नीति आयोग की बड़ी रिपोर्ट: 10 लाख+ आबादी वाले शहरों के लिए नया शहरी शासन ढांचा जारी

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नीति आयोग की बड़ी रिपोर्ट: 10 लाख+ आबादी वाले शहरों के लिए नया शहरी शासन ढांचा जारी

सारांश

नीति आयोग ने 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए शहरी शासन सुधार की नई रूपरेखा जारी की। सीधे निर्वाचित मेयर, वित्तीय स्वायत्तता और सेवाओं के एकीकरण की सिफारिश की गई है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 10 राज्यों के मंत्रियों की मौजूदगी में रिपोर्ट जारी की।

Key Takeaways

  • नीति आयोग ने 25 अप्रैल 2025 को 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए शहरी शासन की नई रूपरेखा जारी की।
  • केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 10 से अधिक राज्यों के शहरी विकास मंत्रियों की उपस्थिति में रिपोर्ट सार्वजनिक की।
  • रिपोर्ट में सीधे निर्वाचित मेयर और सशक्त 'मेयर-इन-काउंसिल' प्रणाली लागू करने की सिफारिश की गई है।
  • म्युनिसिपल बॉन्ड और राज्य वित्त आयोगों के जरिए शहरी निकायों की वित्तीय स्वायत्तता बढ़ाने का प्रस्ताव है।
  • रिपोर्ट को विकसित भारत 2047 और 30 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य से सीधे जोड़ा गया है।
  • नीति आयोग सदस्य राजीव गौबा के अनुसार रिपोर्ट वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं और साक्ष्य-आधारित विश्लेषण पर आधारित है।

नई दिल्ली, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। नीति आयोग ने शनिवार, 25 अप्रैल 2025 को एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट सार्वजनिक की, जिसमें 10 लाख से अधिक आबादी वाले भारतीय शहरों में शहरी शासन को प्रभावी और जवाबदेह बनाने के लिए एक व्यापक नीतिगत ढांचा प्रस्तुत किया गया है। यह रिपोर्ट संस्थागत बिखराव, सीमित वित्तीय स्वायत्तता और जवाबदेही के अभाव जैसी पुरानी समस्याओं को सीधे संबोधित करती है।

रिपोर्ट की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एक विशेष कार्यक्रम में यह रिपोर्ट औपचारिक रूप से जारी की। इस अवसर पर 10 से अधिक राज्यों के शहरी विकास मंत्री उपस्थित रहे, जो इस सुधार प्रक्रिया में व्यापक राजनीतिक सहमति और प्रतिबद्धता का संकेत देता है।

नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने रिपोर्ट की मुख्य विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह दस्तावेज़ विशेषज्ञों के एक समूह के साथ गहन विचार-विमर्श, साक्ष्य-आधारित विश्लेषण और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है।

रिपोर्ट का पूरा शीर्षक है — 'असरदार शहरी शासन की ओर: 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों के लिए एक ढांचा'। यह रिपोर्ट उन शहरों को प्राथमिकता देती है जो देश की आर्थिक प्रगति के प्रमुख केंद्र हैं।

मुख्य सिफारिशें और प्रस्तावित सुधार

रिपोर्ट में सीधे जनता द्वारा निर्वाचित मेयर का पद स्थापित करने की सिफारिश की गई है, जिसका कार्यकाल निश्चित होगा। इसके साथ ही एक सशक्त 'मेयर-इन-काउंसिल' प्रणाली लागू करने का सुझाव दिया गया है, जिससे निर्णय प्रक्रिया में निरंतरता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता और सार्वजनिक परिवहन जैसी बुनियादी नागरिक सेवाओं को शहरी स्थानीय निकायों के प्रत्यक्ष नियंत्रण में लाने का भी प्रस्ताव है, ताकि सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही में सुधार हो।

वित्तीय मोर्चे पर रिपोर्ट में म्युनिसिपल बॉन्ड जैसे बाजार-आधारित साधनों तक पहुंच बनाने, राज्य वित्त आयोगों को मजबूत करने और शहरी निकायों की स्वयं की राजस्व क्षमता बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया है।

इसके अतिरिक्त, सेवा वितरण में संलग्न विभिन्न अर्ध-सरकारी एजेंसियों को शहरी सरकार की देखरेख में लाने और उनकी भूमिकाएं स्पष्ट रूप से परिभाषित करने का सुझाव भी शामिल है।

विकसित भारत 2047 से सीधा संबंध

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि 2047 तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य हासिल करने और 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह में शहरीकरण की भूमिका निर्णायक है। देश में आर्थिक विकास, नवाचार और रोजगार सृजन का मुख्य केंद्र शहर ही हैं।

गौरतलब है कि भारत में 74वें संविधान संशोधन (1992) के जरिए शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया गया था, लेकिन तीन दशक बाद भी अधिकांश शहरी निकाय वित्तीय और प्रशासनिक रूप से राज्य सरकारों पर निर्भर हैं। नीति आयोग की यह रिपोर्ट उसी अधूरे विकेंद्रीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश है।

राज्यों और केंद्र के लिए सुझाव

रिपोर्ट में राज्य सरकारों से अपील की गई है कि वे अपने नगरपालिका कानूनों में आवश्यक संशोधन करें ताकि ये सुधार कानूनी रूप से लागू हो सकें। साथ ही, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) से आग्रह किया गया है कि वह आदर्श नगरपालिका कानून को अद्यतन करे और राज्यों को इन सुधारों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन एवं मार्गदर्शन प्रदान करे।

तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो लंदन, टोक्यो और सिंगापुर जैसे वैश्विक शहरों में मजबूत महापौर प्रणाली और स्वायत्त वित्तीय ढांचा ही उनकी सेवा दक्षता का आधार है — भारतीय शहरों को भी उसी दिशा में ले जाने की यह कोशिश है।

आगे की राह

इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद अब नजरें राज्य सरकारों पर टिकी हैं कि वे इन सिफारिशों को किस हद तक और कितनी तेजी से अपने कानूनों में शामिल करती हैं। नीति आयोग के अनुसार इन सुधारों को अमल में लाना भारत के शहरों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।

Point of View

लेकिन असली परीक्षा राज्यों की राजनीतिक इच्छाशक्ति की होगी — क्योंकि सीधे निर्वाचित मेयर का मतलब है राज्य सरकारों के हाथ से शहरी सत्ता का बड़ा हिस्सा छिन जाना। 74वें संविधान संशोधन के 33 साल बाद भी विकेंद्रीकरण अधूरा है, यह विडंबना है। म्युनिसिपल बॉन्ड और वित्तीय स्वायत्तता की बात तब तक खोखली है जब तक शहरी निकायों की कर संग्रह क्षमता और पेशेवर प्रशासन नहीं सुधरता। विकसित भारत 2047 का सपना तभी पूरा होगा जब शहरी सुधार सिर्फ रिपोर्टों तक सीमित न रहें।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

नीति आयोग की शहरी शासन रिपोर्ट में क्या सिफारिश की गई है?
नीति आयोग ने 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए सीधे निर्वाचित मेयर, वित्तीय स्वायत्तता और शहरी सेवाओं के एकीकरण की सिफारिश की है। रिपोर्ट में म्युनिसिपल बॉन्ड और मजबूत राज्य वित्त आयोगों की भी वकालत की गई है।
यह रिपोर्ट किसने और कब जारी की?
यह रिपोर्ट 25 अप्रैल 2025 को केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 10 से अधिक राज्यों के शहरी विकास मंत्रियों की उपस्थिति में जारी की। नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने इसकी मुख्य विशेषताएं प्रस्तुत कीं।
इस रिपोर्ट का आम नागरिकों पर क्या असर होगा?
अगर इन सुधारों को लागू किया गया तो नागरिकों को पेयजल, स्वच्छता और परिवहन जैसी सेवाएं बेहतर मिलेंगी। सीधे निर्वाचित मेयर के जरिए स्थानीय जवाबदेही भी बढ़ेगी।
भारत में शहरी शासन सुधार की जरूरत क्यों है?
74वें संविधान संशोधन के बावजूद भारत के अधिकांश शहरी निकाय वित्तीय और प्रशासनिक रूप से कमजोर हैं। संस्थागत बिखराव और सीमित अधिकारों के कारण शहर प्रभावी सेवाएं देने में असमर्थ हैं।
नीति आयोग ने राज्यों को क्या करने को कहा है?
नीति आयोग ने राज्यों से अपने नगरपालिका कानूनों में संशोधन करने की अपील की है। साथ ही आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय से आदर्श नगरपालिका कानून अपडेट करने को कहा गया है।
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