नीति आयोग में बड़ा फैसला: बंगाल के अशोक लाहिड़ी बनेंगे उपाध्यक्ष, गोबर्धन दास को मिलेगी सदस्यता
सारांश
Key Takeaways
- अशोक लाहिड़ी को नीति आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किए जाने की तैयारी है, आधिकारिक घोषणा बाकी।
- गोबर्धन दास, IISER भोपाल के पूर्व निदेशक, को नीति आयोग का सदस्य बनाया जाएगा।
- लाहिड़ी डॉ. सुमन बेरी की जगह लेंगे, जो 2001-2011 तक NCAER के महानिदेशक और विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री रह चुके हैं।
- लाहिड़ी भारत के 12वें मुख्य आर्थिक सलाहकार रह चुके हैं और बालुरघाट से वर्तमान विधायक हैं।
- यह नियुक्तियां पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच हो रही हैं, जिसे राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
- नीति आयोग की स्थापना जनवरी 2015 में योजना आयोग के स्थान पर की गई थी और यह देश की नीति निर्माण की सर्वोच्च संस्था है।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल से जुड़े दो वरिष्ठ और अनुभवी नामों को नीति आयोग में महत्वपूर्ण पद सौंपे जाने की तैयारी है। सूत्रों के अनुसार, अशोक लाहिड़ी को नीति आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा, जबकि गोबर्धन दास को सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा। हालांकि अभी तक इन नियुक्तियों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अशोक लाहिड़ी: अर्थशास्त्र के दिग्गज
अशोक लाहिड़ी देश के जाने-माने अर्थशास्त्रियों में गिने जाते हैं और आर्थिक नीति निर्माण के क्षेत्र में उनका दशकों का अनुभव है। वे बालुरघाट विधानसभा क्षेत्र से पश्चिम बंगाल विधानसभा के वर्तमान सदस्य हैं।
लाहिड़ी ने कोलकाता के प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद वे दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, एशियाई विकास बैंक, बंधन बैंक और राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं से जुड़े रहे।
वे भारत सरकार के 12वें मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं। उल्लेखनीय है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में लाहिड़ी मैदान में नहीं हैं, और चुनाव के बीच ही उन्हें यह अहम जिम्मेदारी सौंपे जाने की खबर सामने आई है।
गोबर्धन दास: प्रशासन और नीति के अनुभवी
गोबर्धन दास को प्रशासनिक और नीतिगत मामलों में दक्ष माना जाता है। वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), नई दिल्ली में अपनी सेवाएं देने के बाद आईआईएसईआर भोपाल के निदेशक पद पर भी कार्य कर चुके हैं।
गोबर्धन दास पूर्व में चुनावी राजनीति में भी उतरे थे, हालांकि वे उस चुनाव में सफल नहीं हो सके थे। अब नीति आयोग में उनकी संभावित नियुक्ति उनके करियर में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।
डॉ. सुमन बेरी की विरासत और नया नेतृत्व
अशोक लाहिड़ी, डॉ. सुमन बेरी का स्थान लेंगे। डॉ. बेरी को तब नीति आयोग के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी जब प्रख्यात अर्थशास्त्री राजीव कुमार ने इस पद से इस्तीफा दिया था।
डॉ. सुमन बेरी इस पद पर आने से पहले बेल्जियम के ब्रुसेल्स स्थित एक प्रमुख आर्थिक थिंक टैंक से जुड़े थे। वे विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री भी रह चुके हैं और 2001 से 2011 तक नेशनल काउंसिल ऑफ अप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) के महानिदेशक के रूप में सेवारत रहे।
बंगाल चुनाव के बीच केंद्र की रणनीतिक पहल
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच इन नियुक्तियों को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य से जुड़े दो प्रतिष्ठित व्यक्तियों को केंद्र सरकार की शीर्ष नीति निर्माण संस्था में स्थान दिए जाने को एक सुविचारित कदम के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम बंगाल में केंद्र सरकार की बौद्धिक और प्रशासनिक पकड़ को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है। यह नियुक्तियां ऐसे समय में हो रही हैं जब राज्य में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच कड़ी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा जारी है।
गौरतलब है कि नीति आयोग की स्थापना जनवरी 2015 में योजना आयोग को भंग कर की गई थी, और तब से यह संस्था देश की दीर्घकालिक नीतियों के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाती रही है। ऐसे में इन पदों पर नियुक्तियां केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि नीतिगत दिशा तय करने वाली भी होती हैं।
आधिकारिक अधिसूचना जारी होते ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि नीति आयोग के नए नेतृत्व की प्राथमिकताएं क्या होंगी और पश्चिम बंगाल सहित पूर्वी भारत के विकास एजेंडे को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।