ग्रीष्मकालीन मूंग खरीदी पर दिग्विजय सिंह का CM मोहन यादव को पत्र, MSP से कम भाव पर किसानों को नुकसान
सारांश
Key Takeaways
- दिग्विजय सिंह ने 25 अप्रैल 2025 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर ग्रीष्मकालीन मूंग की MSP पर खरीदी के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की।
- मध्य प्रदेश की निजी मंडियों में मूंग का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम चल रहा है, जिससे किसानों को नुकसान की आशंका है।
- गिरदावरी रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष ग्रीष्मकालीन मूंग के रकबे में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
- हर वर्ष राज्य सरकार केंद्र को मूंग खरीदी का प्रस्ताव भेजती है, लेकिन इस वर्ष अब तक कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया।
- कृषि सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य केदार सिरोही ने दिग्विजय सिंह को फसल की स्थिति से अवगत कराया।
- दिग्विजय सिंह ने मांग की कि मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत शीघ्र प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाए।
भोपाल, 25 अप्रैल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राज्य में ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदे जाने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कदम नहीं उठाए गए तो प्रदेश के लाखों किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
किसानों को नुकसान की आशंका
कृषि सलाहकार परिषद, मध्य प्रदेश के पूर्व सदस्य केदार सिरोही ने दिग्विजय सिंह को सूचित किया है कि राज्य में ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल अब बाजार में आने के लिए पूरी तरह तैयार है। वर्तमान में निजी मंडियों में मूंग का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम चल रहा है, जिससे किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा।
यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब गिरदावरी रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष ग्रीष्मकालीन मूंग के रकबे में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका सीधा अर्थ है कि उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी और बाजार में आपूर्ति अधिक रहेगी, जिससे भाव और गिरने की आशंका है।
प्रस्ताव न भेजे जाने पर सवाल
दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि प्रत्येक वर्ष राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार को मूंग खरीदी का प्रस्ताव भेजा जाता है, जिसके आधार पर मूल्य समर्थन योजना (PSS) के अंतर्गत खरीदी की अनुमति प्रदान की जाती है। परंतु इस वर्ष अब तक ऐसा कोई प्रस्ताव केंद्र को नहीं भेजा गया है, जो अपने आप में एक गंभीर प्रशासनिक चूक है।
यह विडंबना ही है कि एक ओर सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, दूसरी ओर जब फसल बाजार में आने को तैयार है, तब MSP पर खरीदी का प्रस्ताव तक केंद्र को नहीं भेजा गया। ऐसे में किसान खुले बाजार में औने-पौने दाम पर अपनी उपज बेचने को मजबूर हो सकते हैं।
दिग्विजय सिंह की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से आग्रह किया है कि संबंधित विभाग को तत्काल निर्देश दिए जाएं कि ग्रीष्मकालीन मूंग की MSP पर खरीदी के लिए प्रस्ताव शीघ्रातिशीघ्र केंद्र सरकार को प्रेषित किया जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य सरकार इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए त्वरित निर्णय लेगी।
व्यापक संदर्भ और प्रभाव विश्लेषण
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश देश के प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों में से एक है। यहां के किसान हर वर्ष ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं। यदि MSP से नीचे भाव पर फसल बिकती है, तो इसका असर न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति पर, बल्कि अगले सीजन में उनकी बुआई के निर्णय पर भी पड़ेगा।
तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने अपने किसानों के लिए समय रहते MSP खरीदी प्रस्ताव केंद्र को भेजे हैं। मध्य प्रदेश में इस देरी से राज्य के किसान अन्य राज्यों के किसानों की तुलना में नुकसान में रह सकते हैं।
अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री मोहन यादव की प्रतिक्रिया और राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि सरकार शीघ्र प्रस्ताव भेजती है और केंद्र से अनुमति मिलती है, तो किसानों को राहत मिल सकती है — अन्यथा यह मुद्दा आगामी राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।