पाकिस्तान में रियल एस्टेट लॉबी की दबंगई: FBR की प्रॉपर्टी वैल्यूएशन में 35%25 कटौती, टैक्स सुधार फिर पटरी से उतरे
सारांश
Key Takeaways
- FBR ने इस्लामाबाद समेत कई शहरों में प्रॉपर्टी वैल्यूएशन 10 से 35 प्रतिशत तक घटाई।
- यह कटौती डेवलपर्स और बिल्डर्स के कड़े विरोध के बाद की गई, जो रियल एस्टेट लॉबी की ताकत दर्शाती है।
- घोषित और वास्तविक लेनदेन मूल्यों के बीच की खाई बढ़ने से टैक्स चोरी और काले धन को बढ़ावा मिलेगा।
- FBR ने पूरे देश में एकसमान पुनर्मूल्यांकन के बजाय चुनिंदा इलाकों में बदलाव किए, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठे।
- पाकिस्तान का टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात लगभग 9-10 प्रतिशत है — दक्षिण एशिया में सबसे कम।
- राजस्व की कमी का बोझ अप्रत्यक्ष करों के जरिए आम नागरिकों पर डाला जाता है, जबकि संपन्न वर्ग को राहत मिलती रहती है।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान में फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (FBR) द्वारा प्रॉपर्टी वैल्यूएशन टेबल में किए गए ताजा संशोधनों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि देश की रियल एस्टेट लॉबी सरकारी नीतियों को किस हद तक प्रभावित करने में सक्षम है। डॉन की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद समेत कई प्रमुख शहरों में प्रॉपर्टी वैल्यूएशन 10 से 35 प्रतिशत तक घटा दी गई है — और यह कटौती डेवलपर्स व बिल्डर्स के तीखे विरोध के बाद हुई है।
क्या था मूल उद्देश्य और क्या हुआ हश्र
शुरुआत में FBR का इरादा सरकारी जमीन मूल्यांकन को वास्तविक बाजार दरों के करीब लाना था — एक ऐसा कदम जिसे पाकिस्तान के कमजोर टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात को सुधारने की दिशा में अहम माना जा रहा था। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला धीरे-धीरे नरम पड़ता गया — बार-बार बदलाव, स्थगन और रियायतों की झड़ी लग गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि जो मूल्यांकन बढ़ाए भी गए थे, वे भी बाजार की वास्तविक कीमतों से काफी कम थे। अब संशोधन के बाद तो यह खाई और भी चौड़ी हो गई है।
घोषित और वास्तविक कीमतों की खाई से बढ़ेगी टैक्स चोरी
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि घोषित लेनदेन मूल्य और वास्तविक बाजार कीमत के बीच का अंतर पाकिस्तान में टैक्स चोरी, काले धन और बेनामी संपत्तियों की सबसे बड़ी वजह है। ताजा संशोधनों ने इस अंतर को पाटने के बजाय और गहरा कर दिया है।
इससे कम कीमत पर सौदे दिखाकर स्टांप ड्यूटी और कैपिटल गेन्स टैक्स से बचने की प्रवृत्ति को और प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही बिना हिसाब-किताब वाले धन को रियल एस्टेट के जरिए वैध बनाने का रास्ता भी खुला रहेगा।
चुनिंदा इलाकों में बदलाव — पारदर्शिता पर सवाल
रिपोर्ट में एक और गंभीर पहलू उठाया गया है — FBR ने पूरे देश में एक समान और पारदर्शी पुनर्मूल्यांकन करने के बजाय केवल चुनिंदा क्षेत्रों में बदलाव किए हैं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या ये निर्णय डेटा और निष्पक्ष प्रक्रिया पर आधारित थे, या फिर प्रभावशाली समूहों के साथ पर्दे के पीछे हुई बातचीत का नतीजा हैं।
आलोचकों का कहना है कि यह चयनात्मक दृष्टिकोण FBR की संस्थागत विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
रियल एस्टेट लॉबी — पाकिस्तान की सबसे ताकतवर कारोबारी शक्ति
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में रियल एस्टेट सेक्टर को देश की सबसे प्रभावशाली कारोबारी लॉबी में गिना जाता है। इसकी पहुंच राजनीति, नौकरशाही और संस्थागत ढांचे तक है। सत्ता के गलियारों में इस क्षेत्र से जुड़े प्रभावशाली लोगों की हिस्सेदारी के कारण हर बार प्रभावी टैक्स लगाने की कोशिश विरोध की भेंट चढ़ जाती है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान का टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात दक्षिण एशिया में सबसे कम है — लगभग 9-10 प्रतिशत — जबकि भारत का यह अनुपात लगभग 18 प्रतिशत है। इस असंतुलन की बड़ी वजह रियल एस्टेट जैसे संपन्न सेक्टरों पर करों का प्रभावी संग्रह न हो पाना है।
आम नागरिकों पर बोझ, अमीरों को राहत
रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण विरोधाभास उजागर किया गया है — जब संपन्न वर्ग और कारोबारी लॉबी टैक्स से बचती रहती है, तो सरकार राजस्व के लिए अप्रत्यक्ष करों पर निर्भर रहती है। जीएसटी, पेट्रोलियम लेवी और अन्य उपभोक्ता करों का बोझ सीधे आम नागरिकों पर पड़ता है।
यह असंतुलन पाकिस्तान में बढ़ती आर्थिक असमानता और IMF से बार-बार कर्ज लेने की मजबूरी की एक बड़ी संरचनात्मक वजह है।
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक पाकिस्तान में रियल एस्टेट सेक्टर को राजनीतिक संरक्षण मिलता रहेगा, तब तक कोई भी टैक्स सुधार कार्यक्रम टिकाऊ नहीं होगा। IMF के साथ चल रहे बेलआउट कार्यक्रम के तहत राजस्व बढ़ाने की शर्तों को पूरा करना पाकिस्तान के लिए और भी कठिन होता जाएगा।