाड़ी को चार दिन भी नहीं चला सकता।
- रोजाना के आधार पर प्रति थाना सिर्फ दो लीटर ईंधन की आपूर्ति हो रही है, जिससे नियमित पेट्रोलिंग लगभग बंद हो गई है।
- प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 6 अप्रैल 2025 को ऊर्जा बचत उपायों की घोषणा की, जो 7 अप्रैल से लागू हुए।
- सिंध को छोड़कर सभी प्रांतों में बाजार रात 8 बजे बंद करना अनिवार्य किया गया है।
- बलूचिस्तान जैसे संवेदनशील प्रांत में पुलिस गश्त ठप होने से अपराध और सुरक्षा खतरे बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
- मेडिकल स्टोर और फार्मेसी ऊर्जा बचत प्रतिबंधों से मुक्त रखे गए हैं।
क्वेटा, 23 अप्रैल — पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा में गहराते ईंधन संकट ने शहर की कानून-व्यवस्था को खतरे में डाल दिया है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बाद पाकिस्तान सरकार द्वारा लागू किए गए ऊर्जा बचत उपायों के चलते पुलिस थानों को इतना कम ईंधन मिल रहा है कि नियमित गश्त (पेट्रोलिंग) लगभग पूरी तरह ठप हो गई है। इससे आम नागरिकों में अपराध बढ़ने की गहरी आशंका पैदा हो गई है।
थानों में महीनेभर के लिए सिर्फ 70 लीटर ईंधन
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, क्वेटा के कई पुलिस थानों की गश्ती गाड़ियां पेट्रोल और डीजल की भारी कमी के कारण खड़ी हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, प्रत्येक थाने को पूरे महीने के लिए मात्र 70 लीटर ईंधन आवंटित किया जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मात्रा किसी एक वाहन को महज चार दिन चलाने के लिए भी पर्याप्त नहीं है। इसका सीधा नतीजा यह है कि महीने के शेष दिनों में अधिकांश पेट्रोलिंग गाड़ियां थाने की पार्किंग में खड़ी रहती हैं।
स्थिति तब और विकट हो गई जब रोजाना के आधार पर सिर्फ दो लीटर ईंधन देने की व्यवस्था लागू की गई। इतनी न्यून आपूर्ति में शहर के विभिन्न मोहल्लों और संवेदनशील इलाकों में नियमित पुलिस गश्त संभव नहीं रह गई है।
आम जनता पर असर — अपराध का बढ़ता भय
पुलिस गश्त के अभाव में क्वेटा के नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। शहर के कई इलाकों में रात के समय कोई पुलिस वाहन नजर नहीं आता, जिससे चोरी, लूट और अन्य अपराधों की आशंका बढ़ गई है।
गौरतलब है कि बलूचिस्तान पहले से ही सुरक्षा चुनौतियों से जूझता रहा है। ऐसे में पुलिस की उपस्थिति कम होना न केवल आपराधिक घटनाओं को बढ़ावा दे सकता है, बल्कि यह आतंकवाद-रोधी अभियानों को भी कमजोर कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कमी से सबसे ज्यादा नुकसान उन इलाकों को होगा जहां पुलिस की भौतिक उपस्थिति ही अपराधियों के लिए सबसे बड़ा निवारक होती है।
पाकिस्तान सरकार के ऊर्जा बचत उपाय
6 अप्रैल 2025 को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई बैठक में पाकिस्तान की केंद्र सरकार ने कठोर ऊर्जा बचत उपाय लागू करने का निर्णय लिया। ये निर्णय पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न हुए ऊर्जा दबाव के मद्देनजर लिए गए।
7 अप्रैल से लागू नियमों के तहत सिंध को छोड़कर सभी प्रांतों — पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान, इस्लामाबाद, गिलगित-बाल्टिस्तान और कश्मीर — में बाजार, मॉल, डिपार्टमेंटल स्टोर और दैनिक उपयोग की दुकानें रात 8 बजे बंद करना अनिवार्य कर दिया गया।
खैबर पख्तूनख्वा को रात 9 बजे तक बाजार खुले रखने की विशेष छूट दी गई है। बेकरी, रेस्टोरेंट, तंदूर और शादी हॉल रात 10 बजे तक खुले रह सकते हैं। निजी आवासों में आयोजित शादी समारोहों पर भी रात 10 बजे के बाद पाबंदी लागू है। हालांकि, मेडिकल स्टोर और फार्मेसी इन प्रतिबंधों से मुक्त रखे गए हैं।
विरोधाभास और गहरा संकट
यहां एक महत्वपूर्ण विरोधाभास उजागर होता है — पाकिस्तान सरकार एक ओर ऊर्जा बचत के नाम पर आम व्यापारियों और नागरिकों पर पाबंदियां थोप रही है, वहीं दूसरी ओर पुलिस और सुरक्षा बलों जैसी आवश्यक सेवाओं को भी ईंधन से वंचित किया जा रहा है।
तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो श्रीलंका के 2022 के आर्थिक संकट के दौरान भी ईंधन की कमी से पुलिस गश्त प्रभावित हुई थी, जिसके बाद अपराध दर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई थी। पाकिस्तान में यही परिदृश्य दोहराए जाने की आशंका जताई जा रही है।
आलोचकों का कहना है कि सरकार को ऊर्जा बचत के लिए आवश्यक सुरक्षा सेवाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए थी। बलूचिस्तान जैसे संवेदनशील प्रांत में पुलिस की कमजोर उपस्थिति दीर्घकालिक सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकती है।
आगे क्या होगा
यदि पाकिस्तान सरकार ने शीघ्र ही पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए अलग ईंधन आवंटन नीति नहीं बनाई, तो क्वेटा सहित बलूचिस्तान के अन्य शहरों में कानून-व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ सकती है। विशेषज्ञ मांग कर रहे हैं कि सरकार आवश्यक सेवाओं को ऊर्जा बचत उपायों से बाहर रखे और पुलिस बलों के लिए विशेष ईंधन कोटा सुनिश्चित करे।