जनगणना 2027: भारत की पहली डिजिटल जनगणना में जातिगत गणना भी, ₹11,718 करोड़ का बजट
सारांश
Key Takeaways
- जनगणना 2027 भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें मोबाइल से डेटा संग्रह किया जाएगा।
- 30 अप्रैल 2025 को मंत्रिमंडलीय समिति ने जनगणना में जातिगत गणना शामिल करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।
- इस जनगणना के लिए ₹11,718.24 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है।
- CMMS पोर्टल के जरिए रियल-टाइम निगरानी और नागरिकों को स्व-प्रविष्टि का विकल्प मिलेगा।
- यह स्वतंत्र भारत की आठवीं और विश्व की सबसे बड़ी जनगणना होगी, जो दो चरणों में आयोजित होगी।
- जनगणना के नतीजे परिसीमन और संसदीय क्षेत्रों के पुनर्गठन को भी प्रभावित करेंगे।
नई दिल्ली। भारत की जनगणना 2027 देश के इतिहास की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें मोबाइल तकनीक के जरिए डेटा संग्रह किया जाएगा। 30 अप्रैल 2025 को राजनैतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने इस जनगणना में जातिगत गणना को भी शामिल करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। यह दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना होगी, जिसके लिए ₹11,718.24 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है।
डिजिटल जनगणना की मुख्य विशेषताएं
सरकार द्वारा जारी आधिकारिक फैक्ट-शीट के अनुसार, जनगणना 2027 में कई अभूतपूर्व तकनीकी सुविधाएं शामिल की जाएंगी। सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CMMS) पोर्टल के माध्यम से लगभग रियल-टाइम निगरानी संभव होगी।
नागरिकों को स्व-प्रविष्टि (Self-Enumeration) का विकल्प मिलेगा, यानी वे खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। इसके अलावा जियो-रेफरेंस्ड क्षेत्रों का व्यापक उपयोग किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर डेटा की सटीकता सुनिश्चित होगी।
यह जनगणना दो चरणों में संपन्न होगी — पहले चरण में मकान सूचीकरण और दूसरे चरण में जनसंख्या गणना। सुरक्षित डेटा सेंटर और विशाल प्रशिक्षित कार्यबल की तैनाती की जाएगी।
ऐतिहासिक निर्णय: जातिगत गणना का समावेश
जनगणना 2027 में जातिगत गणना का शामिल होना एक बड़ा नीतिगत बदलाव है। 2011 की जनगणना तक केवल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की व्यवस्थित गणना होती थी। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सहित अन्य जातियों का कोई आधिकारिक डेटा उपलब्ध नहीं था।
गौरतलब है कि 2011 में हुई सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना (SECC) के आंकड़े कभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किए गए थे, जो एक बड़ा विवाद का विषय रहा। अब 2027 में पहली बार आधिकारिक जनगणना के साथ जातिगत डेटा एकत्र किया जाएगा, जो आरक्षण नीति, कल्याणकारी योजनाओं और संसाधन आवंटन के लिए ठोस आधार प्रदान करेगा।
नीति निर्माण और शासन पर प्रभाव
जनगणना 2027 से एकत्र डेटा भोजन, पानी, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बेहतर नियोजन का आधार बनेगा। सरकार के अनुसार, यह जनगणना साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को नई ऊंचाई पर ले जाएगी।
जनसांख्यिकीय, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक आंकड़ों का यह विशाल भंडार योजनाकारों, प्रशासकों और शोधकर्ताओं के लिए अमूल्य संसाधन साबित होगा। स्थानीय स्तर पर सटीक डेटा से सरकारी योजनाओं को सही लाभार्थियों तक पहुंचाना आसान होगा।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य और तुलनात्मक विश्लेषण
यह स्वतंत्रता के बाद भारत की आठवीं जनगणना होगी। जनसंख्या के लिहाज से भारत अब चीन को पीछे छोड़ दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन चुका है, इसलिए यह स्वाभाविक रूप से विश्व की सबसे बड़ी जनगणना होगी।
तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो अमेरिका और यूरोपीय देश पहले से डिजिटल जनगणना अपना चुके हैं, लेकिन भारत की विशालता और विविधता को देखते हुए यह उपलब्धि कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण है। COVID-19 महामारी के कारण 2021 में होने वाली जनगणना स्थगित हो गई थी, जिसके चलते देश को छह वर्षों से अधिक समय तक अद्यतन जनसंख्या डेटा के बिना रहना पड़ा।
डेटा सुरक्षा और बजट
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए ₹11,718.24 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है। डेटा सुरक्षा के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा प्रणाली और सुरक्षित सर्वर अवसंरचना तैयार की जा रही है। नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता सुनिश्चित करना इस पूरी प्रक्रिया की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
आने वाले महीनों में सरकार जनगणना की विस्तृत कार्ययोजना, प्रश्नावली और प्रशिक्षण कार्यक्रम सार्वजनिक करेगी। जनगणना 2027 के नतीजे न केवल अगले एक दशक की नीतियों की दिशा तय करेंगे, बल्कि परिसीमन और संसदीय क्षेत्रों के पुनर्गठन की प्रक्रिया को भी प्रभावित करेंगे।