डस्टलिक-7 सैन्य अभ्यास संपन्न: भारत-उज्बेकिस्तान की सेनाओं ने मिलाए कदम, आतंकरोधी ताकत हुई दोगुनी
सारांश
Key Takeaways
- डस्टलिक-VII भारत और उज्बेकिस्तान के बीच २४ अप्रैल २०२५ को नामंगन, उज्बेकिस्तान में संपन्न हुआ।
- दोनों देशों के कुल १२० सैनिकों ने इस अभ्यास में भाग लिया, जिसमें भारतीय वायु सेना की भागीदारी भी शामिल रही।
- भारत की ओर से महार रेजिमेंट के ४५ जवान और वायु सेना के १५ कर्मी इस अभ्यास का हिस्सा बने।
- समापन में ४८ घंटे का फाइनल वैलिडेशन किया गया जिसमें आतंकवाद-रोधी रणनीतियों को वास्तविक परिस्थितियों में परखा गया।
- यह अभ्यास २०१९ में शुरू हुई श्रृंखला का सातवां संस्करण है और भारत की मध्य एशिया रणनीति का अहम हिस्सा है।
- डस्टलिक का आठवां संस्करण भारत में आयोजित होने की संभावना है।
नई दिल्ली, २४ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आयोजित सातवां संयुक्त सैन्य अभ्यास 'डस्टलिक-VII' शुक्रवार को नामंगन स्थित गुरुमसराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया में फाइनल वैलिडेशन एक्सरसाइज और क्लोजिंग सेरेमनी के साथ सफलतापूर्वक समाप्त हुआ। इस अभ्यास में दोनों देशों के कुल १२० सैनिकों ने भाग लिया और आतंकवाद-रोधी अभियानों में संयुक्त क्षमता को नई ऊंचाई दी।
अभ्यास की संरचना और भागीदारी
भारतीय सशस्त्र बलों की टुकड़ी में कुल ६० सैनिक शामिल थे। इनमें ४५ जवान मुख्यतः महार रेजिमेंट की एक बटालियन से थे, जबकि १५ भारतीय वायु सेना के कर्मी भी इसका हिस्सा बने। उज्बेकिस्तान की ओर से भी लगभग ६० सैनिक — जिनमें थल सेना और वायु सेना दोनों के जवान थे — इस संयुक्त अभ्यास में सक्रिय रहे।
भारतीय सेना के अतिरिक्त महानिदेशालय जनसंपर्क (एडीजीपीआई) ने बताया कि इस अभ्यास ने दोनों देशों की सेनाओं के बीच कमांड एवं कंट्रोल सिस्टम में बेहतर तालमेल स्थापित किया, जो भविष्य के संयुक्त अभियानों की नींव बनेगा।
प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु
इस अभ्यास में पहाड़ी इलाकों में संयुक्त ऑपरेशन, शारीरिक फिटनेस, सामरिक योजना, विशेष हथियारों के बुनियादी कौशल और गैर-कानूनी हथियारबंद समूहों के विरुद्ध अभियान को केंद्र में रखा गया। अभ्यास के समापन में ४८ घंटे का फाइनल वैलिडेशन किया गया, जिसमें पूरी रणनीति को वास्तविक परिस्थितियों में परखा गया।
दोनों देशों ने अपने-अपने ऑपरेशनल अनुभव, तकनीक और युद्धनीति साझा किए। इससे न केवल सैन्य दक्षता बढ़ी, बल्कि सैनिकों के बीच व्यक्तिगत विश्वास और मित्रभाव का भी विकास हुआ।
डस्टलिक की पृष्ठभूमि और रणनीतिक महत्व
'डस्टलिक' एक वार्षिक सैन्य अभ्यास श्रृंखला है जो बारी-बारी से भारत और उज्बेकिस्तान में आयोजित होती है। इससे पहले का छठा संस्करण अप्रैल २०२५ में पुणे के औंध स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में संपन्न हुआ था। इस बार सातवां संस्करण उज्बेकिस्तान की धरती पर आयोजित किया गया।
यह अभ्यास भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति का एक अहम स्तंभ है। मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक उपस्थिति बढ़ाने और अफगानिस्तान के बाद बदले क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों के बीच यह साझेदारी और भी प्रासंगिक हो गई है। उज्बेकिस्तान, जो अफगानिस्तान से सटा हुआ देश है, भारत के लिए आतंकवाद-रोधी सहयोग में एक महत्वपूर्ण साझेदार बनता जा रहा है।
व्यापक रणनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि २०१९ में शुरू हुई इस अभ्यास श्रृंखला ने पिछले कुछ वर्षों में अपना दायरा लगातार बढ़ाया है। पहले यह केवल थल सेना तक सीमित था, लेकिन अब भारतीय वायु सेना की भागीदारी इसे एक संयुक्त सेवा अभ्यास का रूप दे रही है — जो इसके बढ़ते सामरिक महत्व का संकेत है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस तरह के अभ्यास दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को संस्थागत रूप देते हैं। यह केवल सैन्य प्रशिक्षण नहीं, बल्कि कूटनीतिक संबंधों की जमीन भी तैयार करते हैं।
आने वाले समय में डस्टलिक का आठवां संस्करण भारत में आयोजित होने की संभावना है, जो दोनों देशों के बीच इस रणनीतिक सैन्य साझेदारी को और गहरा करेगा।